MSCOS Act 73अध्याय VIII · Audit, Enquiry, Inspection and Surcharge
धारा 73 · लेखा परीक्षकों की शक्तियां और कर्तव्य।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) किसी बहुराज्यीय सहकारी समिति के प्रत्येक लेखा परीक्षक को बहुराज्यीय सहकारी समिति की पुस्तकों, खातों और वाउचरों तक हर समय पहुँच का अधिकार होगा, चाहे वे बहुराज्यीय सहकारी समिति के मुख्यालय में रखे गए हों या कहीं और, और लेखा परीक्षक को बहुराज्यीय सहकारी समिति के अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों से ऐसी जानकारी और स्पष्टीकरण मांगने का अधिकार होगा जो लेखा परीक्षक अपने लेखा परीक्षक के रूप में कर्तव्यों के निर्वाह के लिए आवश्यक समझे।
(2) उपधारा (1) के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, लेखा परीक्षक जाँच करेगा,--
(क) क्या बहुराज्यीय सहकारी समिति द्वारा सुरक्षा के आधार पर दिए गए ऋण और अग्रिम उचित रूप से सुरक्षित हैं और क्या वे शर्तें जिन पर वे दिए गए हैं, बहुराज्यीय सहकारी समिति या उसके सदस्यों के हितों के लिए प्रतिकूल नहीं हैं;
(ख) क्या बहुराज्यीय सहकारी समिति के वे लेन-देन, जो मात्र बही-खातों में दर्ज किए गए हैं, बहुराज्यीय सहकारी समिति के हितों के लिए हानिकारक नहीं हैं?
(ग) क्या व्यक्तिगत व्यय राजस्व खाते में प्रभारित किए गए हैं; और
(घ) यदि बहुराज्यीय सहकारी समिति की पुस्तकों और कागजात में यह उल्लेख हो कि नकद के बदले कोई शेयर आवंटित किए गए हैं, तो क्या वास्तव में ऐसे आवंटन के संबंध में नकद प्राप्त हुआ है, और यदि वास्तव में कोई नकद प्राप्त नहीं हुआ है, तो क्या खाता बही और बैलेंस शीट में बताई गई स्थिति सही, नियमित और भ्रामक नहीं है।
(3) लेखा परीक्षक अपने द्वारा जांचे गए खातों और प्रत्येक बैलेंस शीट और लाभ-हानि खाते तथा बैलेंस शीट या लाभ-हानि खाते के साथ संलग्न या संलग्न किए जाने वाले प्रत्येक अन्य दस्तावेज पर बहुराज्यीय सहकारी समिति के सदस्यों को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा, जो उसके कार्यकाल के दौरान बहुराज्यीय सहकारी समिति की आम बैठक में प्रस्तुत किए जाते हैं, और रिपोर्ट में यह बताया जाएगा कि क्या, उसकी राय में और उसकी सर्वोत्तम जानकारी के अनुसार तथा उसे दिए गए स्पष्टीकरणों के अनुसार, उक्त खाते इस अधिनियम द्वारा अपेक्षित जानकारी को अपेक्षित तरीके से प्रदान करते हैं तथा सही और निष्पक्ष विवरण प्रस्तुत करते हैं,--
(क) बैलेंस शीट के मामले में, बहु-राज्य सहकारी समिति के वित्तीय वर्ष के अंत में उसके मामलों की स्थिति; और
(ख) लाभ और हानि खाते के मामले में, उसके वित्तीय वर्ष के लाभ या हानि का विवरण।
(4) लेखा परीक्षकों की रिपोर्ट में यह भी कहा जाएगा--
(क) क्या उसने वे सभी सूचनाएँ और स्पष्टीकरण प्राप्त कर लिए हैं जो उसकी सर्वोत्तम जानकारी और विश्वास के अनुसार उसके लेखापरीक्षा के प्रयोजनों के लिए आवश्यक थे;
(ख) क्या उनकी राय में, बहुराज्यीय सहकारी समिति द्वारा उचित लेखा-पुस्तकों का रखरखाव किया गया है, जैसा कि उन पुस्तकों की उनकी जांच से प्रतीत होता है, और क्या बहुराज्यीय सहकारी समिति की उन शाखाओं या कार्यालयों से उचित विवरण प्राप्त हुए हैं जिनका उन्होंने दौरा नहीं किया है;
(ग) क्या किसी शाखा कार्यालय के खातों पर रिपोर्ट, जिसका लेखापरीक्षा बहु-राज्यीय सहकारी समिति के लेखापरीक्षक के अलावा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा की गई है, उसे भेजी गई है और लेखापरीक्षक रिपोर्ट तैयार करने में उसने उससे कैसे निपटा है;
(घ) क्या रिपोर्ट में उल्लिखित बहु-राज्यीय सहकारी समिति की बैलेंस शीट और लाभ-हानि खाता लेखा-पुस्तकों और विवरणों के अनुरूप हैं।
(5) जहाँ उपधारा (3) के खंड (क) और (ख) में या उपधारा (4) के खंड (क) , (ख) , (ग) और (घ) में निर्दिष्ट किसी भी मामले का उत्तर नकारात्मक या किसी शर्त के साथ दिया जाता है, तो लेखा परीक्षक की रिपोर्ट में उत्तर का कारण बताया जाएगा।
(2) उपधारा (1) के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, लेखा परीक्षक जाँच करेगा,--
(क) क्या बहुराज्यीय सहकारी समिति द्वारा सुरक्षा के आधार पर दिए गए ऋण और अग्रिम उचित रूप से सुरक्षित हैं और क्या वे शर्तें जिन पर वे दिए गए हैं, बहुराज्यीय सहकारी समिति या उसके सदस्यों के हितों के लिए प्रतिकूल नहीं हैं;
(ख) क्या बहुराज्यीय सहकारी समिति के वे लेन-देन, जो मात्र बही-खातों में दर्ज किए गए हैं, बहुराज्यीय सहकारी समिति के हितों के लिए हानिकारक नहीं हैं?
(ग) क्या व्यक्तिगत व्यय राजस्व खाते में प्रभारित किए गए हैं; और
(घ) यदि बहुराज्यीय सहकारी समिति की पुस्तकों और कागजात में यह उल्लेख हो कि नकद के बदले कोई शेयर आवंटित किए गए हैं, तो क्या वास्तव में ऐसे आवंटन के संबंध में नकद प्राप्त हुआ है, और यदि वास्तव में कोई नकद प्राप्त नहीं हुआ है, तो क्या खाता बही और बैलेंस शीट में बताई गई स्थिति सही, नियमित और भ्रामक नहीं है।
(3) लेखा परीक्षक अपने द्वारा जांचे गए खातों और प्रत्येक बैलेंस शीट और लाभ-हानि खाते तथा बैलेंस शीट या लाभ-हानि खाते के साथ संलग्न या संलग्न किए जाने वाले प्रत्येक अन्य दस्तावेज पर बहुराज्यीय सहकारी समिति के सदस्यों को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा, जो उसके कार्यकाल के दौरान बहुराज्यीय सहकारी समिति की आम बैठक में प्रस्तुत किए जाते हैं, और रिपोर्ट में यह बताया जाएगा कि क्या, उसकी राय में और उसकी सर्वोत्तम जानकारी के अनुसार तथा उसे दिए गए स्पष्टीकरणों के अनुसार, उक्त खाते इस अधिनियम द्वारा अपेक्षित जानकारी को अपेक्षित तरीके से प्रदान करते हैं तथा सही और निष्पक्ष विवरण प्रस्तुत करते हैं,--
(क) बैलेंस शीट के मामले में, बहु-राज्य सहकारी समिति के वित्तीय वर्ष के अंत में उसके मामलों की स्थिति; और
(ख) लाभ और हानि खाते के मामले में, उसके वित्तीय वर्ष के लाभ या हानि का विवरण।
(4) लेखा परीक्षकों की रिपोर्ट में यह भी कहा जाएगा--
(क) क्या उसने वे सभी सूचनाएँ और स्पष्टीकरण प्राप्त कर लिए हैं जो उसकी सर्वोत्तम जानकारी और विश्वास के अनुसार उसके लेखापरीक्षा के प्रयोजनों के लिए आवश्यक थे;
(ख) क्या उनकी राय में, बहुराज्यीय सहकारी समिति द्वारा उचित लेखा-पुस्तकों का रखरखाव किया गया है, जैसा कि उन पुस्तकों की उनकी जांच से प्रतीत होता है, और क्या बहुराज्यीय सहकारी समिति की उन शाखाओं या कार्यालयों से उचित विवरण प्राप्त हुए हैं जिनका उन्होंने दौरा नहीं किया है;
(ग) क्या किसी शाखा कार्यालय के खातों पर रिपोर्ट, जिसका लेखापरीक्षा बहु-राज्यीय सहकारी समिति के लेखापरीक्षक के अलावा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा की गई है, उसे भेजी गई है और लेखापरीक्षक रिपोर्ट तैयार करने में उसने उससे कैसे निपटा है;
(घ) क्या रिपोर्ट में उल्लिखित बहु-राज्यीय सहकारी समिति की बैलेंस शीट और लाभ-हानि खाता लेखा-पुस्तकों और विवरणों के अनुरूप हैं।
(5) जहाँ उपधारा (3) के खंड (क) और (ख) में या उपधारा (4) के खंड (क) , (ख) , (ग) और (घ) में निर्दिष्ट किसी भी मामले का उत्तर नकारात्मक या किसी शर्त के साथ दिया जाता है, तो लेखा परीक्षक की रिपोर्ट में उत्तर का कारण बताया जाएगा।
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