UP Police Regs 114अध्याय 11 · Research
धारा 114 · पैरा-109. केस डायरी में अपेक्षित विशिष्टियों को विस्तार से लिखना
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केस डायरी में, जैसा कि दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 172 द्वारा अपेक्षित है, इतना विस्तार अवश्य होना चाहिये कि पर्यवेक्षक अधिकारी तथ्यों को समझ सके। प्रथम इत्तिला रिपोर्ट से परिवादी के कथन में जो भेद हों तथा अनुपूरक कथनों का, यदि कोई हों, सार अभिलिखित किया जाना चाहिये। अन्वेषण अधिकारी दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 161 के अधीन साक्षियों की परीक्षा करते समय उनके कथन अभिलिखित करने के लिये बाध्य नहीं है। किन्तु यदि वह ऐसा करता है तो वह प्रत्येक ऐसे व्यक्ति के, जिसका कथन वह अभिलिखित करता है, कथन का पृथक् अभिलेख तैयार करेगा। कथन प्रथम प्रारूप के रूप में अभिलिखित किये जावेंगे और उनमें ऐसी विशिष्टियाँ होंगी जो मामले के अभियोजन में लाभकारी होने की सम्भावना रखती हों।
विधि यह अपेक्षा करती है कि कथन, यदि अभिलिखित किये जायें, तो पृथक्-पृथक् अभिलिखित किये जायें। अतः केवल यह लिख देना कि किसी साक्षी ने परिवादी अथवा किसी अन्य साक्षी का सारतः समर्थन किया है, विधि के अनुपालन के लिये पर्याप्त न होगा, और ऐसे वाक्यांशों से बचना चाहिये।
किन्तु अभियुक्त का कथन पूर्ण रूप से अभिलिखित किया जाना चाहिये। तत्पश्चात् उस दिन के लिये अन्वेषण बन्द कर दिया जाये, बन्द करने का समय और स्थान अंकित किया जाये तथा अन्वेषण की अवधि के प्रत्येक दिन की डायरी की गई कार्यवाही के लिये प्रतिदिन अधीक्षक को भेजी जाये। यदि अन्वेषण अधिकारी थाने का भारसाधक अधिकारी न हो तो, उस दशा के सिवाय जब इससे विलम्ब हो, डायरी भारसाधक अधिकारी के मार्फत भेजी जानी चाहिये। यदि एक ही मामले का एक ही समय में एक से अधिक अधिकारी स्वतन्त्र रूप से अन्वेषण कर रहे हों तो प्रत्येक पृथक् डायरी रखेगा। दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 172 और 173 का ध्यानपूर्वक अध्ययन किया जाना चाहिये। तुच्छ मामलों में सामान्यतया बहुत संक्षिप्त डायरी पर्याप्त होगी।
टिप्पणी
उपर्युक्त पैरा का कोई विधिक आधार नहीं है और वह अन्वेषण के लिये मात्र प्रशासनिक निदेश है।
विधि यह अपेक्षा करती है कि कथन, यदि अभिलिखित किये जायें, तो पृथक्-पृथक् अभिलिखित किये जायें। अतः केवल यह लिख देना कि किसी साक्षी ने परिवादी अथवा किसी अन्य साक्षी का सारतः समर्थन किया है, विधि के अनुपालन के लिये पर्याप्त न होगा, और ऐसे वाक्यांशों से बचना चाहिये।
किन्तु अभियुक्त का कथन पूर्ण रूप से अभिलिखित किया जाना चाहिये। तत्पश्चात् उस दिन के लिये अन्वेषण बन्द कर दिया जाये, बन्द करने का समय और स्थान अंकित किया जाये तथा अन्वेषण की अवधि के प्रत्येक दिन की डायरी की गई कार्यवाही के लिये प्रतिदिन अधीक्षक को भेजी जाये। यदि अन्वेषण अधिकारी थाने का भारसाधक अधिकारी न हो तो, उस दशा के सिवाय जब इससे विलम्ब हो, डायरी भारसाधक अधिकारी के मार्फत भेजी जानी चाहिये। यदि एक ही मामले का एक ही समय में एक से अधिक अधिकारी स्वतन्त्र रूप से अन्वेषण कर रहे हों तो प्रत्येक पृथक् डायरी रखेगा। दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 172 और 173 का ध्यानपूर्वक अध्ययन किया जाना चाहिये। तुच्छ मामलों में सामान्यतया बहुत संक्षिप्त डायरी पर्याप्त होगी।
टिप्पणी
उपर्युक्त पैरा का कोई विधिक आधार नहीं है और वह अन्वेषण के लिये मात्र प्रशासनिक निदेश है।
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