UP Police Regs 439अध्याय 30 · Promotions
धारा 439 · पैरा-428. राजपत्रित पदों में पदोन्नति
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
दल के राजपत्रित पदों पर पदोन्नतियाँ परिषद् सहित गर्वनर द्वारा की जाती हैं। महानिरीक्षक विशेषतया सरकार द्वारा चुना गया अधिकारी होता है। उप-महानिरीक्षक पद पद पदोन्नतियां अधीक्षक के पद के अधिकारियों में से चयन द्वारा की जाती है। शेष से सम्बन्धित उपबन्धों, जो नीचे पाये जायेंगे, के अध्याधीन रहते हुये सहायक अधीक्षक की अधीक्षक के पद पर पदोन्नति वरिष्ठता द्वारा की जाती है, परन्तु यह कि कोई अधिकारी उक्त पंक्ति पर पदोन्नत नहीं किया जावेगा, जब तक कि उसकी सेवा अनुमोदित न हो चुकी हो और जब तक कि वह कनिष्ठ अधिकारियों की परीक्षा में उत्तीर्ण और प्रारूप क्रमांक 528 (आठ) में प्रमाण-पत्र प्राप्त न कर चुका हो। सहायक अधीक्षक और अधीक्षक नियतकालिक वेतन वृद्धि सेवा के पहले से 26 वर्ष तक तत्समय के मान के अनुसार, सहायक अधीक्षक कनिष्ठ और अधीक्षक वरिष्ठ मान में रहते हुए, प्राप्त करते हैं। कनिष्ठ मान में रहने वाले अधिकारी जब वरिष्ठ मान में कार्य कर रहे हों, वही वेतन प्राप्त करेंगे, जो उस काल की सेवा वाला वरिष्ठ मान का अधिकारी प्राप्त करता है, परन्तु यह कि जिसके सेवा काल के लिए कोई वरिष्ठ मान विहित न किया गया हो, वरिष्ठ मान में विहित न्यूनतम दर पर वेतन निकालेगा।
कनिष्ठ में नवीं साल की सेवा के पश्चात् और वरिष्ठ मान में सत्रहवें वर्ष की सेवा के पश्चात् दक्षता अवरोध प्रवर्त होते हैं। कोई अधिकारी जो वरिष्ठ मान के लिये उपयुक्त नहीं समझा जावे, उसकी नियुक्ति की प्रथम अवरोध पार करने की अनुमति नहीं दी जावेगी और कोई अधिकारी, जो प्रथम श्रेणी के जिले का प्रभार ग्रहण करने वाले के लिए उपयुक्त न समझा जावे, उसे द्वितीय अवरोध पार करने की अनुमति नहीं दी जावेगी। उच्चतर वेतन पर पुलिस अधीक्षकों के पदों पर सीमित संख्या में नियुक्तियां चयन द्वारा की जाती हैं।
भारतीय पुलिस अधिकारियों की ज्येष्ठता, जो सारवान रूप से वरिष्ठ पदों पर नियुक्त किये जाते हैं, भारत सरकार के गृह विभाग के अधिसूचना क्रमांक एक 41/26-पुलिस, दिनांक 13 फरवरी, 1930 द्वारा जारी किये गये इन्डियन पुलिस (रेगुलेशन आफ सीनियर्टी रूल्स, 1930 द्वारा शासित होती है।
टिप्पणी
दक्षता-अपरोध पार करने विषयक आदेश पारित करने के लिए उसके देय तिथि/समय पर ही विचार करना चाहिये। यदि अधिकारी द्वारा इस विषय में आदेश समय से पारित नहीं किया जाता और बाद में कर्मचारी पर अनुशासनिक कार्यवाही प्रारम्भ कर दी जाती है तो यह उचित नहीं है क्योंकि दक्षता अवरोध के बारे में निर्णय लेने के लिए वह लम्बित अनुशासिक कार्यवाही की दृष्टि में रखकर विचार करने में सक्षम नहीं है। यदि कर्मचारी के दक्षता अवरोध पार करने के समय अनुशासनिक कार्यवाही पूर्ण सम्भावित है तो उस स्थिति में सक्षम अवरोध विषयक आदेश पारित करने को टाल सकेगा।
कर्मचारी के प्रोन्नति के लिये इसलिये विचार नहीं किया गया कि उसके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही लम्बित रही। इसके बाद में दोषयुक्त होने के कारण उसके पदोन्नति पर उस तिथि से विचार किया जाना होगा जब से उसके कनिष्ठों ने प्रोन्नति पाया था।
यदि कर्मचारी को अविधिक रूप से प्रोन्नति से बन्चित किया गया है तो वह देय तिथि से ही समस्त देय लाभ के साथ प्रोन्नति पाने का अधिकारी है।
कनिष्ठ में नवीं साल की सेवा के पश्चात् और वरिष्ठ मान में सत्रहवें वर्ष की सेवा के पश्चात् दक्षता अवरोध प्रवर्त होते हैं। कोई अधिकारी जो वरिष्ठ मान के लिये उपयुक्त नहीं समझा जावे, उसकी नियुक्ति की प्रथम अवरोध पार करने की अनुमति नहीं दी जावेगी और कोई अधिकारी, जो प्रथम श्रेणी के जिले का प्रभार ग्रहण करने वाले के लिए उपयुक्त न समझा जावे, उसे द्वितीय अवरोध पार करने की अनुमति नहीं दी जावेगी। उच्चतर वेतन पर पुलिस अधीक्षकों के पदों पर सीमित संख्या में नियुक्तियां चयन द्वारा की जाती हैं।
भारतीय पुलिस अधिकारियों की ज्येष्ठता, जो सारवान रूप से वरिष्ठ पदों पर नियुक्त किये जाते हैं, भारत सरकार के गृह विभाग के अधिसूचना क्रमांक एक 41/26-पुलिस, दिनांक 13 फरवरी, 1930 द्वारा जारी किये गये इन्डियन पुलिस (रेगुलेशन आफ सीनियर्टी रूल्स, 1930 द्वारा शासित होती है।
टिप्पणी
दक्षता-अपरोध पार करने विषयक आदेश पारित करने के लिए उसके देय तिथि/समय पर ही विचार करना चाहिये। यदि अधिकारी द्वारा इस विषय में आदेश समय से पारित नहीं किया जाता और बाद में कर्मचारी पर अनुशासनिक कार्यवाही प्रारम्भ कर दी जाती है तो यह उचित नहीं है क्योंकि दक्षता अवरोध के बारे में निर्णय लेने के लिए वह लम्बित अनुशासिक कार्यवाही की दृष्टि में रखकर विचार करने में सक्षम नहीं है। यदि कर्मचारी के दक्षता अवरोध पार करने के समय अनुशासनिक कार्यवाही पूर्ण सम्भावित है तो उस स्थिति में सक्षम अवरोध विषयक आदेश पारित करने को टाल सकेगा।
कर्मचारी के प्रोन्नति के लिये इसलिये विचार नहीं किया गया कि उसके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही लम्बित रही। इसके बाद में दोषयुक्त होने के कारण उसके पदोन्नति पर उस तिथि से विचार किया जाना होगा जब से उसके कनिष्ठों ने प्रोन्नति पाया था।
यदि कर्मचारी को अविधिक रूप से प्रोन्नति से बन्चित किया गया है तो वह देय तिथि से ही समस्त देय लाभ के साथ प्रोन्नति पाने का अधिकारी है।
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