UP Police Regs 190अध्याय 15 · Special Offences
धारा 190 · पैरा-181. पशुओं की चोरी के मामले में सामान्य निर्देश
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
निम्नलिखित निर्देश सभी जिलों को लागू होंगे :-
(1) थाने का भारसाधक अधिकारी, चोरी गए पशुओं की विवरणात्मक नामावली के साथ पशु चोरी का शीघ्र रिपोर्ट अपने और अन्य जिलों के सभी पड़ोसी थानों को भेजेगा। वह अपने थाने की अधिकारिता के भीतर काँजी हाउस के रखवालों को यदि कोई हो, आवारा हो जाने की रिपोर्ट की सूचना देगा, और अपने थाने के नोटिस बोर्ड पर आवारा होने की सूचना चिपकायेगा।
(2) काँजी हाउस के पशुओं की चोरी गयी पशुओं की विवरणात्मक नामावली के साथ सावधानी से तुलना की जावे। पड़ोस के कृषकों के अतिरिक्त अन्य व्यक्तियों के द्वारा पशुओं को अवरुद्ध किए जाने या कॉंजी हाउस से दूर रहने वाले व्यक्तियों द्वारा पाले जाने के मामले में सावधानीपूर्वक जाँच की जावे।
(3) वर्ष के दौरान उनके फेरों की जगह से प्राप्त आबारा होने की रिपोर्ट की सूची कान्सटेबिलों को दी जानी चाहिए और उन्हें गाँव के चौकीदारों, निवासियों से यह सुनिश्चित करना चाहिए कि क्या आबारा गये पशु पुनः प्राप्त कर लिए गए हैं, यदि हाँ, तो किन परिस्थितियों में। ग्राम चौकीदारों से, जब वे थाने में परिदर्शन के लिए आयें, इन बिन्दुओं पर प्रश्न किया जाना चाहिए।
(4) जब ग्राम चौकीदार थाने का परिदर्शन करें, थाने का भारसाधक अधिकारी थाने पर की गई पशुओं की चोरी या आवारा हो जाने की रिपोर्टों को पढ़वा कर सुनवायेगा और उनकी व्याख्या करेगा।
(5) हर थाने के भारसाधक अधिकारी को पशु ठाँगदारों के नाम और पतों की पूरी जानकारी होनी चाहिए और उसे यह पता लगाने का प्रयत्न करना चाहिए कि क्या अभ्यासित या पशु किसी विशेष दिशा में ले जाये जाते हैं और क्या उसके मण्डल में कोई ऐसे ग्राम हैं जिनके अधिकांश निवासी पशु चोरों से सहानुभूति रखते हैं तथा क्या कोई ऐसे क्षेत्र उदाहरणार्थ डाक के जगल और नदी के खादर हैं, जहाँ चोरी गये पशुओं को अस्थायी रूप से रोका जा सकता है। सहारनुपर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलन्दशहर, अलीगढ़, मुरादाबाद, आगरा, फर्रुखाबाद, बदायूँ और शाहजहाँपुर जिलों के हर एक थाने में थानेदार ग्राम अपराध पुस्तक के साथ ठाँगदारों के नाम और उन गाँवों को जिसमें वे रहते हैं, दर्शाते हुए एक सूची रखेगा। इन सूचियों पर अन्य कोई विवरण देने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि ये सभी विवरण ग्राम अपराध पुस्तक में अन्तर्विष्ट होंगे। यदि कोई गाँव ठाँगदारों से इतना भरा हुआ है कि कुछ नामों का विनिर्दिष्ट किया जाना महत्वहीन होगा। (उदाहरणार्थ गूजरों के कुछ गांवों की दशा में), तो सूची में केवल गांव का नाम ही लिखना पर्याप्त होगा। सूची ग्राम अपराध पुस्तक को निर्देशिका का कार्य करेगी और थानेदार तथा निरीक्षण करने वाले अधिकारियों को एक झलक में यह बता देगी कि पशु चोरी किस सीमा तक व्याप्त है।
दूसरे जिलों के पुलिस अधीक्षक अपने विवेकानुसार इस आदेश का विस्तार अपने जिले के सभी या किन्हीं थानों में कर सकते हैं।
(6) पारितोषिक न केवल पशुओं के चारों को गिरफ्तार कराने वालों या चोरी गये पशुओं को पुनर्प्राप्ति करने वालों को अपितु पशुओं के चोरों और उनके साथियों के निवास, प्रथाओं और मार्गों के बारे में लाभदायक सूचनायें देने वालों को भी मुक्त रूप से दिये जावें। इस मामले में ग्राम चौकीदारों को सहायता पहुँचाने के लिये, बुद्धिमत्तापूर्वक प्रोत्साहित किया जाना चाहिये।
(7) भारतीय दण्ड संहिता की धारा 411, 412 और 414 के अन्तर्गत आने वाले पशुओं से सम्बन्धित सभी अपराध उन जिलों और थानों के द्वारा, जिसकी सीमाओं के भीतर चोरी की गई हो, रजिस्ट्रीकृत किये जावेंगे और विचारण के लिये भेजे जावेंगे। वहाँ अपराध चोरी की तरह रजिस्ट्रीकृत होंगे।
टीप-उत्तर प्रदेश के पुलिस अधीक्षक इस नियम का अनुसरण करने के लिए अन्य राज्यों की पुलिस से आग्रह नहीं करेंगे।
(8) उत्तर प्रदेश के थानेदार और मण्डल निरीक्षक, जिनका मण्डल पंजाब पुलिस मण्डल की सीमा पर हो, पंजाब मण्डल के थानागृह अधिकारियों और मण्डल निरीक्षकों से महीने में एक बार पशु चोरी और आपराधिक वर्ग के विशेष संदर्भ में सीमा की समस्याओं पर विचार करने की व्यवस्था करेंगे। हर बैठक में वे विचार किये गये विषय और प्रस्तावित कार्यवाही का एक संक्षिप्त अभिलेख बनायेंगे और इसको अधीक्षक के पास आदेश के लिए अग्रेषित करेंगे।
(9) उत्तर प्रदेश के निम्नलिखित जिलों के अधीक्षकों को पंजाब के निम्नलिखित जिलों के पुलिस अधीक्षकों को क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के अधीन रजिस्ट्रीकृत उनके जिले की जन-जातियों के बारे में सूचित करना चाहिये। इसी के साथ ही उन्हें सम्बन्धित पंजाब के जिलों के अधीक्षकों से ऐसी सूचना देने के लिए कहना चाहिये :-
पंजाब- गुड़गांव, करनाल, रोहतक, अम्बाला
उत्तर प्रदेश- देहरादून, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बुलन्दशहर, बिजनौर, मुजफ्फरनगर
(1) थाने का भारसाधक अधिकारी, चोरी गए पशुओं की विवरणात्मक नामावली के साथ पशु चोरी का शीघ्र रिपोर्ट अपने और अन्य जिलों के सभी पड़ोसी थानों को भेजेगा। वह अपने थाने की अधिकारिता के भीतर काँजी हाउस के रखवालों को यदि कोई हो, आवारा हो जाने की रिपोर्ट की सूचना देगा, और अपने थाने के नोटिस बोर्ड पर आवारा होने की सूचना चिपकायेगा।
(2) काँजी हाउस के पशुओं की चोरी गयी पशुओं की विवरणात्मक नामावली के साथ सावधानी से तुलना की जावे। पड़ोस के कृषकों के अतिरिक्त अन्य व्यक्तियों के द्वारा पशुओं को अवरुद्ध किए जाने या कॉंजी हाउस से दूर रहने वाले व्यक्तियों द्वारा पाले जाने के मामले में सावधानीपूर्वक जाँच की जावे।
(3) वर्ष के दौरान उनके फेरों की जगह से प्राप्त आबारा होने की रिपोर्ट की सूची कान्सटेबिलों को दी जानी चाहिए और उन्हें गाँव के चौकीदारों, निवासियों से यह सुनिश्चित करना चाहिए कि क्या आबारा गये पशु पुनः प्राप्त कर लिए गए हैं, यदि हाँ, तो किन परिस्थितियों में। ग्राम चौकीदारों से, जब वे थाने में परिदर्शन के लिए आयें, इन बिन्दुओं पर प्रश्न किया जाना चाहिए।
(4) जब ग्राम चौकीदार थाने का परिदर्शन करें, थाने का भारसाधक अधिकारी थाने पर की गई पशुओं की चोरी या आवारा हो जाने की रिपोर्टों को पढ़वा कर सुनवायेगा और उनकी व्याख्या करेगा।
(5) हर थाने के भारसाधक अधिकारी को पशु ठाँगदारों के नाम और पतों की पूरी जानकारी होनी चाहिए और उसे यह पता लगाने का प्रयत्न करना चाहिए कि क्या अभ्यासित या पशु किसी विशेष दिशा में ले जाये जाते हैं और क्या उसके मण्डल में कोई ऐसे ग्राम हैं जिनके अधिकांश निवासी पशु चोरों से सहानुभूति रखते हैं तथा क्या कोई ऐसे क्षेत्र उदाहरणार्थ डाक के जगल और नदी के खादर हैं, जहाँ चोरी गये पशुओं को अस्थायी रूप से रोका जा सकता है। सहारनुपर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलन्दशहर, अलीगढ़, मुरादाबाद, आगरा, फर्रुखाबाद, बदायूँ और शाहजहाँपुर जिलों के हर एक थाने में थानेदार ग्राम अपराध पुस्तक के साथ ठाँगदारों के नाम और उन गाँवों को जिसमें वे रहते हैं, दर्शाते हुए एक सूची रखेगा। इन सूचियों पर अन्य कोई विवरण देने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि ये सभी विवरण ग्राम अपराध पुस्तक में अन्तर्विष्ट होंगे। यदि कोई गाँव ठाँगदारों से इतना भरा हुआ है कि कुछ नामों का विनिर्दिष्ट किया जाना महत्वहीन होगा। (उदाहरणार्थ गूजरों के कुछ गांवों की दशा में), तो सूची में केवल गांव का नाम ही लिखना पर्याप्त होगा। सूची ग्राम अपराध पुस्तक को निर्देशिका का कार्य करेगी और थानेदार तथा निरीक्षण करने वाले अधिकारियों को एक झलक में यह बता देगी कि पशु चोरी किस सीमा तक व्याप्त है।
दूसरे जिलों के पुलिस अधीक्षक अपने विवेकानुसार इस आदेश का विस्तार अपने जिले के सभी या किन्हीं थानों में कर सकते हैं।
(6) पारितोषिक न केवल पशुओं के चारों को गिरफ्तार कराने वालों या चोरी गये पशुओं को पुनर्प्राप्ति करने वालों को अपितु पशुओं के चोरों और उनके साथियों के निवास, प्रथाओं और मार्गों के बारे में लाभदायक सूचनायें देने वालों को भी मुक्त रूप से दिये जावें। इस मामले में ग्राम चौकीदारों को सहायता पहुँचाने के लिये, बुद्धिमत्तापूर्वक प्रोत्साहित किया जाना चाहिये।
(7) भारतीय दण्ड संहिता की धारा 411, 412 और 414 के अन्तर्गत आने वाले पशुओं से सम्बन्धित सभी अपराध उन जिलों और थानों के द्वारा, जिसकी सीमाओं के भीतर चोरी की गई हो, रजिस्ट्रीकृत किये जावेंगे और विचारण के लिये भेजे जावेंगे। वहाँ अपराध चोरी की तरह रजिस्ट्रीकृत होंगे।
टीप-उत्तर प्रदेश के पुलिस अधीक्षक इस नियम का अनुसरण करने के लिए अन्य राज्यों की पुलिस से आग्रह नहीं करेंगे।
(8) उत्तर प्रदेश के थानेदार और मण्डल निरीक्षक, जिनका मण्डल पंजाब पुलिस मण्डल की सीमा पर हो, पंजाब मण्डल के थानागृह अधिकारियों और मण्डल निरीक्षकों से महीने में एक बार पशु चोरी और आपराधिक वर्ग के विशेष संदर्भ में सीमा की समस्याओं पर विचार करने की व्यवस्था करेंगे। हर बैठक में वे विचार किये गये विषय और प्रस्तावित कार्यवाही का एक संक्षिप्त अभिलेख बनायेंगे और इसको अधीक्षक के पास आदेश के लिए अग्रेषित करेंगे।
(9) उत्तर प्रदेश के निम्नलिखित जिलों के अधीक्षकों को पंजाब के निम्नलिखित जिलों के पुलिस अधीक्षकों को क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के अधीन रजिस्ट्रीकृत उनके जिले की जन-जातियों के बारे में सूचित करना चाहिये। इसी के साथ ही उन्हें सम्बन्धित पंजाब के जिलों के अधीक्षकों से ऐसी सूचना देने के लिए कहना चाहिये :-
पंजाब- गुड़गांव, करनाल, रोहतक, अम्बाला
उत्तर प्रदेश- देहरादून, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बुलन्दशहर, बिजनौर, मुजफ्फरनगर
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