UP Police Regs 538अध्याय 33 · Appeals, Revisions, Petitions and Copies of Official Documents
धारा 538 · पैरा-519. प्राइवेट व्यक्तियों या निकायों को दी जाने वाली प्रतिलिपियों के लिये भुगतान की दरें
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
विधि या विनियमों द्वारा अपेक्षित होने के सिवाय, सरकारी पत्र-व्यवहार तथा अभिलेखों की प्रतियाँ प्राइवेट व्यक्तियों या निकायों को कदाचित् ही दी जानी चाहिये। उदाहरणार्थ, पुलिस प्रयोजनों के लिये एकत्र की गई सूचना का व्यापारिक फर्मों को विज्ञापन में प्रयोग के लिये संसूचित किया जाना अनुचित होगा। (शासकीय आदेश पुस्तिका भी देखिये।) जब पुलिस अधीक्षक को, विधि या विनियम द्वारा अपेक्षित होने के सिवाय, सरकारी दस्तावेजों की प्रतियाँ दिये जाने के बारे में सन्देह हो, तब उसे आदेश के लिये महानिरीक्षक को निर्देश करना चाहिये। जब प्राइवेट व्यक्तियों या निकायों को प्रतियाँ दी जायें, तब भुगतान निम्नानुसार लिया जाना चाहिये :-
(1) 1,500 शब्दों से अनधिक प्रति के लिये एक रुपया।
(2) 1,500 शब्दों से अधिक प्रत्येक 300 शब्दों के लिये 1 रुपया (12 पैसे) अतिरिक्त।
(3) शुल्क की गणना करते समय प्रत्येक कथन, रिपोर्ट आदि को पृथक् दस्तावेज माना जाना चाहिये और उसके लिये पृथक् शुल्क लिया जाना चाहिये।
(4) हिन्दी या उर्दू के दस्तावेजों की नकल की दरें वही होंगी जो अंग्रेजी के दस्तावेजों की हैं।
(5) यदि किसी पुस्तक, रजिस्टर, मानचित्र या नक्शे की प्रति दी जानी हो तो कार्यालयाध्यक्ष उपयुक्त शुल्क नियत करेगा।
सभी दशाओं में नकल शुल्क पूर्व में वसूल किया जाना चाहिये और 'प्राप्तियाँ - 19 पुलिस प्रकीर्ण' शीर्ष के अधीन प्राप्ति के रूप में जमा किया जाना चाहिये। प्रतियाँ सम्बन्धित कार्यालय के साधारण कर्मचारियों द्वारा बिना किसी अतिरिक्त पारिश्रमिक के तैयार की जानी चाहिये। किन्तु यदि नितान्त आवश्यक हो तो कार्य के दबाव के समय इस प्रयोजन के लिये अस्थायी रूप से कोई नकलनवीस रखा जा सकता है।
प्रतियों के लिये सभी प्रार्थना-पत्रों पर, उन आदेशों की प्रतियों को छोड़कर जिन्हें सरकारी सेवक शासकीय आदेश पुस्तिका के पैरा 77 के अधीन निःशुल्क पाने के हकदार हैं, न्यायालय शुल्क अधिनियम, 1870 (1870 का अधिनियम 7) की, जैसा कि वह उत्तर प्रदेश में प्रवर्तन के लिये संशोधित है, अनुसूची 2 के अनुच्छेद 1 के अधीन विहित न्यायालय शुल्क देय होगा। उन आदेशों की प्रतियों की दशा को छोड़कर जिन्हें सरकारी सेवक निःशुल्क पाने के हकदार हैं, प्रतियाँ भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (1899 का अधिनियम 2) की, जैसा कि वह उत्तर प्रदेश में प्रवर्तन के लिये संशोधित है, अनुसूची 1-ख के अनुच्छेद 24 के अधीन विहित मूल्य के स्टाम्प पर दी जावेंगी, जो प्रार्थी द्वारा स्वयं प्रस्तुत किया जावेगा।
प्रतियों का मुद्रित कागज (कापी स्टाम्प) पर लिखा जाना आवश्यक नहीं है।
(1) 1,500 शब्दों से अनधिक प्रति के लिये एक रुपया।
(2) 1,500 शब्दों से अधिक प्रत्येक 300 शब्दों के लिये 1 रुपया (12 पैसे) अतिरिक्त।
(3) शुल्क की गणना करते समय प्रत्येक कथन, रिपोर्ट आदि को पृथक् दस्तावेज माना जाना चाहिये और उसके लिये पृथक् शुल्क लिया जाना चाहिये।
(4) हिन्दी या उर्दू के दस्तावेजों की नकल की दरें वही होंगी जो अंग्रेजी के दस्तावेजों की हैं।
(5) यदि किसी पुस्तक, रजिस्टर, मानचित्र या नक्शे की प्रति दी जानी हो तो कार्यालयाध्यक्ष उपयुक्त शुल्क नियत करेगा।
सभी दशाओं में नकल शुल्क पूर्व में वसूल किया जाना चाहिये और 'प्राप्तियाँ - 19 पुलिस प्रकीर्ण' शीर्ष के अधीन प्राप्ति के रूप में जमा किया जाना चाहिये। प्रतियाँ सम्बन्धित कार्यालय के साधारण कर्मचारियों द्वारा बिना किसी अतिरिक्त पारिश्रमिक के तैयार की जानी चाहिये। किन्तु यदि नितान्त आवश्यक हो तो कार्य के दबाव के समय इस प्रयोजन के लिये अस्थायी रूप से कोई नकलनवीस रखा जा सकता है।
प्रतियों के लिये सभी प्रार्थना-पत्रों पर, उन आदेशों की प्रतियों को छोड़कर जिन्हें सरकारी सेवक शासकीय आदेश पुस्तिका के पैरा 77 के अधीन निःशुल्क पाने के हकदार हैं, न्यायालय शुल्क अधिनियम, 1870 (1870 का अधिनियम 7) की, जैसा कि वह उत्तर प्रदेश में प्रवर्तन के लिये संशोधित है, अनुसूची 2 के अनुच्छेद 1 के अधीन विहित न्यायालय शुल्क देय होगा। उन आदेशों की प्रतियों की दशा को छोड़कर जिन्हें सरकारी सेवक निःशुल्क पाने के हकदार हैं, प्रतियाँ भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (1899 का अधिनियम 2) की, जैसा कि वह उत्तर प्रदेश में प्रवर्तन के लिये संशोधित है, अनुसूची 1-ख के अनुच्छेद 24 के अधीन विहित मूल्य के स्टाम्प पर दी जावेंगी, जो प्रार्थी द्वारा स्वयं प्रस्तुत किया जावेगा।
प्रतियों का मुद्रित कागज (कापी स्टाम्प) पर लिखा जाना आवश्यक नहीं है।
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