UP Police Regs 16अध्याय 1 · Senior Officers
धारा 16 · पैरा-13. पुलिस अधीक्षक का कर्तव्य
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
जब अधीक्षक मुख्यालय पर हो, तो सभी कामकाज के दिनों में, उन्हें कार्यालय में हाजिर रहना चाहिये। साधारणतया उन्हें सभी शासकीय कार्य कार्यालय में करना चाहिये, ऐसे गोपनीय विषयों के सिवाय जिन्हें वह अपने निवास स्थान पर निपटाना उचित समझे।
अपने निवास स्थान पर उसे जन साधारण की पहुँच के लिये उपलब्ध रहना चाहिये, जो उससे भेंट करने की इच्छा करे। उसे चाहिये कि वह उन्हें अपने से परिदर्शन करने और अपने विचारों को स्वतन्त्रतापूर्वक संसूचित करने को प्रोत्साहित करे। बल के बाहर जितने अधिक सूचना के साधन उसके पास होंगे, वह पुलिस अधिकारी के रूप में उतना ही अधिक दक्ष होगा।
जिले में निवास कर रहे पुलिस के पेन्शनरों से भी उसे सम्पर्क रखना चाहिये।
पुलिस अधीक्षक को यह देखना चाहिये कि उसके जिले के भीतर सभी थानों का वार्षिक रूप से एक राजपत्रित अधिकारी द्वारा/राजपत्रित अधिकारियों द्वारा थाने के निरीक्षण के लिये ज्ञापन में निर्धारित रीति से पूर्ण निरीक्षण कर लिया जाता है और उसे प्रत्येक थाने का वर्ष में कम से कम एक बार स्वयं परिदर्शन करना चाहिये।
भ्रमण को शरद ऋतु में ही सीमित करना आवश्यक नहीं है, जहाँ निरीक्षण गृह उपलब्ध हों, दूरस्थ थानों का ग्रीष्म ऋतु और वर्षा में भी परिदर्शन किया जावे।
ज्ञापन के अनुसार मुख्यालय पर थाने का पूरा निरीक्षण, यदि सम्भव हो तो वर्ष में एक बार, किन्तु किसी दशा में तीन वर्ष का एक बार पुलिस अधीक्षक को स्वयं ही करना चाहिये।
पुलिस अधीक्षक को अपनी रिजर्व लाइन का वार्षिक निरीक्षण जुलाई और शरद ऋतु के बीच उप महानिरीक्षक द्वारा होने वाले निरीक्षण से पहले करना चाहिये। इस निरीक्षण को करने में, उसे प्रारूप क्रमांक 327 उप महानिरीक्षक द्वारा जिला निरीक्षण रिपोर्ट के प्रारूप के शीर्ष 'पाँच' के शीर्षकों से मार्ग-दर्शन लेना चाहिये। लाइन के निरीक्षण की रिपोर्ट अंग्रेजी की कार्यालय निरीक्षण पुस्तक में प्रविष्ट की जानी जाहिए।
आबकारी विषयों पर होने वाले वार्षिक सम्मेलन में पुलिस अधीक्षक की दृष्टिगत हाजिरी आवश्यक है।
अन्य प्रदेशों या देशी राज्यों के सीमान्त के जिलों के अधीक्षकों की, पड़ोसी जिलों के अधिकारियों से वर्ष के कम से कम एक बार और यदि सभ्मव हो सके तो बहुधा, भेंट करने की व्यवस्था करना चाहिये। अधीक्षक द्वारा ऐसी भेंट का अभिलेख तैयार किया जावे जिस रेन्ज के उप महानिरीक्षक को सूचनार्थ भेज देना चाहिये।
अपने निवास स्थान पर उसे जन साधारण की पहुँच के लिये उपलब्ध रहना चाहिये, जो उससे भेंट करने की इच्छा करे। उसे चाहिये कि वह उन्हें अपने से परिदर्शन करने और अपने विचारों को स्वतन्त्रतापूर्वक संसूचित करने को प्रोत्साहित करे। बल के बाहर जितने अधिक सूचना के साधन उसके पास होंगे, वह पुलिस अधिकारी के रूप में उतना ही अधिक दक्ष होगा।
जिले में निवास कर रहे पुलिस के पेन्शनरों से भी उसे सम्पर्क रखना चाहिये।
पुलिस अधीक्षक को यह देखना चाहिये कि उसके जिले के भीतर सभी थानों का वार्षिक रूप से एक राजपत्रित अधिकारी द्वारा/राजपत्रित अधिकारियों द्वारा थाने के निरीक्षण के लिये ज्ञापन में निर्धारित रीति से पूर्ण निरीक्षण कर लिया जाता है और उसे प्रत्येक थाने का वर्ष में कम से कम एक बार स्वयं परिदर्शन करना चाहिये।
भ्रमण को शरद ऋतु में ही सीमित करना आवश्यक नहीं है, जहाँ निरीक्षण गृह उपलब्ध हों, दूरस्थ थानों का ग्रीष्म ऋतु और वर्षा में भी परिदर्शन किया जावे।
ज्ञापन के अनुसार मुख्यालय पर थाने का पूरा निरीक्षण, यदि सम्भव हो तो वर्ष में एक बार, किन्तु किसी दशा में तीन वर्ष का एक बार पुलिस अधीक्षक को स्वयं ही करना चाहिये।
पुलिस अधीक्षक को अपनी रिजर्व लाइन का वार्षिक निरीक्षण जुलाई और शरद ऋतु के बीच उप महानिरीक्षक द्वारा होने वाले निरीक्षण से पहले करना चाहिये। इस निरीक्षण को करने में, उसे प्रारूप क्रमांक 327 उप महानिरीक्षक द्वारा जिला निरीक्षण रिपोर्ट के प्रारूप के शीर्ष 'पाँच' के शीर्षकों से मार्ग-दर्शन लेना चाहिये। लाइन के निरीक्षण की रिपोर्ट अंग्रेजी की कार्यालय निरीक्षण पुस्तक में प्रविष्ट की जानी जाहिए।
आबकारी विषयों पर होने वाले वार्षिक सम्मेलन में पुलिस अधीक्षक की दृष्टिगत हाजिरी आवश्यक है।
अन्य प्रदेशों या देशी राज्यों के सीमान्त के जिलों के अधीक्षकों की, पड़ोसी जिलों के अधिकारियों से वर्ष के कम से कम एक बार और यदि सभ्मव हो सके तो बहुधा, भेंट करने की व्यवस्था करना चाहिये। अधीक्षक द्वारा ऐसी भेंट का अभिलेख तैयार किया जावे जिस रेन्ज के उप महानिरीक्षक को सूचनार्थ भेज देना चाहिये।
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