UP Police Regs 129अध्याय 11 · Research
धारा 129 · पैरा-124. संज्ञेय अथवा असंज्ञेय अपराध के परिवाद पर मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेने पर की जाने वाली कार्यवाही
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
जब किसी संज्ञेय या असंज्ञेय अपराध के परिवाद को, जिसका मजिस्ट्रेट ने दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 190 (क) के अधीन संज्ञान ले लिया हो उसके द्वारा धारा 202 के अधीन पुलिस को अन्वेषण के लिए भेजी जावे, पुलिस के अधीक्षक या सबडिवीजन के भारसाधक, किसी राजपत्रित अधिकारी को थाने में रिपोर्ट को अग्रेषित करने के पूर्व अपना यह समाधान कर लेना चाहिये कि धारा 200 और 200 के उपबन्धों का पूर्ण रूप से पालन कर लिया गया है। कोई ऐसा मामला, जिसमें मजिस्ट्रेट ने धारा 200 के अधीन परिवादी का शपथ पर कथन न ले लिया हो या धारा 202 के अधीन पुलिस से अन्वेषण कराने के कारणों को अभिलिखित न किया गया हो, पुलिस को अन्वेषण के लिए विधितः नहीं भेजा जा सकता। ऐसे सभी मामले और वे सभी मामले जिनमें अभिलिखित कारण प्रथम दृष्ट्या अवैध हो पुलिस अधीक्षक द्वारा, इससे पूर्व की आगे कोई कार्यवाही की जावे, जिला मजिस्ट्रेट के ध्यान में लाया जाना चाहिये। उन मामलों में, जिनमें पुलिस द्वारा अन्वेषण किये जाने की आज्ञा धारा 202 के अधीन किसी परिवाद के मामले में उचित रूप से दी गई हो, अन्वेषण उतनी तत्परता से किया जाना चाहिए जिसकी परिस्थितियाँ अनुज्ञा देती हों, किन्तु जहाँ तक ऐसे अन्वेषणों के समय को निर्धारित किए जाने का प्रश्न है, दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 147 (1) के अधीन रजिस्ट्रीकृत और अन्वेषणाधीन मामलों को उन मामलों की अपेक्षा वरीयता दी जावेगी, जो परिवाद और मजिस्ट्रेट द्वारा पुलिस को भेजे जावें।
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
