UP Police Regs 494अध्याय 32 · Departmental Punishment of Police Officers and Their Criminal Prosecution
धारा 494 · पैरा-478-ए
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
पैरा 478 में अंकित दण्ड (क) और (ख) केवल विभागीय कार्यवाही के पश्चात् ही दिया जा सकता है, देखिए पैरा 490 से 494। (खक) से सम्बन्धित आदेश अध्याय तीस के अधीन पारित किये जा सकते हैं और (खख) से सम्बन्धित, यथास्थिति पैरा 463 या पैरा 482-क में यथाउपबन्धित रूप से पारित किए जा सकते हैं।
(खग) में अंकित दण्ड, सम्बन्धित अधिकारी को यह कारण बताने का युक्तियुक्त अवसर दिये जाने के पश्चात् कि क्यों न प्रस्तावित दुराचरण की प्रविष्टि उनकी चरित्र नामावली में की जावे, दिया जा सकेगा।
(खग) में अंकित दण्ड तब दिया जा सकता है जब पैरा 490 से 494 के अनुसार विभागीय कार्यवाही (क), (ख), (खक) और (ख ख) में अंकित दण्डों में से एक दिये जाने के लिये मूलतः प्रारम्भ की गई हो और दण्ड देने वाला प्राधिकारी अन्ततः प्रथम को ही कम गम्भीर दण्ड के रूप में देना पर्याप्त समझे।1
टिप्पणी
शा०आ०सं० 12978/आठ-का०-11/68, दिनांक 1-8-69 में यह स्पष्ट है कि विनियम के पैरा 490 या 478-अ किसी में दी प्रक्रिया के अनुसार पुलिस कर्मचारी को दिया गया दुश्चरित्र अभिलेख धारा 7 पुलिस एक्ट के अन्दर कृत कार्यवाही है। पैरा 486 (3) में निदेश है कि धारा 7 में विभागीय कार्यवाही के पूर्व प्रारम्भिक जांच करा ली जाय इसलिये उक्त प्रक्रिया को अपनाने के पूर्व, कारण बताओ नोटिस जारी होने वाले मामले में भी प्रारम्भिक जांच होनी चाहिये।
जहाँ दुश्चरित्र प्रविष्टि देने के लिये कारण बताओ नोटिस दी गई हो, उसमें या तो वह दण्ड दिया जाय या आरोप मुक्त कर दिया जाय, जैसा कि अभिलेख दर्शाता हो, पर इसके एवज में उसके निजी पत्रावली पर तंबीह का दिया जाना अवैध होगा, क्योंकि पैरा 478 पु०रे० में यह दण्ड नहीं माना गया है।
दण्ड देने सम्बन्धी प्रक्रिया, उ०प्र० अधीनस्थ श्रेणी के पुलिस अधिकारियों की दण्ड एवं अपील नियमावली, 1991 के नियम 4, 5, 6, 14 एवं 15 में दी गयी है।
(खग) में अंकित दण्ड, सम्बन्धित अधिकारी को यह कारण बताने का युक्तियुक्त अवसर दिये जाने के पश्चात् कि क्यों न प्रस्तावित दुराचरण की प्रविष्टि उनकी चरित्र नामावली में की जावे, दिया जा सकेगा।
(खग) में अंकित दण्ड तब दिया जा सकता है जब पैरा 490 से 494 के अनुसार विभागीय कार्यवाही (क), (ख), (खक) और (ख ख) में अंकित दण्डों में से एक दिये जाने के लिये मूलतः प्रारम्भ की गई हो और दण्ड देने वाला प्राधिकारी अन्ततः प्रथम को ही कम गम्भीर दण्ड के रूप में देना पर्याप्त समझे।1
टिप्पणी
शा०आ०सं० 12978/आठ-का०-11/68, दिनांक 1-8-69 में यह स्पष्ट है कि विनियम के पैरा 490 या 478-अ किसी में दी प्रक्रिया के अनुसार पुलिस कर्मचारी को दिया गया दुश्चरित्र अभिलेख धारा 7 पुलिस एक्ट के अन्दर कृत कार्यवाही है। पैरा 486 (3) में निदेश है कि धारा 7 में विभागीय कार्यवाही के पूर्व प्रारम्भिक जांच करा ली जाय इसलिये उक्त प्रक्रिया को अपनाने के पूर्व, कारण बताओ नोटिस जारी होने वाले मामले में भी प्रारम्भिक जांच होनी चाहिये।
जहाँ दुश्चरित्र प्रविष्टि देने के लिये कारण बताओ नोटिस दी गई हो, उसमें या तो वह दण्ड दिया जाय या आरोप मुक्त कर दिया जाय, जैसा कि अभिलेख दर्शाता हो, पर इसके एवज में उसके निजी पत्रावली पर तंबीह का दिया जाना अवैध होगा, क्योंकि पैरा 478 पु०रे० में यह दण्ड नहीं माना गया है।
दण्ड देने सम्बन्धी प्रक्रिया, उ०प्र० अधीनस्थ श्रेणी के पुलिस अधिकारियों की दण्ड एवं अपील नियमावली, 1991 के नियम 4, 5, 6, 14 एवं 15 में दी गयी है।
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