UP Police Regs 43अध्याय 4 · Circle Inspector
धारा 43 · पैरा-40. अन्वेषण का पर्यवेक्षण तथा अपराधों की रोकथाम
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
सर्किल इंस्पेक्टर (क्षेत्राधिकारी निरीक्षक) के प्रमुख कर्तव्य ये हैं कि वह अपराध के अन्वेषण और निवारण का पर्यवेक्षण करे, पुलिस क्षेत्र के भीतर निवारक और अन्वेषणात्मक कार्य में समन्वय स्थापित करे, इस प्रयोजन के लिये अन्य सर्किल इंस्पेक्टरों से सहयोग करे तथा यह सुनिश्चित करे कि पुलिस, विशेषकर उसके अधिकार क्षेत्र के अधीन थानों के भारसाधक अधिकारी, अपने कर्तव्यों का ईमानदारी और दक्षता से पालन करते हैं। उसकी शक्ति अनावश्यक लिपिकीय कार्य अथवा थानों के निरीक्षण में नष्ट नहीं होनी चाहिये।
वह अपने क्षेत्र के लिये एक अपराध रजिस्टर रखेगा और सभी संज्ञेय अपराधों की प्रथम इत्तिला रिपोर्टें सीधे थानों से प्राप्त करेगा। किन्तु रजिस्टर में उसकी टिप्पणियाँ पूर्व-नियोजित और गम्भीर अपराधों के अन्वेषण तथा निवारण के लिये की गई कार्यवाहियों की सूची होनी चाहिये, न कि तुच्छ अपराधों का ढेर। वह अपने क्षेत्र के प्रत्येक थाने का वर्ष में एक बार निरीक्षण करेगा और ऐसा करते समय क्षेत्रीय निरीक्षकों द्वारा थानों के निरीक्षण सम्बन्धी ज्ञापन में दिये गये अनुदेशों का पालन करेगा तथा मुख्यतः अपराध के निवारण और अन्वेषण सम्बन्धी विषयों पर ध्यान देगा। उसे सभी महत्वपूर्ण मामलों में घटनास्थल पर जाना चाहिये और अन्वेषण का मार्गदर्शन करना चाहिये। अधीक्षक द्वारा उसे स्वयं अन्वेषण करने के लिये नियुक्त किया जा सकता है। जब कभी वह किसी अन्वेषण के समय उपस्थित हो, तब उसे न केवल अपनी उपस्थिति के समय की केस डायरी पर हस्ताक्षर करने चाहिये, वरन् मामले के आगे संचालन के लिये अन्वेषण अधिकारी को जो अनुदेश देना वह आवश्यक समझे, उन्हें विस्तार से अभिलिखित भी करना चाहिये।
सर्किल इंस्पेक्टर को अपने सर्किल का मासिक सर्वेक्षण तैयार करना चाहिये जिसमें उन उपायों का विवरण हो जो उसने अपने सर्किल में अपराधों के निवारण और अन्वेषण के लिये किये हैं तथा यह भी कि कोई और कार्यवाही अपेक्षित है या नहीं। यह सर्वेक्षण थाने के भारसाधक अधिकारी द्वारा तैयार किया जावेगा और सर्किल इंस्पेक्टर के मार्फत पुलिस अधीक्षक को भेजा जावेगा।
पर्यवेक्षण (निगरानी) सम्बन्धी उसके कर्तव्य, जिन पर उसे विशेष ध्यान देना चाहिये, पैरा 251 में विस्तार से दिये गये हैं। उसे लोगों से भली-भाँति परिचित होना चाहिये और सर्किल के प्रत्येक भाग का स्थानीय ज्ञान रखना चाहिये।
वह अपने क्षेत्र के लिये एक अपराध रजिस्टर रखेगा और सभी संज्ञेय अपराधों की प्रथम इत्तिला रिपोर्टें सीधे थानों से प्राप्त करेगा। किन्तु रजिस्टर में उसकी टिप्पणियाँ पूर्व-नियोजित और गम्भीर अपराधों के अन्वेषण तथा निवारण के लिये की गई कार्यवाहियों की सूची होनी चाहिये, न कि तुच्छ अपराधों का ढेर। वह अपने क्षेत्र के प्रत्येक थाने का वर्ष में एक बार निरीक्षण करेगा और ऐसा करते समय क्षेत्रीय निरीक्षकों द्वारा थानों के निरीक्षण सम्बन्धी ज्ञापन में दिये गये अनुदेशों का पालन करेगा तथा मुख्यतः अपराध के निवारण और अन्वेषण सम्बन्धी विषयों पर ध्यान देगा। उसे सभी महत्वपूर्ण मामलों में घटनास्थल पर जाना चाहिये और अन्वेषण का मार्गदर्शन करना चाहिये। अधीक्षक द्वारा उसे स्वयं अन्वेषण करने के लिये नियुक्त किया जा सकता है। जब कभी वह किसी अन्वेषण के समय उपस्थित हो, तब उसे न केवल अपनी उपस्थिति के समय की केस डायरी पर हस्ताक्षर करने चाहिये, वरन् मामले के आगे संचालन के लिये अन्वेषण अधिकारी को जो अनुदेश देना वह आवश्यक समझे, उन्हें विस्तार से अभिलिखित भी करना चाहिये।
सर्किल इंस्पेक्टर को अपने सर्किल का मासिक सर्वेक्षण तैयार करना चाहिये जिसमें उन उपायों का विवरण हो जो उसने अपने सर्किल में अपराधों के निवारण और अन्वेषण के लिये किये हैं तथा यह भी कि कोई और कार्यवाही अपेक्षित है या नहीं। यह सर्वेक्षण थाने के भारसाधक अधिकारी द्वारा तैयार किया जावेगा और सर्किल इंस्पेक्टर के मार्फत पुलिस अधीक्षक को भेजा जावेगा।
पर्यवेक्षण (निगरानी) सम्बन्धी उसके कर्तव्य, जिन पर उसे विशेष ध्यान देना चाहिये, पैरा 251 में विस्तार से दिये गये हैं। उसे लोगों से भली-भाँति परिचित होना चाहिये और सर्किल के प्रत्येक भाग का स्थानीय ज्ञान रखना चाहिये।
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