UP Police Regs 351अध्याय 27 · Duties under Special Acts and Rules
धारा 351 · पैरा-342. भगोड़े के पुलिस द्वारा पकड़े जाने पर प्रक्रिया
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
जब कोई भगोड़ा पुलिस के द्वारा पकड़ लिया जावे, पुलिस अधीक्षक को चाहिये के वह उसके कमान्डिंग आफिसर को उसका पकड़ा जाना अधिसूचित करे और उसी के साथ ही कमान्डिंग आफिसर को उसका पकड़ा जाना अधिसूचित करे और उसी के साथ ही कमान्डिंग आफिसर को उसका पकड़ा जाना अधिसूचित करे और उसी के साथ ही कमान्डिग आफिसर को उस व्यक्ति के पूरे नाम और पते की सूचना दें, जिसको पारितोषिक भुगतान योग्य है। ज्यों ही भगोड़ा अपनी यूनिट तक पहुँच जावे, कमान्डिंग आफिसर तत्काल मनीआर्डर द्वारा पारितोषिक की राशि उसके अधिकारी व्यक्ति को भेज देगा, जिसके मनीआर्डर की अभिस्वीकृति सपरीक्षा अधिकारियों द्वारा पारितोषिक के रूप में भुगतान की गई धनराशि और मनीआर्डर फीस के लिये पर्याप्त प्रमाणक मानी जावेगी।
पुलिस अधिकारी या सिपाही को, जिसके लिये पारितोषिक' देय हो, पुलिस अधीक्षक के कार्यालय की, जब उसे पारितोषिक का मनीआर्डर प्राप्त हो जावे, सूचित कर देना चाहिये ताकि भुगतान में होने वाला विलम्ब सम्बन्धित यूनिट के कमान्डिंग आफिसर को निर्देशित किया जा सके।
यूनिटों के कमान्डिंग आफिसर यह सुनिश्चित करेंगे कि सेना के भगोड़ों के पकड़े जाने के कारण दिये जाने वाले पारितोषिक के रूप में भुगताई जाने वाली धनराशि के भेजने में कोई विलम्ब न हो और ज्योंही भगोड़ा यूनिट पुनः सम्मिलित हो जावे, पारितोषिक की राशि भेज दी जावे। यूनिटों के कमान्डिंग आफिसर अग्रिम धनराशि का प्रवर्तन करते हुये ऐसी धनराशि को अपने अग्रिम में से देंगे। उन मामलों, में जहाँ तत्काल धन उपलब्ध न होने के कारण तत्काल आवश्यक धन न भेजा जा सके,
भगोड़ा अपनी यूनिट में पुनः सम्मिलित हो जावे, यूनिट के कमान्डिंग आफिसर पुलिस प्राधिकारी को प्राधिकृत कर सकते हैं कि वे राशि को भुगतान पुलिस निधि से 13 दिसम्बर सन् 1944 के पुलिस गजट, पृष्ट 253 और 254 पर अधिसूचना क्रमांक छ:/56-43, दिनांक 8 दिसम्बर, 1944 के अधीन प्रकाशित भारतीय आर्मी आर्डर्स क्रमांक 2095/44 के अधीन कर दें। इस प्रकार पुलिस निधि से भुगतान की गई धनराशि बाद में सम्बन्धित सैनिक लेखाओं के नियन्त्रक के नामें डाल दी जावे।
पुलिस अधिकारी या सिपाही को, जिसके लिये पारितोषिक' देय हो, पुलिस अधीक्षक के कार्यालय की, जब उसे पारितोषिक का मनीआर्डर प्राप्त हो जावे, सूचित कर देना चाहिये ताकि भुगतान में होने वाला विलम्ब सम्बन्धित यूनिट के कमान्डिंग आफिसर को निर्देशित किया जा सके।
यूनिटों के कमान्डिंग आफिसर यह सुनिश्चित करेंगे कि सेना के भगोड़ों के पकड़े जाने के कारण दिये जाने वाले पारितोषिक के रूप में भुगताई जाने वाली धनराशि के भेजने में कोई विलम्ब न हो और ज्योंही भगोड़ा यूनिट पुनः सम्मिलित हो जावे, पारितोषिक की राशि भेज दी जावे। यूनिटों के कमान्डिंग आफिसर अग्रिम धनराशि का प्रवर्तन करते हुये ऐसी धनराशि को अपने अग्रिम में से देंगे। उन मामलों, में जहाँ तत्काल धन उपलब्ध न होने के कारण तत्काल आवश्यक धन न भेजा जा सके,
भगोड़ा अपनी यूनिट में पुनः सम्मिलित हो जावे, यूनिट के कमान्डिंग आफिसर पुलिस प्राधिकारी को प्राधिकृत कर सकते हैं कि वे राशि को भुगतान पुलिस निधि से 13 दिसम्बर सन् 1944 के पुलिस गजट, पृष्ट 253 और 254 पर अधिसूचना क्रमांक छ:/56-43, दिनांक 8 दिसम्बर, 1944 के अधीन प्रकाशित भारतीय आर्मी आर्डर्स क्रमांक 2095/44 के अधीन कर दें। इस प्रकार पुलिस निधि से भुगतान की गई धनराशि बाद में सम्बन्धित सैनिक लेखाओं के नियन्त्रक के नामें डाल दी जावे।
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