UP Police Regs 231अध्याय 19 · Fugitive Offenders
धारा 231 · पैरा-222. भगोड़े अपराधी का नाम मफरुर रजिस्टर में अभिलिखित करना
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
हर उस मामले में जिसमें अभियुक्त फरार हो गया हो, अत्यन्त छोटे और नगण्य प्रकृति के मामलों या जहाँ विशेष परिस्थितियाँ विद्यमान हों, जो प्रक्रिया को अनावश्यक या अवांछनीय बना देती हों, के सिवाय, न्यायालय से दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 299 के अधीन साक्ष्य अभिलिखित करने को कहा जाना चाहिये। यद्यपि पुलिस को उनके विरुद्ध धारा 83 या 299 के अधीन कार्यवाही की प्रतीक्षा किये बिना फरार व्यक्तियों के नाम पंजीकृत कर लेना चाहिये। सभी मामले में विशेष कारणों से धारा 299 के अधीन साक्ष्य अभिलिखित न की गई हो, उप-महानिरीक्षक के सामने उसके निरीक्षण के समय प्रस्तुत किये जावें।
भावी विचारण के समय धारा 299 के अधीन अभिलिखित साक्ष्य ग्रहण किये जाने के योग्य हो सकें, इसके लिए वह सिद्ध किया जावे और अभिलेख पर लाया जावे कि अपराधी फरार हो गया है और उसके गिरफ्तार किया जाने की कोई तात्कालिक आशा नहीं है। धारा 299 के उपबन्धों की सावधानीपूर्वक अध्ययन किया जावे।
टीप-कोई व्यक्ति कोई अपराध करने के पश्चात फरार हो जाता है तो उस व्यक्ति की सम्पत्ति की कुर्की का प्रावधान दण्ड प्रक्रिया संहिता 83 में दिया गया यह धारा निम्नवत है-
83. फरार व्यक्ति की सम्पत्ति की कुर्की (1) धारा 82 के अधीन उद्घोषणा जारी करने वाला न्यायालय उद्घोपित व्यक्ति की किसी जंगम या स्थावर या दोनों प्रकार की सम्पत्ति की कुर्की का आदेश घोषणा के जारी किये जाने के पश्चात् लेखबद्ध किये जाने वाले कारणों के आधार पर किसी समय भी दे सकेगा।
परन्तु घोषणा जारी करते समय न्यायालय का शपथ-पत्र द्वारा या अन्यथा यह समाधान हो जाता है कि वह व्यक्ति जिसके सम्बन्ध में उद्घोषणा निकाली जानी है-
(क) अपनी समस्त सम्पत्ति या उसके किसी भाग का व्ययन करने वाला है, अथवा
(ख) अपनी समस्त सम्पत्ति या उसके किसी भाग को उस न्यायालय की स्थानीय अधिकारिता से हटाने वाला है तो वह उद्घोषणा जारी करने के साथ ही साथ कुर्की का आदेश दे सकेगा।
(2) ऐसा आदेश उस जिले में की, जिसमें वह दिया गया हो, उस व्यक्ति की किसी भी सम्पत्ति की कुर्की प्राधिकृत करेगा और जिले के बाहर की उस व्यक्ति की किसी सम्पत्ति की कुर्की तब प्राधिकृत करेगा जह वह उस जिला मजिस्ट्रेट द्वारा, जिसके जिले में ऐसी सम्पत्ति स्थित हो, पृष्ठांकित कर दिया जाये।
(3) यदि कुर्की की जाने का आदेश दी गई सम्पत्ति, ऋण या अन्य जंगम सम्पत्ति हो, तो इस धारा के अधीन कुर्की-
(क) अभिग्रहण द्वारा, अथवा
(ख) रिसीवर की नियुक्ति द्वारा, अथवा
(ग) उद्घोषित व्यक्ति को या उसके निमित्त किसी को भी उस सम्पत्ति का किराया देने या उस सम्पत्ति का परिदान करने का प्रतिषेध करने वाले लिखित आदेश द्वारा, अथवा
(घ) इन रीतियों में से सब या किन्हीं दो से, ऐसा न्यायालय ठीक समझे, की जाएगी।
(4) यदि कुर्क की जाने का आदेश दी गई सम्पत्ति स्थावर हो तो इस धारा के अधीन कुर्की राज्य सरकार को राजस्व देने वाली भूमि की दशा में उस जिले के कलेक्टर के माध्यम से, जिसमें भूमि स्थित हो, और अन्य सब दशाओं में-
(क) कब्जा लेने द्वारा अथवा
(ख) रिसीवर की नियुक्ति द्वारा अथवा
(ग) उद्घोषित व्यक्ति को या उसके निमित्त किसी को भी सम्पत्ति का किराया देने यो उस सम्पत्ति का परिदान करने का प्रतिषेध करने वाले लिखित आदेश द्वारा, अथवा
(घ) इन रीतियों में से सब या किन्हीं दो से, जैसा न्यायालय ठीक समझे की जाएगी।
(5) यदि कुर्क की जाने का आदेश दी गई सम्पत्ति जीवधन हो या विनिश्चय प्रकृति की हो तो, यदि न्यायालय समीचीन समझे, वह उसके तुरन्त विक्रय का आदेश दे सकेगा और ऐसी दशा में विक्रय के आगम न्यायालय के आदेश के अधीन रहेंगे।
(6) इस धारा के अधीन नियुक्त रिसीवर की शक्तियाँ, कर्तव्य और दायित्व वे ही होंगे जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन नियुक्त रिसीवर के होते हैं।
1-तत्सम्बन्धी पूर्व विधि-दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की यह धारा पूर्व संहिता की धारा 88 (1) चरण 1 से 6 के अनुरूप है।
फरार व्यक्ति की सम्पत्ति की कुर्की के आदेश के सम्बन्ध में इस धारा में नियम अभिकथित किया गया है। इस धारा की उपधारा (1) के अन्तर्गत उद्घोषणा जारी करने वाले न्यायालय को उद्घोषित व्यक्ति की चल व अचल सम्पत्ति की कुर्की के बारे में आदेश पारित करने हेतु प्राधिकृत किया गया है।
इस धारा की उपधारा (2) और (3) में सम्पत्ति को कुर्क किये जाने की रीति बतलायी गयी है।
इस धारा की उपधारा (2) में यह बतलाया गया है कि कुर्की का आदेश जारी करने वाला मजिस्ट्रेट यदि जिले की स्थानीय सीमा से बाहर स्थित सम्पत्ति की कुर्की के बारे में आदेश जारी करता है तो उस दशा में उस जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जिसकी स्थानीय सीमा के भीतर ऐसी सम्पत्ति स्थिति है, उस मजिस्ट्रेट के द्वारा पृष्ठांकित किया जाना अनिवार्य होगा।
इस धारा की उपधारा (3) के अन्तर्गत उस दशा में कुर्की की प्रक्रिया अभिकथित की गई है जबकि कुर्क कराये जाने के लिए आदेशित सम्पत्ति ऋण या अन्य जंगम सम्पत्ति हो।
इस उपधारा के अनुसार ऐसी दशा में कुर्की -
(क) अभिग्रहण द्वारा की जायेगी, अथवा
(ख) रिसीवर की नियुक्ति द्वारा की जायेगी, अथवा
(ग) उद्घोषित व्यक्ति को या उसके निमित्त किसी को भी उस सम्पत्ति का परिदान करने का प्रतिषेध कराने वाले लिखित आदेश द्वारा की जायेगी।
भावी विचारण के समय धारा 299 के अधीन अभिलिखित साक्ष्य ग्रहण किये जाने के योग्य हो सकें, इसके लिए वह सिद्ध किया जावे और अभिलेख पर लाया जावे कि अपराधी फरार हो गया है और उसके गिरफ्तार किया जाने की कोई तात्कालिक आशा नहीं है। धारा 299 के उपबन्धों की सावधानीपूर्वक अध्ययन किया जावे।
टीप-कोई व्यक्ति कोई अपराध करने के पश्चात फरार हो जाता है तो उस व्यक्ति की सम्पत्ति की कुर्की का प्रावधान दण्ड प्रक्रिया संहिता 83 में दिया गया यह धारा निम्नवत है-
83. फरार व्यक्ति की सम्पत्ति की कुर्की (1) धारा 82 के अधीन उद्घोषणा जारी करने वाला न्यायालय उद्घोपित व्यक्ति की किसी जंगम या स्थावर या दोनों प्रकार की सम्पत्ति की कुर्की का आदेश घोषणा के जारी किये जाने के पश्चात् लेखबद्ध किये जाने वाले कारणों के आधार पर किसी समय भी दे सकेगा।
परन्तु घोषणा जारी करते समय न्यायालय का शपथ-पत्र द्वारा या अन्यथा यह समाधान हो जाता है कि वह व्यक्ति जिसके सम्बन्ध में उद्घोषणा निकाली जानी है-
(क) अपनी समस्त सम्पत्ति या उसके किसी भाग का व्ययन करने वाला है, अथवा
(ख) अपनी समस्त सम्पत्ति या उसके किसी भाग को उस न्यायालय की स्थानीय अधिकारिता से हटाने वाला है तो वह उद्घोषणा जारी करने के साथ ही साथ कुर्की का आदेश दे सकेगा।
(2) ऐसा आदेश उस जिले में की, जिसमें वह दिया गया हो, उस व्यक्ति की किसी भी सम्पत्ति की कुर्की प्राधिकृत करेगा और जिले के बाहर की उस व्यक्ति की किसी सम्पत्ति की कुर्की तब प्राधिकृत करेगा जह वह उस जिला मजिस्ट्रेट द्वारा, जिसके जिले में ऐसी सम्पत्ति स्थित हो, पृष्ठांकित कर दिया जाये।
(3) यदि कुर्की की जाने का आदेश दी गई सम्पत्ति, ऋण या अन्य जंगम सम्पत्ति हो, तो इस धारा के अधीन कुर्की-
(क) अभिग्रहण द्वारा, अथवा
(ख) रिसीवर की नियुक्ति द्वारा, अथवा
(ग) उद्घोषित व्यक्ति को या उसके निमित्त किसी को भी उस सम्पत्ति का किराया देने या उस सम्पत्ति का परिदान करने का प्रतिषेध करने वाले लिखित आदेश द्वारा, अथवा
(घ) इन रीतियों में से सब या किन्हीं दो से, ऐसा न्यायालय ठीक समझे, की जाएगी।
(4) यदि कुर्क की जाने का आदेश दी गई सम्पत्ति स्थावर हो तो इस धारा के अधीन कुर्की राज्य सरकार को राजस्व देने वाली भूमि की दशा में उस जिले के कलेक्टर के माध्यम से, जिसमें भूमि स्थित हो, और अन्य सब दशाओं में-
(क) कब्जा लेने द्वारा अथवा
(ख) रिसीवर की नियुक्ति द्वारा अथवा
(ग) उद्घोषित व्यक्ति को या उसके निमित्त किसी को भी सम्पत्ति का किराया देने यो उस सम्पत्ति का परिदान करने का प्रतिषेध करने वाले लिखित आदेश द्वारा, अथवा
(घ) इन रीतियों में से सब या किन्हीं दो से, जैसा न्यायालय ठीक समझे की जाएगी।
(5) यदि कुर्क की जाने का आदेश दी गई सम्पत्ति जीवधन हो या विनिश्चय प्रकृति की हो तो, यदि न्यायालय समीचीन समझे, वह उसके तुरन्त विक्रय का आदेश दे सकेगा और ऐसी दशा में विक्रय के आगम न्यायालय के आदेश के अधीन रहेंगे।
(6) इस धारा के अधीन नियुक्त रिसीवर की शक्तियाँ, कर्तव्य और दायित्व वे ही होंगे जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन नियुक्त रिसीवर के होते हैं।
1-तत्सम्बन्धी पूर्व विधि-दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की यह धारा पूर्व संहिता की धारा 88 (1) चरण 1 से 6 के अनुरूप है।
फरार व्यक्ति की सम्पत्ति की कुर्की के आदेश के सम्बन्ध में इस धारा में नियम अभिकथित किया गया है। इस धारा की उपधारा (1) के अन्तर्गत उद्घोषणा जारी करने वाले न्यायालय को उद्घोषित व्यक्ति की चल व अचल सम्पत्ति की कुर्की के बारे में आदेश पारित करने हेतु प्राधिकृत किया गया है।
इस धारा की उपधारा (2) और (3) में सम्पत्ति को कुर्क किये जाने की रीति बतलायी गयी है।
इस धारा की उपधारा (2) में यह बतलाया गया है कि कुर्की का आदेश जारी करने वाला मजिस्ट्रेट यदि जिले की स्थानीय सीमा से बाहर स्थित सम्पत्ति की कुर्की के बारे में आदेश जारी करता है तो उस दशा में उस जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जिसकी स्थानीय सीमा के भीतर ऐसी सम्पत्ति स्थिति है, उस मजिस्ट्रेट के द्वारा पृष्ठांकित किया जाना अनिवार्य होगा।
इस धारा की उपधारा (3) के अन्तर्गत उस दशा में कुर्की की प्रक्रिया अभिकथित की गई है जबकि कुर्क कराये जाने के लिए आदेशित सम्पत्ति ऋण या अन्य जंगम सम्पत्ति हो।
इस उपधारा के अनुसार ऐसी दशा में कुर्की -
(क) अभिग्रहण द्वारा की जायेगी, अथवा
(ख) रिसीवर की नियुक्ति द्वारा की जायेगी, अथवा
(ग) उद्घोषित व्यक्ति को या उसके निमित्त किसी को भी उस सम्पत्ति का परिदान करने का प्रतिषेध कराने वाले लिखित आदेश द्वारा की जायेगी।
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