MSCOS Act 101अध्याय XII · Appeals and Review
धारा 101 · समीक्षा।
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(1) धारा 99 में निर्दिष्ट अपीलीय प्राधिकारी किसी भी पक्षकार के आवेदन पर किसी भी मामले में अपने ही आदेश की समीक्षा कर सकता है और उसके संदर्भ में ऐसे आदेश पारित कर सकता है जैसा वह उचित समझे:
बशर्ते कि ऐसा कोई भी आवेदन तब तक स्वीकार नहीं किया जाएगा जब तक कि अपीलीय प्राधिकारी संतुष्ट न हो जाए कि कोई नया और महत्वपूर्ण मामला या साक्ष्य सामने आया है जो उचित सावधानी बरतने के बाद भी आवेदक के ज्ञान में नहीं था या आदेश दिए जाने के समय उसके द्वारा प्रस्तुत नहीं किया जा सका था या अभिलेख में कोई स्पष्ट गलती या त्रुटि हुई है या किसी अन्य पर्याप्त कारण से।
इसके अलावा, इस उपधारा के अंतर्गत ऐसा कोई आदेश तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक कि सभी संबंधित पक्षों को नोटिस न दे दिया गया हो और उन्हें सुनवाई का उचित अवसर न दिया गया हो।
(2) उपधारा (1) के तहत किसी भी पक्ष द्वारा समीक्षा हेतु आवेदन अपीलीय प्राधिकारी के उस आदेश की सूचना मिलने की तिथि से तीस दिनों के भीतर किया जाएगा जिसकी समीक्षा की जानी है।
बशर्ते कि ऐसा कोई भी आवेदन तब तक स्वीकार नहीं किया जाएगा जब तक कि अपीलीय प्राधिकारी संतुष्ट न हो जाए कि कोई नया और महत्वपूर्ण मामला या साक्ष्य सामने आया है जो उचित सावधानी बरतने के बाद भी आवेदक के ज्ञान में नहीं था या आदेश दिए जाने के समय उसके द्वारा प्रस्तुत नहीं किया जा सका था या अभिलेख में कोई स्पष्ट गलती या त्रुटि हुई है या किसी अन्य पर्याप्त कारण से।
इसके अलावा, इस उपधारा के अंतर्गत ऐसा कोई आदेश तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक कि सभी संबंधित पक्षों को नोटिस न दे दिया गया हो और उन्हें सुनवाई का उचित अवसर न दिया गया हो।
(2) उपधारा (1) के तहत किसी भी पक्ष द्वारा समीक्षा हेतु आवेदन अपीलीय प्राधिकारी के उस आदेश की सूचना मिलने की तिथि से तीस दिनों के भीतर किया जाएगा जिसकी समीक्षा की जानी है।
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