UP Police Regs 186अध्याय 15 · Special Offences
धारा 186 · पैरा-177. पशुओं को विष देने का पता लगाने का तरीका एवं विसरा से सम्बन्धित कार्यवाही
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
पशुओं को विष देने का पता लगाने के लिये पशुओं की मृत्यु दर पर निगरानी रखी जानी चाहिये तथा जब पशुओं की बड़ी संख्या में मृत्यु हो, विशेष कर जब चमड़े का मूल्य ऊँचा हो गया हो, पूछताछ की जावे। ग्राम पुलिस के सिपाहियों को असाधारण मृत्यु दर की रिपोर्ट करना चाहिये। जब बीमारी होने के कारण के बिना पशुओं की मृत्यु दर अत्यधिक हो, तो खालों को खरीदने वाले ठेकेदारों की गतिविधियों का पता लगाना महत्वूर्ण होगा। अनेक बार यह ध्यान में आया है कि ठेकेदार गांव में आता है, उसके प्रस्थान के कुछ समय पश्चात् पशु मर जाते हैं और थोड़े समय पश्चात् वह खालों, को खरीदने के लिए लौट आता है।
जमींदारों से यह अर्ज की जावे कि वे उन सभी पशुओं की खालें नष्ट कर दें जो संदिग्ध परिस्थितियों में मरे हों।
जब रासायनिक विश्लेषण वांछनीय हो मृत पशु के गुर्दे, जिगर और पेट के भाग तथा पेट में अन्तर्विष्ट वस्तुओं को नमक और पानी में डुबोकर मजिस्ट्रेट के आदेशों के लिए मुख्यालयों को भेज दिया जावे।
पशुओं को विष दिए जाने से संदेहित मामलों में, जब पदार्थ विश्लेषण के लिए भेजी जावें रासायनिक परीक्षक के मार्गदर्शन के लिए निम्नलिखित प्रारूप में संक्षिप्त विवरण दिये जावें-
(1) पशु की विशिष्ट जाति और स्वामी का नाम।
(2) अंतिम बार लिये गये आहार की प्रकृति ।
(3) इस आहार के लेने के बाद कितने शीघ्र रोग के लक्षण प्रकट हुये?
(4) क्या पशु का पीड़ा में होना प्रकट हुआ था?
(5) क्या दस्त हुए थे?
(6) क्या मुँह और नथनों से कोई स्राव निकला था?
(7) क्या ऐंठन देखी गई थी?
(8) क्या पशु अचेत देखा गया था? यदि हाँ, तो लक्षणों की उत्पत्ति के बाद कितने लक्षण प्रकट हुए।
(9) क्या यह सन्देहित है कि विष मुँह, गुदा या अधस्त्वचीय (खाल में सुई लगाकर विष दान) दिया गया था?
(10) क्या गुदा में कोई बाहरी पदार्थ विद्यमान था?
(11) क्या मृत्यु घटित हुई?
उपरोक्त बिन्दुओं पर जिला मजिस्ट्रेट को, उसके द्वारा रासायनिक परीक्षक के पास पदार्थ को भेजने के पूर्व सूचना दी जावे।
जमींदारों से यह अर्ज की जावे कि वे उन सभी पशुओं की खालें नष्ट कर दें जो संदिग्ध परिस्थितियों में मरे हों।
जब रासायनिक विश्लेषण वांछनीय हो मृत पशु के गुर्दे, जिगर और पेट के भाग तथा पेट में अन्तर्विष्ट वस्तुओं को नमक और पानी में डुबोकर मजिस्ट्रेट के आदेशों के लिए मुख्यालयों को भेज दिया जावे।
पशुओं को विष दिए जाने से संदेहित मामलों में, जब पदार्थ विश्लेषण के लिए भेजी जावें रासायनिक परीक्षक के मार्गदर्शन के लिए निम्नलिखित प्रारूप में संक्षिप्त विवरण दिये जावें-
(1) पशु की विशिष्ट जाति और स्वामी का नाम।
(2) अंतिम बार लिये गये आहार की प्रकृति ।
(3) इस आहार के लेने के बाद कितने शीघ्र रोग के लक्षण प्रकट हुये?
(4) क्या पशु का पीड़ा में होना प्रकट हुआ था?
(5) क्या दस्त हुए थे?
(6) क्या मुँह और नथनों से कोई स्राव निकला था?
(7) क्या ऐंठन देखी गई थी?
(8) क्या पशु अचेत देखा गया था? यदि हाँ, तो लक्षणों की उत्पत्ति के बाद कितने लक्षण प्रकट हुए।
(9) क्या यह सन्देहित है कि विष मुँह, गुदा या अधस्त्वचीय (खाल में सुई लगाकर विष दान) दिया गया था?
(10) क्या गुदा में कोई बाहरी पदार्थ विद्यमान था?
(11) क्या मृत्यु घटित हुई?
उपरोक्त बिन्दुओं पर जिला मजिस्ट्रेट को, उसके द्वारा रासायनिक परीक्षक के पास पदार्थ को भेजने के पूर्व सूचना दी जावे।
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