MSCOS Act 77अध्याय VIII · Audit, Enquiry, Inspection and Surcharge
धारा 77 · कुछ मामलों में विशेष लेखापरीक्षा का निर्देश देने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जहाँ केंद्र सरकार की राय हो--
(क) किसी बहुराज्यीय सहकारी समिति के मामलों का प्रबंधन स्वयं सहायता, पारस्परिक सहायता और सहकारी सिद्धांतों या विवेकपूर्ण व्यावसायिक प्रथाओं के अनुसार नहीं किया जा रहा है; या सुदृढ़ व्यावसायिक सिद्धांतों के अनुसार नहीं किया जा रहा है; या
(ख) कि किसी बहु-राज्यीय सहकारी समिति का प्रबंधन इस प्रकार किया जा रहा है जिससे उस व्यापार, उद्योग या व्यवसाय के हितों को गंभीर चोट या क्षति पहुँचने की संभावना है जिससे वह संबंधित है; या
(ग) किसी बहु-राज्यीय सहकारी समिति की वित्तीय स्थिति ऐसी हो कि उसकी दिवालियापन की स्थिति खतरे में पड़ जाए।
केंद्र सरकार किसी भी समय आदेश द्वारा यह निर्देश दे सकती है कि बहुराज्यीय सहकारी समितियों के खातों का विशेष लेखापरीक्षा ऐसे समय या अवधियों के लिए आयोजित की जाए, जैसा कि आदेश में निर्दिष्ट किया जा सकता है, और उसी या किसी भिन्न आदेश द्वारा चार्टर्ड अकाउंटेंट्स अधिनियम, 1949 (38 ऑफ 1949) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ख) में परिभाषित चार्टर्ड अकाउंटेंट को या स्वयं बहुराज्यीय सहकारी समितियों के लेखापरीक्षक को विशेष लेखापरीक्षा आयोजित करने के लिए नियुक्त कर सकती है।
बशर्ते कि केंद्र सरकार किसी बहुराज्यीय सहकारी समिति के खातों की विशेष लेखापरीक्षा का आदेश नहीं देगी, यदि वह सरकार या राज्य सरकार, स्वयं या दोनों मिलकर, ऐसी बहुराज्यीय सहकारी समिति की चुकता शेयर पूंजी या शेयरों का इक्यावन प्रतिशत से कम हिस्सा रखती हो।
(2) उपधारा (1) के अधीन उपर्युक्त विशेष लेखापरीक्षा करने के लिए नियुक्त चार्टर्ड लेखाकार या बहु-राज्य सहकारी समिति के लेखापरीक्षक को इस धारा में आगे विशेष लेखापरीक्षक कहा जाएगा।
(3) विशेष लेखापरीक्षक को विशेष लेखापरीक्षा के संबंध में वही शक्तियां और कर्तव्य प्राप्त होंगे जो धारा 73 के अधीन किसी बहु-राज्य सहकारी समिति के लेखापरीक्षक को प्राप्त होते हैं:
बशर्ते कि विशेष लेखा परीक्षक बहु-राज्यीय सहकारी समिति के सदस्यों को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बजाय, उसे केंद्र सरकार को प्रस्तुत करेगा।
(4) विशेष लेखा परीक्षक की रिपोर्ट में, जहाँ तक संभव हो, धारा 73 के अंतर्गत लेखा परीक्षक की रिपोर्ट में शामिल किए जाने वाले सभी मामले शामिल होंगे और यदि केंद्र सरकार ऐसा निर्देश दे, तो उसमें किसी अन्य मामले पर भी विवरण शामिल होगा जो उस सरकार द्वारा उसे संदर्भित किया जा सकता है।
(5) केंद्र सरकार आदेश द्वारा आदेश में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति को विशेष लेखा परीक्षक को उसमें निर्दिष्ट समय के भीतर ऐसी जानकारी या अतिरिक्त जानकारी प्रस्तुत करने का निर्देश दे सकती है, जो विशेष लेखा परीक्षक को विशेष लेखापरीक्षा के संबंध में आवश्यक हो।
(6) विशेष लेखा परीक्षक की रिपोर्ट प्राप्त होने पर, केंद्र सरकार इस अधिनियम या उस समय लागू किसी अन्य कानून के प्रावधानों के अनुसार रिपोर्ट पर ऐसी कार्रवाई कर सकती है जिसे वह आवश्यक समझे।
बशर्ते कि यदि केंद्र सरकार रिपोर्ट प्राप्त होने की तिथि से चार महीने के भीतर उस पर कोई कार्रवाई नहीं करती है, तो सरकार बहुराज्यीय सहकारी समिति को रिपोर्ट की एक प्रति या उससे संबंधित अंश, उस पर अपनी टिप्पणियों सहित भेजेगी और बहुराज्यीय सहकारी समिति से यह अपेक्षा करेगी कि वह उस प्रति या अंशों को सदस्यों में वितरित करे या अगली आम बैठक में बहुराज्यीय सहकारी समिति के समक्ष ऐसी प्रति या अंशों को पढ़वाए।
(7) इस धारा के अंतर्गत किसी विशेष लेखापरीक्षा के व्यय और उससे संबंधित व्यय (विशेष लेखापरीक्षक का पारिश्रमिक सहित) केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किए जाएंगे, जो निर्धारण अंतिम होगा और बहुराज्य सहकारी समिति द्वारा भुगतान किया जाएगा, और ऐसे भुगतान में चूक होने पर, यह राशि बहुराज्य सहकारी समिति से भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूल की जाएगी।
(क) किसी बहुराज्यीय सहकारी समिति के मामलों का प्रबंधन स्वयं सहायता, पारस्परिक सहायता और सहकारी सिद्धांतों या विवेकपूर्ण व्यावसायिक प्रथाओं के अनुसार नहीं किया जा रहा है; या सुदृढ़ व्यावसायिक सिद्धांतों के अनुसार नहीं किया जा रहा है; या
(ख) कि किसी बहु-राज्यीय सहकारी समिति का प्रबंधन इस प्रकार किया जा रहा है जिससे उस व्यापार, उद्योग या व्यवसाय के हितों को गंभीर चोट या क्षति पहुँचने की संभावना है जिससे वह संबंधित है; या
(ग) किसी बहु-राज्यीय सहकारी समिति की वित्तीय स्थिति ऐसी हो कि उसकी दिवालियापन की स्थिति खतरे में पड़ जाए।
केंद्र सरकार किसी भी समय आदेश द्वारा यह निर्देश दे सकती है कि बहुराज्यीय सहकारी समितियों के खातों का विशेष लेखापरीक्षा ऐसे समय या अवधियों के लिए आयोजित की जाए, जैसा कि आदेश में निर्दिष्ट किया जा सकता है, और उसी या किसी भिन्न आदेश द्वारा चार्टर्ड अकाउंटेंट्स अधिनियम, 1949 (38 ऑफ 1949) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ख) में परिभाषित चार्टर्ड अकाउंटेंट को या स्वयं बहुराज्यीय सहकारी समितियों के लेखापरीक्षक को विशेष लेखापरीक्षा आयोजित करने के लिए नियुक्त कर सकती है।
बशर्ते कि केंद्र सरकार किसी बहुराज्यीय सहकारी समिति के खातों की विशेष लेखापरीक्षा का आदेश नहीं देगी, यदि वह सरकार या राज्य सरकार, स्वयं या दोनों मिलकर, ऐसी बहुराज्यीय सहकारी समिति की चुकता शेयर पूंजी या शेयरों का इक्यावन प्रतिशत से कम हिस्सा रखती हो।
(2) उपधारा (1) के अधीन उपर्युक्त विशेष लेखापरीक्षा करने के लिए नियुक्त चार्टर्ड लेखाकार या बहु-राज्य सहकारी समिति के लेखापरीक्षक को इस धारा में आगे विशेष लेखापरीक्षक कहा जाएगा।
(3) विशेष लेखापरीक्षक को विशेष लेखापरीक्षा के संबंध में वही शक्तियां और कर्तव्य प्राप्त होंगे जो धारा 73 के अधीन किसी बहु-राज्य सहकारी समिति के लेखापरीक्षक को प्राप्त होते हैं:
बशर्ते कि विशेष लेखा परीक्षक बहु-राज्यीय सहकारी समिति के सदस्यों को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बजाय, उसे केंद्र सरकार को प्रस्तुत करेगा।
(4) विशेष लेखा परीक्षक की रिपोर्ट में, जहाँ तक संभव हो, धारा 73 के अंतर्गत लेखा परीक्षक की रिपोर्ट में शामिल किए जाने वाले सभी मामले शामिल होंगे और यदि केंद्र सरकार ऐसा निर्देश दे, तो उसमें किसी अन्य मामले पर भी विवरण शामिल होगा जो उस सरकार द्वारा उसे संदर्भित किया जा सकता है।
(5) केंद्र सरकार आदेश द्वारा आदेश में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति को विशेष लेखा परीक्षक को उसमें निर्दिष्ट समय के भीतर ऐसी जानकारी या अतिरिक्त जानकारी प्रस्तुत करने का निर्देश दे सकती है, जो विशेष लेखा परीक्षक को विशेष लेखापरीक्षा के संबंध में आवश्यक हो।
(6) विशेष लेखा परीक्षक की रिपोर्ट प्राप्त होने पर, केंद्र सरकार इस अधिनियम या उस समय लागू किसी अन्य कानून के प्रावधानों के अनुसार रिपोर्ट पर ऐसी कार्रवाई कर सकती है जिसे वह आवश्यक समझे।
बशर्ते कि यदि केंद्र सरकार रिपोर्ट प्राप्त होने की तिथि से चार महीने के भीतर उस पर कोई कार्रवाई नहीं करती है, तो सरकार बहुराज्यीय सहकारी समिति को रिपोर्ट की एक प्रति या उससे संबंधित अंश, उस पर अपनी टिप्पणियों सहित भेजेगी और बहुराज्यीय सहकारी समिति से यह अपेक्षा करेगी कि वह उस प्रति या अंशों को सदस्यों में वितरित करे या अगली आम बैठक में बहुराज्यीय सहकारी समिति के समक्ष ऐसी प्रति या अंशों को पढ़वाए।
(7) इस धारा के अंतर्गत किसी विशेष लेखापरीक्षा के व्यय और उससे संबंधित व्यय (विशेष लेखापरीक्षक का पारिश्रमिक सहित) केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किए जाएंगे, जो निर्धारण अंतिम होगा और बहुराज्य सहकारी समिति द्वारा भुगतान किया जाएगा, और ऐसे भुगतान में चूक होने पर, यह राशि बहुराज्य सहकारी समिति से भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूल की जाएगी।
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