UP Police Regs 12अध्याय 1 · Senior Officers
धारा 12 · पैरा-9. जिला मजिस्ट्रेट द्वारा थाने का निरीक्षण
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जिला मजिस्ट्रेट को साधारण तौर पर प्रत्येक थाने का अर्द्ध वर्ष में एक बार निरीक्षण करना चाहिये, तथापि उन जिलों में जहाँ एडीशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (कार्यालय) पदस्थ हो, जिला मजिस्ट्रेट थानों का निरीक्षण उसे सौंप सकता है। जिला मजिस्ट्रेट को देखना चाहिये कि प्रत्येक अर्द्ध वर्ष के भीतर सब डिवीजन मजिस्ट्रेट हर थाने का कम से कम एक बार सविस्तार और एक बार आकस्मिक रूप से निरीक्षण करता है। उसे उनके मन में यह भावना जमाना चाहिये कि उनके कर्त्तव्य दोहरे हैं-पुलिस को विधि और व्यवस्था के प्रवर्तन (बनाये रखने) में सहायता पहुँचाना और अन्याय का प्रतिषेध करना। वह अपने किसी अधीनस्थ मजिस्ट्रेट को थानों को निरीक्षण करने के लिये निर्देश दे सकता है, परन्तु साधारणतया तृतीय वर्ग के मजिस्ट्रेट को उन्हें निरीक्षण करने को निर्देशित नहीं किया जाना चाहिये जब तक कि यह उनके प्रशिक्षण के अंग के रूप में आवश्यक न हो। खाली पृष्ठों से युक्त मजिस्ट्रेटों द्वारा प्रयोग किये जाने के लिये एक निरीक्षण पुस्तक प्रत्येक थाने में रखी जाब्रेगी। ऐसी हर निरीक्षण पुस्तक के आवरण (कवर) के भीतरी ओर प्रारूप क्र० 390 में अपराध का संक्षेप चिपकाया जावेगा। जब कभी उसमें निरीक्षण टीप अंकित की जावे, इस पुस्तक को पुलिस अधीक्षक को भेजी जानी चाहिए और उसके द्वारा वह जिला मजिस्ट्रेट को सूचना के लिये भेज दी जावेगी।
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