MSCOS Act 90अध्याय X · Winding Up of Multi-state Co-operative Society
धारा 90 · परिसमापक की शक्तियाँ।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस संबंध में बनाए गए किसी भी नियम के अधीन रहते हुए, किसी बहु-राज्य सहकारी समिति की संपूर्ण परिसंपत्तियाँ, जिसके संबंध में परिसमापन का आदेश दिया गया है, धारा 89 के तहत नियुक्त परिसमापक में उस तिथि से निहित हो जाएँगी जिस तिथि से आदेश प्रभावी होता है और परिसमापक को ऐसी परिसंपत्तियों को बिक्री या अन्य माध्यम से प्राप्त करने का अधिकार होगा।
(2) ऐसे परिसमापक को केंद्रीय रजिस्ट्रार के नियंत्रण के अधीन रहते हुए भी शक्ति प्राप्त होगी--
(क) अपने पद के नाम से बहुराज्यीय सहकारी समिति की ओर से मुकदमे और अन्य कानूनी कार्यवाही शुरू करना और उनका बचाव करना;
(ख) समय-समय पर सदस्यों या पूर्व सदस्यों द्वारा या मृतक सदस्यों की संपत्तियों या नामित व्यक्तियों, उत्तराधिकारियों या कानूनी प्रतिनिधियों द्वारा या किसी भी अधिकारी या पूर्व अधिकारियों द्वारा बहु-राज्य सहकारी समिति की परिसंपत्तियों में किए जाने वाले या किए जाने वाले अंशदान (देय ऋण और परिसमापन की लागत सहित) का निर्धारण करना;
(ग) बहु-राज्यीय सहकारी समिति के विरुद्ध सभी दावों की जांच करना और इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, दावेदारों के बीच उत्पन्न होने वाले प्राथमिकता संबंधी प्रश्नों का निर्णय करना;
(घ) बहु-राज्यीय सहकारी समिति के विरुद्ध दावों का भुगतान करना, जिसमें समापन की तिथि तक का ब्याज भी शामिल है, उनकी संबंधित प्राथमिकताओं के अनुसार, यदि कोई हो, पूर्ण रूप से या आनुपातिक रूप से, जैसा कि समिति की संपत्ति अनुमति दे; और दावों के भुगतान के बाद यदि कोई अधिशेष बचता है, तो उसे ऐसे आदेश या समापन की तिथि से ब्याज के भुगतान में उसके द्वारा निर्धारित दर पर लगाया जाएगा, लेकिन किसी भी मामले में अनुबंध दर से अधिक नहीं होगा;
(ई) यह निर्धारित करना कि परिसमापन की लागत किन व्यक्तियों द्वारा और किस अनुपात में वहन की जाएगी;
(f) यह निर्धारित करना कि कोई व्यक्ति किसी मृत सदस्य का सदस्य, पूर्व सदस्य या नामांकित व्यक्ति है या नहीं;
(जी) बहुराज्यीय सहकारी समिति की परिसंपत्तियों के संग्रह और वितरण के संबंध में ऐसे निर्देश देना जो उसे उस समिति के मामलों को समाप्त करने के लिए आवश्यक प्रतीत हों;
(h) बहु-राज्यीय सहकारी समिति के व्यवसाय को उस हद तक जारी रखना, जहाँ तक कि उसके लाभकारी समापन के लिए आवश्यक हो;
(i) लेनदारों या लेनदार होने का दावा करने वाले व्यक्तियों या वर्तमान या भविष्य में कोई दावा रखने वाले या दावा करने का आरोप लगाने वाले व्यक्तियों के साथ कोई समझौता या व्यवस्था करना, जिससे बहु-राज्यीय सहकारी समिति उत्तरदायी हो सकती है;
(j) किसी ऐसे व्यक्ति के साथ कोई समझौता या व्यवस्था करना जिसके और बहुराज्यीय सहकारी समिति के बीच कोई विवाद हो और ऐसे किसी विवाद को निर्णय के लिए संदर्भित करना;
(k) बहुराज्यीय सहकारी समिति के सदस्यों से परामर्श करने के बाद, समिति के विरुद्ध दावों का भुगतान करने के बाद यदि कोई अधिशेष बचता है, तो उसका निपटान निर्धारित तरीके से करना;
(एल) बहुराज्यीय सहकारी समिति और अंशदायी या अन्य देनदार या बहुराज्यीय सहकारी समिति के प्रति देयता की आशंका रखने वाले व्यक्ति के बीच विद्यमान या विद्यमान माने जाने वाले सभी वर्तमान या भविष्य के दावों और देनदारियों, जिनसे ऋण उत्पन्न हो सकते हैं, और सभी दावों, निश्चित या आकस्मिक, जो विद्यमान हैं या विद्यमान माने जाते हैं, तथा समिति की परिसंपत्तियों या परिसमापन से किसी भी तरह से संबंधित या उसे प्रभावित करने वाले सभी प्रश्नों पर, ऐसी शर्तों पर समझौता करना, जैसा कि सहमति हो सकती है, और ऐसी किसी भी मांग, देयता, ऋण या दावे के निर्वहन के लिए कोई भी सुरक्षा लेना तथा उसके संबंध में पूर्ण निर्वहन देना।
(3) जब किसी बहु-राज्यीय सहकारी समिति के मामलों का समापन हो जाता है, तो परिसमापक केंद्रीय रजिस्ट्रार को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा तथा समिति के अभिलेखों को ऐसे स्थान पर जमा करेगा जैसा केंद्रीय रजिस्ट्रार निर्देशित करे।
(2) ऐसे परिसमापक को केंद्रीय रजिस्ट्रार के नियंत्रण के अधीन रहते हुए भी शक्ति प्राप्त होगी--
(क) अपने पद के नाम से बहुराज्यीय सहकारी समिति की ओर से मुकदमे और अन्य कानूनी कार्यवाही शुरू करना और उनका बचाव करना;
(ख) समय-समय पर सदस्यों या पूर्व सदस्यों द्वारा या मृतक सदस्यों की संपत्तियों या नामित व्यक्तियों, उत्तराधिकारियों या कानूनी प्रतिनिधियों द्वारा या किसी भी अधिकारी या पूर्व अधिकारियों द्वारा बहु-राज्य सहकारी समिति की परिसंपत्तियों में किए जाने वाले या किए जाने वाले अंशदान (देय ऋण और परिसमापन की लागत सहित) का निर्धारण करना;
(ग) बहु-राज्यीय सहकारी समिति के विरुद्ध सभी दावों की जांच करना और इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, दावेदारों के बीच उत्पन्न होने वाले प्राथमिकता संबंधी प्रश्नों का निर्णय करना;
(घ) बहु-राज्यीय सहकारी समिति के विरुद्ध दावों का भुगतान करना, जिसमें समापन की तिथि तक का ब्याज भी शामिल है, उनकी संबंधित प्राथमिकताओं के अनुसार, यदि कोई हो, पूर्ण रूप से या आनुपातिक रूप से, जैसा कि समिति की संपत्ति अनुमति दे; और दावों के भुगतान के बाद यदि कोई अधिशेष बचता है, तो उसे ऐसे आदेश या समापन की तिथि से ब्याज के भुगतान में उसके द्वारा निर्धारित दर पर लगाया जाएगा, लेकिन किसी भी मामले में अनुबंध दर से अधिक नहीं होगा;
(ई) यह निर्धारित करना कि परिसमापन की लागत किन व्यक्तियों द्वारा और किस अनुपात में वहन की जाएगी;
(f) यह निर्धारित करना कि कोई व्यक्ति किसी मृत सदस्य का सदस्य, पूर्व सदस्य या नामांकित व्यक्ति है या नहीं;
(जी) बहुराज्यीय सहकारी समिति की परिसंपत्तियों के संग्रह और वितरण के संबंध में ऐसे निर्देश देना जो उसे उस समिति के मामलों को समाप्त करने के लिए आवश्यक प्रतीत हों;
(h) बहु-राज्यीय सहकारी समिति के व्यवसाय को उस हद तक जारी रखना, जहाँ तक कि उसके लाभकारी समापन के लिए आवश्यक हो;
(i) लेनदारों या लेनदार होने का दावा करने वाले व्यक्तियों या वर्तमान या भविष्य में कोई दावा रखने वाले या दावा करने का आरोप लगाने वाले व्यक्तियों के साथ कोई समझौता या व्यवस्था करना, जिससे बहु-राज्यीय सहकारी समिति उत्तरदायी हो सकती है;
(j) किसी ऐसे व्यक्ति के साथ कोई समझौता या व्यवस्था करना जिसके और बहुराज्यीय सहकारी समिति के बीच कोई विवाद हो और ऐसे किसी विवाद को निर्णय के लिए संदर्भित करना;
(k) बहुराज्यीय सहकारी समिति के सदस्यों से परामर्श करने के बाद, समिति के विरुद्ध दावों का भुगतान करने के बाद यदि कोई अधिशेष बचता है, तो उसका निपटान निर्धारित तरीके से करना;
(एल) बहुराज्यीय सहकारी समिति और अंशदायी या अन्य देनदार या बहुराज्यीय सहकारी समिति के प्रति देयता की आशंका रखने वाले व्यक्ति के बीच विद्यमान या विद्यमान माने जाने वाले सभी वर्तमान या भविष्य के दावों और देनदारियों, जिनसे ऋण उत्पन्न हो सकते हैं, और सभी दावों, निश्चित या आकस्मिक, जो विद्यमान हैं या विद्यमान माने जाते हैं, तथा समिति की परिसंपत्तियों या परिसमापन से किसी भी तरह से संबंधित या उसे प्रभावित करने वाले सभी प्रश्नों पर, ऐसी शर्तों पर समझौता करना, जैसा कि सहमति हो सकती है, और ऐसी किसी भी मांग, देयता, ऋण या दावे के निर्वहन के लिए कोई भी सुरक्षा लेना तथा उसके संबंध में पूर्ण निर्वहन देना।
(3) जब किसी बहु-राज्यीय सहकारी समिति के मामलों का समापन हो जाता है, तो परिसमापक केंद्रीय रजिस्ट्रार को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा तथा समिति के अभिलेखों को ऐसे स्थान पर जमा करेगा जैसा केंद्रीय रजिस्ट्रार निर्देशित करे।
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