UP Police Regs 495अध्याय 32 · Departmental Punishment of Police Officers and Their Criminal Prosecution
धारा 495 · पैरा-479. अधिकारियों की दण्ड देने की शक्तियाँ
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(क) गवर्नर के पास सभी अधिकारियों के निर्देश में दण्ड देने की शक्ति सुरक्षित है।
(ख) महानिरीक्षक, निरीक्षकों और उससे निम्नतर पंक्ति के सभी अधिकारियों को दण्डित कर सकता है।
(ग) उप-महानिरीक्षक उसके अधीन अस्थाई या स्थाई रूप से होने वाले निरीक्षक की या उससे निम्नतर पंक्ति के सभी अधिकारियों को दण्डित कर सकता है।
(घ) पुलिस अधीक्षक अपने अधीनस्थ अस्थाई या स्थाई निरीक्षकों और उप-निरीक्षकों को पदच्युत करने या निकाल देने के सिवाय दण्ड दे सकता है। ऐसे किसी मामले में, जिसमें बल की किसी शाखा के किसी निरीक्षक या उप-निरीक्षक को पदच्युत करना या निकाल देना वह प्रस्तावित करे, पुलिस उप-महानिरीक्षक को नीचे दिये गए पैरा 490 के उप पैरा 8 अन्तर्विष्ट अनुदेशों के अनुसार अग्रेषित कर दिया जाना चाहिये।
(ङ) अपने अधीनस्थ अस्थाई और स्थाई सभी प्रधान कान्सटेबिलों को अधीक्षक दण्डित कर सकता है।
(च) पैरा 491 के उपबन्धों के अधीन रहते हुये (क) सभी ऐसे स्थाई सहायक पुलिस अधीक्षक जिन्होंने 4 वर्ष की सेवा पूरी कर ली जो और सभी ऐसे स्थाई पुलिस उप-अधीक्षक जिन्होंने प्रथम दक्षता अवरोध वेतन मान में जो उन पर लागू हैं, पर कर लिया हो, और (2) पुलिस उप-महानिरीक्षक द्वारा, जहाँ तक कि उसकी रेन्ज से सम्बन्धित हैं, विशेष रूप से प्राधिकृत किये गये अन्य सभी सहायक पुलिस अधीक्षक और उप पुलिस अधीक्षक, पुलिस निरीक्षक के दण्ड से सम्बन्धित शक्तियों और मूल नियम 24 और 25 के अधीन शक्तियों के अतिरिक्त जैसी कि वे इस पैरा के उप पैरा (घ) और (ङ) में वर्णित हैं, पुलिस अधीक्षक की सभी शक्तियों का प्रयोग कर सकेंगे।
(छ) रिजर्व निरीक्षक लाइन में पदस्थ किये गये किसी कान्सटेबिल को अधिकतम तीन दिनों के लिये व्यायाम और थका देने वाले कर्त्तव्यों का दण्ड दे सकता है, परन्तु उसके आदेश रिजर्व लाइन्स के कार्यालय से चौबीस घन्टे के भीतर पुलिस अधीक्षक को सम्पुष्टि के लिये प्रेषित कर दिये जायेंगे।
टिप्पणी
(1) पुलिस अधीक्षक के अधिकार - पैरा 479 (सा०) हेड कान्सटेबिल को दण्डित करने को पुलिस अधीक्षक को अधिकृत करता है। उप पैरा (ई) पुलिस अधीक्षक को पुलिस का प्रमुख परिदर्शित करता है और पुलिस अधीक्षक (नगर) या पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) उस श्रेणी में नहीं आते। अधिकारों का प्रदान समकक्ष श्रेणी नहीं देता और अनुच्छेद 311 पदच्युति का दण्ड देने की अनुमति केवल प्रधान के समकक्ष या उनसे वरिष्ठ अधिकारी को देता है, पुलिस अधीक्षक (नगर) द्वारा प्रदत्त उक्त दण्ड अनुच्छेद 311 के उल्लंघन में है।
(2) जब अनुशासनिक अधिकारी निष्कर्ष से सहमत न हों- जब जाँच कर्त्ता अधिकारी ने केवल श्रेणी में पदावन्नत करने की सिफारिश की तो पुलिस अधीक्षक के असहमति और अधिकतम दण्ड देने पर, रामनाथ सिंह बनाम राज्य ने यह निर्णय दिया कि उन्हें उपाधीक्षक के सिफारिश के पूर्ण अवहेलना में दण्ड देना उनकी अधिकारिता में नहीं था, लेकिन यह मत विशेष अपील सं० 175/64 राज्य बनाम रामनाथ सिंह, निर्णीत दिनांक 23-10-64 में बदल दिया और यह माना कि पुलिस विनियम में उक्त निर्णय को न्यायोचित ठहराने के लिए कोई आधार नहीं है और यह निर्णय दिया कि जब पुलिस अधीक्षक ने अनुच्छेद 311 में कारण बताओ नोटिस देकर अवसर दिया तो कर्मचारी को पदच्युत करना उनके अधिकारिता में है। पदच्युति से यह प्रवाहित होता है कि सेवा से हटाना और राज्य के पुनर्सेवा में आने पर रोक होना। दण्ड के प्रकार में सेवा से हटाये जाने का स्पष्ट उल्लेख न करने से, पदच्युति इतना गम्भीर आदेश पारित करने के बाजय सेवा पृथक् किये जाने का आदेश पारित करने का अधिकार अधिकारी को विपथ नहीं करता
(3) पुलिस अधीक्षक एवं अन्य शाखाओं के अधिकारियों के अधिकार - विज्ञप्ति संख्या 2380/आठ-7-217/72, दिनांक 17-7-73 गृह (पु० १) से राज्यपाल ने जिला पुलिस अधीक्षक के पद के समकक्ष उन सभी पुलिस अधीक्षकों को बताया जो सी० बी० सी० आई० डी० मुख्यालय पर हैं और इनके अन्य शाखाओं में हैं जैसे अपराध शाखा, प्रशासनिक शाखा, अर्थ सूचना एवं अनुसंधान शाखा, वैज्ञानिक शाखा और विशेष अनुसंधान शाखा (को-आपरेटिव कक्ष) जिससे वे अपने आधिकारिक क्षेत्र में जिला पुलिस अधीक्षक के समस्त कर्त्तव्यों का पालन कर सकें। शा०आ०सं० 1795-7-273-72, दिनांक 4-7-74 से इसे और परिमार्जित किया। उ०प्र० सतर्कता अधिष्ठान के इंसपेक्टर की धारा 161, 165 या 165-ए, ८० वि० के अपराधों और धारा 5 पी०सी० एक्ट में बिना मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी से आदेश लिये विवेचना करने का अधिकार विज्ञप्ति सं० 1796/उन्तालीस-वी०जी०एल०-100/1965, दिनांक 16-9-65 द्वारा दिया गया है।
(4) पुलिस अधीक्षक के कर्त्तव्यों का पालन- राज्य सरकार ने शा०आ०सं० 1801/आठ-ई-1070/62, दिनांक 20-4-68 द्वारा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक नगर और ग्रामीण को जिला पुलिस अधीक्षक के समस्त कर्तव्य का पालन करने को अपने आधिकारिक क्षेत्र के लिए अधिकृत किया है मगर इससे वे कान्सटेबिल के नियुक्ति अधिकारी नहीं हुये ना ही उन्हें हटाने, पदच्युति करने या अवनत करने का अधिकार मिला। ए०आई०आर० 1970 सु०को० 122 में पुलिस अधीक्षक और जिला पुलिस अधीक्षक में कोई वास्तविक अन्तर नहीं माना है और राज्य बनाम लक्ष्मीनारायन में यह स्पष्ट किया कि "जिला पुलिस अधीक्षक" से यह अर्थ आता है कि पुलिस का प्रशासन उसमें निहित है मगर इसमें वे नहीं हैं जो जिला पुलिस अधीक्षक के कुछ या सभी कर्त्तव्यों का पालन करते हों। पुलिस अधीक्षक नगर द्वारा अपने में पुलिस अधीक्षक के पद का अधिकार ग्रहण करके हेड कान्सटेबिल को पदच्युत कर देने पर, इस आदेश को इसलिये रद्द माना गया कि उनकी पुलिस अधीक्षक की श्रेणी नहीं है। शासन ने इसे आदेश सं० 2720/आठ-7-89/79, दिनांक 26-9-79 में आगे स्पष्ट किया है। (सेवा विषयक अन्य समस्त आदेशों के लिये इसी प्रकाशन का "मैनुअल आफ गवर्नमेन्ट आईर्ड्स" देखें)।
(5) अधिकार और अधिकारिता- पुलिस विनियम का यह पैरा राज्यपाल के महा-निरीक्षक पुलिस के एवं अन्य अधिकारियों के द्वारा दण्ड दिये जाने के अधिकार के बारे में बताता है। धारा 7 पुलिस एक्ट द्वारा पुलिस महानिरीक्षक एवं अन्य अधिकारियों पर प्रदत्त अधिकार राज्य द्वारा हस्तांतरित न होकर, पृथक् कानूनी अधिकार हैं जो न राज्य के अधिकार को सीमित करता है न प्रतिस्थाई रूप में है।
पुलिस उप-महानिरीक्षक द्वारा पुलिस उपाधीक्षक को धारा 7 में जांच करने को दिया गया अधिकार उपाधीक्षक के उस परिक्षेत्र के बाहर स्थानांतरण हो जाने पर समाप्त हो जाता है।
जब किसी विभागीय कार्यवाही में पुलिस उपाधीक्षक के अधिकारिता को किसी अधीनस्थ अधिकारी के समक्ष आक्षेपित नहीं किया गया तो यह आक्षेप याचिका में नहीं उठाया जा सकता जब उनकी योग्यता और अधिकारिता को, अवसर होने के बाद भी चलती कार्यवाही के समय आक्षेपित नहीं किया गया तो इस आधार पर पदच्युति का आदेश याचिका में आक्षेपित न होगा
(ख) महानिरीक्षक, निरीक्षकों और उससे निम्नतर पंक्ति के सभी अधिकारियों को दण्डित कर सकता है।
(ग) उप-महानिरीक्षक उसके अधीन अस्थाई या स्थाई रूप से होने वाले निरीक्षक की या उससे निम्नतर पंक्ति के सभी अधिकारियों को दण्डित कर सकता है।
(घ) पुलिस अधीक्षक अपने अधीनस्थ अस्थाई या स्थाई निरीक्षकों और उप-निरीक्षकों को पदच्युत करने या निकाल देने के सिवाय दण्ड दे सकता है। ऐसे किसी मामले में, जिसमें बल की किसी शाखा के किसी निरीक्षक या उप-निरीक्षक को पदच्युत करना या निकाल देना वह प्रस्तावित करे, पुलिस उप-महानिरीक्षक को नीचे दिये गए पैरा 490 के उप पैरा 8 अन्तर्विष्ट अनुदेशों के अनुसार अग्रेषित कर दिया जाना चाहिये।
(ङ) अपने अधीनस्थ अस्थाई और स्थाई सभी प्रधान कान्सटेबिलों को अधीक्षक दण्डित कर सकता है।
(च) पैरा 491 के उपबन्धों के अधीन रहते हुये (क) सभी ऐसे स्थाई सहायक पुलिस अधीक्षक जिन्होंने 4 वर्ष की सेवा पूरी कर ली जो और सभी ऐसे स्थाई पुलिस उप-अधीक्षक जिन्होंने प्रथम दक्षता अवरोध वेतन मान में जो उन पर लागू हैं, पर कर लिया हो, और (2) पुलिस उप-महानिरीक्षक द्वारा, जहाँ तक कि उसकी रेन्ज से सम्बन्धित हैं, विशेष रूप से प्राधिकृत किये गये अन्य सभी सहायक पुलिस अधीक्षक और उप पुलिस अधीक्षक, पुलिस निरीक्षक के दण्ड से सम्बन्धित शक्तियों और मूल नियम 24 और 25 के अधीन शक्तियों के अतिरिक्त जैसी कि वे इस पैरा के उप पैरा (घ) और (ङ) में वर्णित हैं, पुलिस अधीक्षक की सभी शक्तियों का प्रयोग कर सकेंगे।
(छ) रिजर्व निरीक्षक लाइन में पदस्थ किये गये किसी कान्सटेबिल को अधिकतम तीन दिनों के लिये व्यायाम और थका देने वाले कर्त्तव्यों का दण्ड दे सकता है, परन्तु उसके आदेश रिजर्व लाइन्स के कार्यालय से चौबीस घन्टे के भीतर पुलिस अधीक्षक को सम्पुष्टि के लिये प्रेषित कर दिये जायेंगे।
टिप्पणी
(1) पुलिस अधीक्षक के अधिकार - पैरा 479 (सा०) हेड कान्सटेबिल को दण्डित करने को पुलिस अधीक्षक को अधिकृत करता है। उप पैरा (ई) पुलिस अधीक्षक को पुलिस का प्रमुख परिदर्शित करता है और पुलिस अधीक्षक (नगर) या पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) उस श्रेणी में नहीं आते। अधिकारों का प्रदान समकक्ष श्रेणी नहीं देता और अनुच्छेद 311 पदच्युति का दण्ड देने की अनुमति केवल प्रधान के समकक्ष या उनसे वरिष्ठ अधिकारी को देता है, पुलिस अधीक्षक (नगर) द्वारा प्रदत्त उक्त दण्ड अनुच्छेद 311 के उल्लंघन में है।
(2) जब अनुशासनिक अधिकारी निष्कर्ष से सहमत न हों- जब जाँच कर्त्ता अधिकारी ने केवल श्रेणी में पदावन्नत करने की सिफारिश की तो पुलिस अधीक्षक के असहमति और अधिकतम दण्ड देने पर, रामनाथ सिंह बनाम राज्य ने यह निर्णय दिया कि उन्हें उपाधीक्षक के सिफारिश के पूर्ण अवहेलना में दण्ड देना उनकी अधिकारिता में नहीं था, लेकिन यह मत विशेष अपील सं० 175/64 राज्य बनाम रामनाथ सिंह, निर्णीत दिनांक 23-10-64 में बदल दिया और यह माना कि पुलिस विनियम में उक्त निर्णय को न्यायोचित ठहराने के लिए कोई आधार नहीं है और यह निर्णय दिया कि जब पुलिस अधीक्षक ने अनुच्छेद 311 में कारण बताओ नोटिस देकर अवसर दिया तो कर्मचारी को पदच्युत करना उनके अधिकारिता में है। पदच्युति से यह प्रवाहित होता है कि सेवा से हटाना और राज्य के पुनर्सेवा में आने पर रोक होना। दण्ड के प्रकार में सेवा से हटाये जाने का स्पष्ट उल्लेख न करने से, पदच्युति इतना गम्भीर आदेश पारित करने के बाजय सेवा पृथक् किये जाने का आदेश पारित करने का अधिकार अधिकारी को विपथ नहीं करता
(3) पुलिस अधीक्षक एवं अन्य शाखाओं के अधिकारियों के अधिकार - विज्ञप्ति संख्या 2380/आठ-7-217/72, दिनांक 17-7-73 गृह (पु० १) से राज्यपाल ने जिला पुलिस अधीक्षक के पद के समकक्ष उन सभी पुलिस अधीक्षकों को बताया जो सी० बी० सी० आई० डी० मुख्यालय पर हैं और इनके अन्य शाखाओं में हैं जैसे अपराध शाखा, प्रशासनिक शाखा, अर्थ सूचना एवं अनुसंधान शाखा, वैज्ञानिक शाखा और विशेष अनुसंधान शाखा (को-आपरेटिव कक्ष) जिससे वे अपने आधिकारिक क्षेत्र में जिला पुलिस अधीक्षक के समस्त कर्त्तव्यों का पालन कर सकें। शा०आ०सं० 1795-7-273-72, दिनांक 4-7-74 से इसे और परिमार्जित किया। उ०प्र० सतर्कता अधिष्ठान के इंसपेक्टर की धारा 161, 165 या 165-ए, ८० वि० के अपराधों और धारा 5 पी०सी० एक्ट में बिना मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी से आदेश लिये विवेचना करने का अधिकार विज्ञप्ति सं० 1796/उन्तालीस-वी०जी०एल०-100/1965, दिनांक 16-9-65 द्वारा दिया गया है।
(4) पुलिस अधीक्षक के कर्त्तव्यों का पालन- राज्य सरकार ने शा०आ०सं० 1801/आठ-ई-1070/62, दिनांक 20-4-68 द्वारा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक नगर और ग्रामीण को जिला पुलिस अधीक्षक के समस्त कर्तव्य का पालन करने को अपने आधिकारिक क्षेत्र के लिए अधिकृत किया है मगर इससे वे कान्सटेबिल के नियुक्ति अधिकारी नहीं हुये ना ही उन्हें हटाने, पदच्युति करने या अवनत करने का अधिकार मिला। ए०आई०आर० 1970 सु०को० 122 में पुलिस अधीक्षक और जिला पुलिस अधीक्षक में कोई वास्तविक अन्तर नहीं माना है और राज्य बनाम लक्ष्मीनारायन में यह स्पष्ट किया कि "जिला पुलिस अधीक्षक" से यह अर्थ आता है कि पुलिस का प्रशासन उसमें निहित है मगर इसमें वे नहीं हैं जो जिला पुलिस अधीक्षक के कुछ या सभी कर्त्तव्यों का पालन करते हों। पुलिस अधीक्षक नगर द्वारा अपने में पुलिस अधीक्षक के पद का अधिकार ग्रहण करके हेड कान्सटेबिल को पदच्युत कर देने पर, इस आदेश को इसलिये रद्द माना गया कि उनकी पुलिस अधीक्षक की श्रेणी नहीं है। शासन ने इसे आदेश सं० 2720/आठ-7-89/79, दिनांक 26-9-79 में आगे स्पष्ट किया है। (सेवा विषयक अन्य समस्त आदेशों के लिये इसी प्रकाशन का "मैनुअल आफ गवर्नमेन्ट आईर्ड्स" देखें)।
(5) अधिकार और अधिकारिता- पुलिस विनियम का यह पैरा राज्यपाल के महा-निरीक्षक पुलिस के एवं अन्य अधिकारियों के द्वारा दण्ड दिये जाने के अधिकार के बारे में बताता है। धारा 7 पुलिस एक्ट द्वारा पुलिस महानिरीक्षक एवं अन्य अधिकारियों पर प्रदत्त अधिकार राज्य द्वारा हस्तांतरित न होकर, पृथक् कानूनी अधिकार हैं जो न राज्य के अधिकार को सीमित करता है न प्रतिस्थाई रूप में है।
पुलिस उप-महानिरीक्षक द्वारा पुलिस उपाधीक्षक को धारा 7 में जांच करने को दिया गया अधिकार उपाधीक्षक के उस परिक्षेत्र के बाहर स्थानांतरण हो जाने पर समाप्त हो जाता है।
जब किसी विभागीय कार्यवाही में पुलिस उपाधीक्षक के अधिकारिता को किसी अधीनस्थ अधिकारी के समक्ष आक्षेपित नहीं किया गया तो यह आक्षेप याचिका में नहीं उठाया जा सकता जब उनकी योग्यता और अधिकारिता को, अवसर होने के बाद भी चलती कार्यवाही के समय आक्षेपित नहीं किया गया तो इस आधार पर पदच्युति का आदेश याचिका में आक्षेपित न होगा
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
