MSCOS Act 85अध्याय IX · Settlement of Disputes
धारा 85 · सीमा।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) परिसीमा अधिनियम, 1963 (36 ऑफ 1963) में किसी बात के होते हुए भी, परन्तु इस अधिनियम में किए गए विशिष्ट प्रावधानों के अधीन रहते हुए, मध्यस्थता के लिए संदर्भित विवाद के मामले में परिसीमा अवधि,--
(क) जब विवाद किसी बहुराज्यीय सहकारी समिति के किसी सदस्य द्वारा देय ब्याज सहित किसी राशि की वसूली से संबंधित हो, तो उसकी गणना उस तिथि से की जाएगी जिस तिथि को ऐसे सदस्य की मृत्यु हो जाती है या वह समिति का सदस्य नहीं रह जाता है;
(ख) खंड (ग) में अन्यथा प्रावधान किए जाने के अलावा, जब विवाद धारा 84 की उपधारा (1) के खंड (ख) या खंड (ग) या खंड (घ ) में निर्दिष्ट किसी पक्ष द्वारा किए गए किसी कार्य या चूक से संबंधित हो, तो वह उस तिथि से छह वर्ष होगा जिस तिथि को वह कार्य या चूक हुई थी जिसके संदर्भ में विवाद उत्पन्न हुआ था;
(ग) जब विवाद किसी बहु-राज्य सहकारी समिति के अधिकारी के चुनाव के संबंध में हो, तो चुनाव के परिणाम की घोषणा की तारीख से एक माह होगा।
(2) उपधारा (1) में उल्लिखित विवादों को छोड़कर, किसी भी विवाद के मामले में परिसीमा अवधि, जिसे मध्यस्थता के लिए संदर्भित किया जाना आवश्यक है, परिसीमा अधिनियम, 1963 (36 ऑफ 1963) के प्रावधानों द्वारा विनियमित की जाएगी, मानो विवाद एक मुकदमा हो और मध्यस्थ एक दीवानी न्यायालय हो।
(3) उपधारा (1) और (2) में किसी बात के होते हुए भी, मध्यस्थ परिसीमा अवधि समाप्त होने के बाद विवाद स्वीकार कर सकता है, यदि आवेदक मध्यस्थ को संतुष्ट कर दे कि उसके पास विवाद को ऐसी अवधि के भीतर संदर्भित न करने का पर्याप्त कारण था।
(क) जब विवाद किसी बहुराज्यीय सहकारी समिति के किसी सदस्य द्वारा देय ब्याज सहित किसी राशि की वसूली से संबंधित हो, तो उसकी गणना उस तिथि से की जाएगी जिस तिथि को ऐसे सदस्य की मृत्यु हो जाती है या वह समिति का सदस्य नहीं रह जाता है;
(ख) खंड (ग) में अन्यथा प्रावधान किए जाने के अलावा, जब विवाद धारा 84 की उपधारा (1) के खंड (ख) या खंड (ग) या खंड (घ ) में निर्दिष्ट किसी पक्ष द्वारा किए गए किसी कार्य या चूक से संबंधित हो, तो वह उस तिथि से छह वर्ष होगा जिस तिथि को वह कार्य या चूक हुई थी जिसके संदर्भ में विवाद उत्पन्न हुआ था;
(ग) जब विवाद किसी बहु-राज्य सहकारी समिति के अधिकारी के चुनाव के संबंध में हो, तो चुनाव के परिणाम की घोषणा की तारीख से एक माह होगा।
(2) उपधारा (1) में उल्लिखित विवादों को छोड़कर, किसी भी विवाद के मामले में परिसीमा अवधि, जिसे मध्यस्थता के लिए संदर्भित किया जाना आवश्यक है, परिसीमा अधिनियम, 1963 (36 ऑफ 1963) के प्रावधानों द्वारा विनियमित की जाएगी, मानो विवाद एक मुकदमा हो और मध्यस्थ एक दीवानी न्यायालय हो।
(3) उपधारा (1) और (2) में किसी बात के होते हुए भी, मध्यस्थ परिसीमा अवधि समाप्त होने के बाद विवाद स्वीकार कर सकता है, यदि आवेदक मध्यस्थ को संतुष्ट कर दे कि उसके पास विवाद को ऐसी अवधि के भीतर संदर्भित न करने का पर्याप्त कारण था।
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