MSCOS Act 17अध्याय II · Central Registrar and Registration of Multi-state Co-operative Societies
धारा 17 · बहुराज्यीय सहकारी समितियों का विलय या परिसंपत्तियों एवं देनदारियों का हस्तांतरण, या उनका विभाजन।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) एक बहुराज्यीय सहकारी समिति, इस उद्देश्य से आयोजित समिति की आम बैठक में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा,--
(क) अपनी परिसंपत्तियों और देनदारियों को पूर्णतः या आंशिक रूप से किसी अन्य बहु-राज्यीय सहकारी समिति या सहकारी समिति को हस्तांतरित करना;
(ख) स्वयं को दो या दो से अधिक बहु-राज्यीय सहकारी समितियों में विभाजित करना;
(ग) स्वयं को दो या दो से अधिक सहकारी समितियों में विभाजित करना।
(2) कोई दो या दो से अधिक बहुराज्यीय सहकारी समितियाँ, ऐसी प्रत्येक समिति की आम बैठक में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा, आपस में विलय कर एक नई बहुराज्यीय सहकारी समिति का गठन कर सकती हैं।
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के तहत किसी बहु-राज्य सहकारी समिति के संकल्प में हस्तांतरण या विभाजन या समामेलन के सभी विवरण शामिल होंगे, जैसा भी मामला हो।
(4) जब कोई बहु-राज्यीय सहकारी समिति उप-धारा (1) या उप-धारा (2) के तहत कोई प्रस्ताव पारित करती है, तो वह सभी सदस्यों और लेनदारों को इसकी लिखित सूचना देगी, और उपनियमों या अनुबंध में इसके विपरीत कुछ भी होने के बावजूद, किसी भी सदस्य या लेनदार को सूचना की तामील की तारीख से एक महीने की अवधि के दौरान, जैसा भी मामला हो, अपना हिस्सा, जमा या ऋण निकालने का विकल्प होगा।
(5) कोई भी सदस्य या लेनदार जो उपधारा (4) में निर्दिष्ट अवधि के भीतर अपने विकल्प का प्रयोग नहीं करता है, उसे संकल्प में निहित प्रस्तावों पर सहमति दी गई मानी जाएगी।
(6) (क) इस धारा के अंतर्गत किसी बहु-राज्यीय सहकारी समिति द्वारा पारित संकल्प तब तक प्रभावी नहीं होगा जब तक कि उसके सभी सदस्यों और लेनदारों की सहमति प्राप्त न हो जाए।
(ख) बहु-राज्य सहकारी समिति उपधारा (4) में निर्दिष्ट अवधि के भीतर विकल्प का प्रयोग करने वाले सदस्यों और लेनदारों के सभी दावों को पूरी तरह से पूरा करने या अन्यथा संतुष्ट करने की व्यवस्था करेगी।
(7) उपधारा (1) के तहत पारित संकल्प के अनुसार विभाजन द्वारा गठित नई समितियों के पंजीकरण के लिए या उपधारा (2) के तहत पारित संकल्प के अनुसार विलय द्वारा गठित नई समिति के पंजीकरण के लिए आवेदन प्राप्त होने पर, केंद्रीय रजिस्ट्रार, इस बात से संतुष्ट होने पर कि संकल्प उपधारा (6) के तहत प्रभावी हो गया है, जब तक कि वह लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों से ऐसा करने से इनकार करना उचित न समझे, नई समिति या समितियों, जैसा भी मामला हो, और उनके उपनियमों का पंजीकरण करेगा।
(8) उपधारा (7) के तहत आदेश जारी होने पर, धारा 21 के प्रावधान, जहां तक संभव हो, इस प्रकार विभाजित बहु-राज्य सहकारी समिति या इस प्रकार विलयित बहु-राज्य सहकारी समितियों पर लागू होंगे।
(9) जहां इस धारा के तहत किसी बहु-राज्य सहकारी समिति द्वारा पारित संकल्प में किसी परिसंपत्ति एवं देनदारी का हस्तांतरण शामिल है, तो संकल्प, किसी अन्य कानून में निहित किसी भी बात के बावजूद, परिसंपत्ति एवं देनदारी को बिना किसी और आश्वासन के हस्तांतरित करने के लिए पर्याप्त हस्तांतरण होगा।
(क) अपनी परिसंपत्तियों और देनदारियों को पूर्णतः या आंशिक रूप से किसी अन्य बहु-राज्यीय सहकारी समिति या सहकारी समिति को हस्तांतरित करना;
(ख) स्वयं को दो या दो से अधिक बहु-राज्यीय सहकारी समितियों में विभाजित करना;
(ग) स्वयं को दो या दो से अधिक सहकारी समितियों में विभाजित करना।
(2) कोई दो या दो से अधिक बहुराज्यीय सहकारी समितियाँ, ऐसी प्रत्येक समिति की आम बैठक में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा, आपस में विलय कर एक नई बहुराज्यीय सहकारी समिति का गठन कर सकती हैं।
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के तहत किसी बहु-राज्य सहकारी समिति के संकल्प में हस्तांतरण या विभाजन या समामेलन के सभी विवरण शामिल होंगे, जैसा भी मामला हो।
(4) जब कोई बहु-राज्यीय सहकारी समिति उप-धारा (1) या उप-धारा (2) के तहत कोई प्रस्ताव पारित करती है, तो वह सभी सदस्यों और लेनदारों को इसकी लिखित सूचना देगी, और उपनियमों या अनुबंध में इसके विपरीत कुछ भी होने के बावजूद, किसी भी सदस्य या लेनदार को सूचना की तामील की तारीख से एक महीने की अवधि के दौरान, जैसा भी मामला हो, अपना हिस्सा, जमा या ऋण निकालने का विकल्प होगा।
(5) कोई भी सदस्य या लेनदार जो उपधारा (4) में निर्दिष्ट अवधि के भीतर अपने विकल्प का प्रयोग नहीं करता है, उसे संकल्प में निहित प्रस्तावों पर सहमति दी गई मानी जाएगी।
(6) (क) इस धारा के अंतर्गत किसी बहु-राज्यीय सहकारी समिति द्वारा पारित संकल्प तब तक प्रभावी नहीं होगा जब तक कि उसके सभी सदस्यों और लेनदारों की सहमति प्राप्त न हो जाए।
(ख) बहु-राज्य सहकारी समिति उपधारा (4) में निर्दिष्ट अवधि के भीतर विकल्प का प्रयोग करने वाले सदस्यों और लेनदारों के सभी दावों को पूरी तरह से पूरा करने या अन्यथा संतुष्ट करने की व्यवस्था करेगी।
(7) उपधारा (1) के तहत पारित संकल्प के अनुसार विभाजन द्वारा गठित नई समितियों के पंजीकरण के लिए या उपधारा (2) के तहत पारित संकल्प के अनुसार विलय द्वारा गठित नई समिति के पंजीकरण के लिए आवेदन प्राप्त होने पर, केंद्रीय रजिस्ट्रार, इस बात से संतुष्ट होने पर कि संकल्प उपधारा (6) के तहत प्रभावी हो गया है, जब तक कि वह लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों से ऐसा करने से इनकार करना उचित न समझे, नई समिति या समितियों, जैसा भी मामला हो, और उनके उपनियमों का पंजीकरण करेगा।
(8) उपधारा (7) के तहत आदेश जारी होने पर, धारा 21 के प्रावधान, जहां तक संभव हो, इस प्रकार विभाजित बहु-राज्य सहकारी समिति या इस प्रकार विलयित बहु-राज्य सहकारी समितियों पर लागू होंगे।
(9) जहां इस धारा के तहत किसी बहु-राज्य सहकारी समिति द्वारा पारित संकल्प में किसी परिसंपत्ति एवं देनदारी का हस्तांतरण शामिल है, तो संकल्प, किसी अन्य कानून में निहित किसी भी बात के बावजूद, परिसंपत्ति एवं देनदारी को बिना किसी और आश्वासन के हस्तांतरित करने के लिए पर्याप्त हस्तांतरण होगा।
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