MSCOS Act 43अध्याय V · Direction and Management of Multi-state Co-operative Societies
धारा 43 · बोर्ड के सदस्य बनने के लिए अयोग्यताएँ।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) किसी भी बहुराज्यीय सहकारी समिति का कोई भी सदस्य या किसी सदस्य का नामित व्यक्ति, समिति या राष्ट्रीय सहकारी समिति, ऐसी बहुराज्यीय सहकारी समिति या राष्ट्रीय सहकारी समिति, या किसी अन्य सहकारी समिति, जिससे बहुराज्यीय सहकारी समिति संबद्ध है, के बोर्ड का सदस्य चुने जाने या सदस्य होने के लिए पात्र नहीं होगा, यदि ऐसा सदस्य--
(क) किसी सक्षम न्यायालय द्वारा दिवालिया या मानसिक रूप से अस्वस्थ घोषित किया गया हो;
(ख) सोसायटी के साथ किसी अनुबंध के लाभ में शामिल है या भाग लेता है;
(ग) नैतिक पतन से संबंधित अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो;
(घ) संस्था के अधीन कोई लाभप्रद पद या स्थान धारण करता है:
बशर्ते कि समिति का मुख्य कार्यकारी अधिकारी या ऐसा पूर्णकालिक कर्मचारी जिसे केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित किया जाए या ऐसी समिति के कर्मचारियों द्वारा समिति के बोर्ड में उनका प्रतिनिधित्व करने के लिए निर्वाचित व्यक्ति ऐसे बोर्ड के सदस्य के रूप में चुने जाने या सदस्य होने के लिए पात्र होगा;
(ई) ऐसे चुनाव या नियुक्ति की तिथि से ठीक पहले बारह महीने से कम समय के लिए सोसायटी का सदस्य रहा हो;
(f) उस संस्था द्वारा संचालित किसी भी प्रकार के व्यवसाय में उसका हित हो जिसका वह सदस्य है;
(जी) उसने उस संस्था से ऋण या माल उधार लिया है जिसका वह सदस्य है, या वह ऐसी संस्था का ऋणी है और ऐसी संस्था द्वारा जारी चूक की सूचना प्राप्त होने के बाद उसने चूक की है--
(i) ऐसे ऋण या देनदारी के पुनर्भुगतान में या क्रेडिट पर ली गई वस्तुओं के मूल्य के भुगतान में, जैसा भी मामला हो, ऐसे पुनर्भुगतान या भुगतान के लिए निर्धारित तिथि के भीतर या यदि ऐसी तिथि बढ़ाई जाती है, जो किसी भी स्थिति में छह महीने से अधिक नहीं होगी, तो बढ़ाई गई तिथि के भीतर, या
(ii) जब ऐसा ऋण या देनदारी या क्रेडिट पर ली गई वस्तुओं की कीमत किश्तों में चुकाई जानी हो, तो किसी किश्त के भुगतान में चूक की राशि या उसका कोई भाग चूक की तारीख से छह महीने की समाप्ति तक बकाया रहे:
बशर्ते कि इस खंड के तहत पद से मुक्त हो चुके बोर्ड के सदस्य, पद से मुक्त होने की तिथि से एक वर्ष की अवधि तक, उस बहुराज्यीय सहकारी समिति के बोर्ड के सदस्य के रूप में पुन: निर्वाचित होने या किसी अन्य बहुराज्यीय सहकारी समिति के बोर्ड के लिए निर्वाचित होने के पात्र नहीं होंगे;
(h) वह व्यक्ति है जिसके विरुद्ध किसी डिक्री, निर्णय या आदेश के तहत देय कोई राशि इस अधिनियम के अंतर्गत वसूली के लिए लंबित है;
(i) बहु-राज्य सहकारी समिति की ओर से या उसके विरुद्ध, या किसी अन्य बहु-राज्य सहकारी समिति की ओर से या उसके विरुद्ध, जो पूर्व समिति की सदस्य है, कानूनी व्यवसायी के रूप में नियुक्त या नियोजित किया जाता है।
स्पष्टीकरण .--इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "कानूनी व्यवसायी" का वही अर्थ है जो अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (25 ऑफ 1961) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (i) में है;
(j) इस अधिनियम के अंतर्गत किसी अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो;
(k) धारा 29 के तहत सदस्य होने के लिए अयोग्य है;
(एल) धारा 30 के तहत सदस्य के रूप में निष्कासित किया गया है;
(m) लगातार तीन बोर्ड बैठकों से अनुपस्थित रहता है और बोर्ड द्वारा ऐसी अनुपस्थिति को माफ नहीं किया गया है;
(n) लगातार तीन आम सभा बैठकों से अनुपस्थित रहता है और आम सभा में सदस्यों द्वारा ऐसी अनुपस्थिति को माफ नहीं किया गया है।
(2) कोई व्यक्ति किसी बहुराज्यीय सहकारी समिति के बोर्ड के सदस्य के रूप में पांच वर्ष की अवधि के लिए निर्वाचित होने के योग्य नहीं होगा, यदि ऐसी बहुराज्यीय सहकारी समिति का बोर्ड विफल हो जाता है--
(क) धारा 45 के अधीन बोर्ड के चुनाव कराना; या
(ख) धारा 39 के अधीन वार्षिक आम बैठक बुलाना; या
(ग) वित्तीय विवरण तैयार करना और उसे वार्षिक आम बैठक में प्रस्तुत करना।
(क) किसी सक्षम न्यायालय द्वारा दिवालिया या मानसिक रूप से अस्वस्थ घोषित किया गया हो;
(ख) सोसायटी के साथ किसी अनुबंध के लाभ में शामिल है या भाग लेता है;
(ग) नैतिक पतन से संबंधित अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो;
(घ) संस्था के अधीन कोई लाभप्रद पद या स्थान धारण करता है:
बशर्ते कि समिति का मुख्य कार्यकारी अधिकारी या ऐसा पूर्णकालिक कर्मचारी जिसे केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित किया जाए या ऐसी समिति के कर्मचारियों द्वारा समिति के बोर्ड में उनका प्रतिनिधित्व करने के लिए निर्वाचित व्यक्ति ऐसे बोर्ड के सदस्य के रूप में चुने जाने या सदस्य होने के लिए पात्र होगा;
(ई) ऐसे चुनाव या नियुक्ति की तिथि से ठीक पहले बारह महीने से कम समय के लिए सोसायटी का सदस्य रहा हो;
(f) उस संस्था द्वारा संचालित किसी भी प्रकार के व्यवसाय में उसका हित हो जिसका वह सदस्य है;
(जी) उसने उस संस्था से ऋण या माल उधार लिया है जिसका वह सदस्य है, या वह ऐसी संस्था का ऋणी है और ऐसी संस्था द्वारा जारी चूक की सूचना प्राप्त होने के बाद उसने चूक की है--
(i) ऐसे ऋण या देनदारी के पुनर्भुगतान में या क्रेडिट पर ली गई वस्तुओं के मूल्य के भुगतान में, जैसा भी मामला हो, ऐसे पुनर्भुगतान या भुगतान के लिए निर्धारित तिथि के भीतर या यदि ऐसी तिथि बढ़ाई जाती है, जो किसी भी स्थिति में छह महीने से अधिक नहीं होगी, तो बढ़ाई गई तिथि के भीतर, या
(ii) जब ऐसा ऋण या देनदारी या क्रेडिट पर ली गई वस्तुओं की कीमत किश्तों में चुकाई जानी हो, तो किसी किश्त के भुगतान में चूक की राशि या उसका कोई भाग चूक की तारीख से छह महीने की समाप्ति तक बकाया रहे:
बशर्ते कि इस खंड के तहत पद से मुक्त हो चुके बोर्ड के सदस्य, पद से मुक्त होने की तिथि से एक वर्ष की अवधि तक, उस बहुराज्यीय सहकारी समिति के बोर्ड के सदस्य के रूप में पुन: निर्वाचित होने या किसी अन्य बहुराज्यीय सहकारी समिति के बोर्ड के लिए निर्वाचित होने के पात्र नहीं होंगे;
(h) वह व्यक्ति है जिसके विरुद्ध किसी डिक्री, निर्णय या आदेश के तहत देय कोई राशि इस अधिनियम के अंतर्गत वसूली के लिए लंबित है;
(i) बहु-राज्य सहकारी समिति की ओर से या उसके विरुद्ध, या किसी अन्य बहु-राज्य सहकारी समिति की ओर से या उसके विरुद्ध, जो पूर्व समिति की सदस्य है, कानूनी व्यवसायी के रूप में नियुक्त या नियोजित किया जाता है।
स्पष्टीकरण .--इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "कानूनी व्यवसायी" का वही अर्थ है जो अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (25 ऑफ 1961) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (i) में है;
(j) इस अधिनियम के अंतर्गत किसी अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो;
(k) धारा 29 के तहत सदस्य होने के लिए अयोग्य है;
(एल) धारा 30 के तहत सदस्य के रूप में निष्कासित किया गया है;
(m) लगातार तीन बोर्ड बैठकों से अनुपस्थित रहता है और बोर्ड द्वारा ऐसी अनुपस्थिति को माफ नहीं किया गया है;
(n) लगातार तीन आम सभा बैठकों से अनुपस्थित रहता है और आम सभा में सदस्यों द्वारा ऐसी अनुपस्थिति को माफ नहीं किया गया है।
(2) कोई व्यक्ति किसी बहुराज्यीय सहकारी समिति के बोर्ड के सदस्य के रूप में पांच वर्ष की अवधि के लिए निर्वाचित होने के योग्य नहीं होगा, यदि ऐसी बहुराज्यीय सहकारी समिति का बोर्ड विफल हो जाता है--
(क) धारा 45 के अधीन बोर्ड के चुनाव कराना; या
(ख) धारा 39 के अधीन वार्षिक आम बैठक बुलाना; या
(ग) वित्तीय विवरण तैयार करना और उसे वार्षिक आम बैठक में प्रस्तुत करना।
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