MSCOS Act 103अध्याय XIII · Societies Which Become Multi-state Co-operative Societies Consequent on Reorganisation of States
धारा 103 · राज्यों के पुनर्गठन से ठीक पहले कार्यरत सहकारी समितियाँ।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जहां, राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 (37 ऑफ 1956) के भाग II के प्रावधानों या राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित किसी अन्य अधिनियम के आधार पर, कोई सहकारी समिति, जिसके उद्देश्य पुनर्गठन होने से ठीक पहले एक राज्य तक सीमित थे, उस दिन से बहु-राज्य सहकारी समिति बन जाती है, तो उसे इस अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत पंजीकृत बहु-राज्य सहकारी समिति माना जाएगा और ऐसी समिति के उपनियम, जहां तक वे इस अधिनियम के प्रावधानों के साथ असंगत नहीं हैं, तब तक लागू रहेंगे जब तक कि उनमें कोई परिवर्तन या निरस्तीकरण न हो जाए।
(2) यदि केंद्रीय रजिस्ट्रार या केंद्र सरकार द्वारा इस संबंध में अधिकृत किसी अधिकारी (जिसे इस धारा में आगे अधिकृत अधिकारी कहा गया है) को यह प्रतीत होता है कि उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी समिति का पुनर्गठन या पुनर्व्यवस्था करना आवश्यक या उचित है, तो केंद्रीय रजिस्ट्रार या अधिकृत अधिकारी, जैसा भी मामला हो, केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति से, उस समिति की आम सभा की बैठक में, जो निर्धारित तरीके से आयोजित की जाएगी, पुनर्गठन या पुनर्व्यवस्था की एक योजना प्रस्तुत कर सकता है, जिसमें निम्नलिखित प्रस्ताव शामिल होंगे:
(क) नई बहु-राज्यीय सहकारी समितियों का गठन और उस समिति की परिसंपत्तियों और देनदारियों का पूर्ण या आंशिक रूप से उसमें हस्तांतरण; या
(ख) उस समिति की परिसंपत्तियों और देनदारियों का पूर्ण या आंशिक हस्तांतरण, आम सभा की उस बैठक की तिथि से ठीक पहले अस्तित्व में मौजूद किसी अन्य बहुराज्य सहकारी समिति को (जिसे इस खंड में आगे मौजूदा बहुराज्य सहकारी समिति कहा गया है)।
(3) यदि उक्त बैठक में उपस्थित सदस्यों के बहुमत द्वारा पारित प्रस्ताव द्वारा योजना को बिना किसी संशोधन के या केंद्रीय रजिस्ट्रार या अधिकृत अधिकारी द्वारा सहमत संशोधनों के साथ स्वीकृत कर दिया जाता है, तो वह योजना को प्रमाणित करेगा और ऐसे प्रमाणीकरण पर, किसी भी कानून, विनियम या उप-नियम में इसके विपरीत कुछ भी निहित होने के बावजूद, योजना उस योजना से प्रभावित सभी समितियों के साथ-साथ उन सभी समितियों के शेयरधारकों और लेनदारों पर बाध्यकारी होगी।
(4) यदि उपधारा (3) के तहत योजना स्वीकृत नहीं की जाती है, तो केंद्रीय रजिस्ट्रार या अधिकृत अधिकारी योजना को उपयुक्त उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीश को भेज सकता है, जिसे इस संबंध में उसके मुख्य न्यायाधीश द्वारा नामित किया जाए, और योजना के संबंध में उस न्यायाधीश का निर्णय अंतिम होगा और योजना से प्रभावित सभी समितियों के साथ-साथ ऐसी सभी समितियों के शेयरधारकों और लेनदारों पर बाध्यकारी होगा।
स्पष्टीकरण .--इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "उपयुक्त उच्च न्यायालय" से तात्पर्य उस उच्च न्यायालय से है जिसकी स्थानीय सीमा के अधिकार क्षेत्र में बहु-राज्यीय सहकारी समिति का मुख्य व्यवसाय स्थल स्थित है।
(5) इस धारा में किसी बात के होते हुए भी, यदि उपधारा (2) के अंतर्गत किसी योजना में खंड (ख) में निर्दिष्ट किसी बहुराज्यीय सहकारी समिति की परिसंपत्तियों एवं देनदारियों के हस्तांतरण से संबंधित कोई प्रस्ताव शामिल हो, तो वह योजना ऐसी बहुराज्यीय सहकारी समिति या उसके शेयरधारकों एवं लेनदारों पर तब तक बाध्यकारी नहीं होगी, जब तक कि ऐसे हस्तांतरण से संबंधित प्रस्ताव को उस बहुराज्यीय सहकारी समिति द्वारा उसकी आम सभा की बैठक में उपस्थित सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा स्वीकार न कर लिया जाए।
(2) यदि केंद्रीय रजिस्ट्रार या केंद्र सरकार द्वारा इस संबंध में अधिकृत किसी अधिकारी (जिसे इस धारा में आगे अधिकृत अधिकारी कहा गया है) को यह प्रतीत होता है कि उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी समिति का पुनर्गठन या पुनर्व्यवस्था करना आवश्यक या उचित है, तो केंद्रीय रजिस्ट्रार या अधिकृत अधिकारी, जैसा भी मामला हो, केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति से, उस समिति की आम सभा की बैठक में, जो निर्धारित तरीके से आयोजित की जाएगी, पुनर्गठन या पुनर्व्यवस्था की एक योजना प्रस्तुत कर सकता है, जिसमें निम्नलिखित प्रस्ताव शामिल होंगे:
(क) नई बहु-राज्यीय सहकारी समितियों का गठन और उस समिति की परिसंपत्तियों और देनदारियों का पूर्ण या आंशिक रूप से उसमें हस्तांतरण; या
(ख) उस समिति की परिसंपत्तियों और देनदारियों का पूर्ण या आंशिक हस्तांतरण, आम सभा की उस बैठक की तिथि से ठीक पहले अस्तित्व में मौजूद किसी अन्य बहुराज्य सहकारी समिति को (जिसे इस खंड में आगे मौजूदा बहुराज्य सहकारी समिति कहा गया है)।
(3) यदि उक्त बैठक में उपस्थित सदस्यों के बहुमत द्वारा पारित प्रस्ताव द्वारा योजना को बिना किसी संशोधन के या केंद्रीय रजिस्ट्रार या अधिकृत अधिकारी द्वारा सहमत संशोधनों के साथ स्वीकृत कर दिया जाता है, तो वह योजना को प्रमाणित करेगा और ऐसे प्रमाणीकरण पर, किसी भी कानून, विनियम या उप-नियम में इसके विपरीत कुछ भी निहित होने के बावजूद, योजना उस योजना से प्रभावित सभी समितियों के साथ-साथ उन सभी समितियों के शेयरधारकों और लेनदारों पर बाध्यकारी होगी।
(4) यदि उपधारा (3) के तहत योजना स्वीकृत नहीं की जाती है, तो केंद्रीय रजिस्ट्रार या अधिकृत अधिकारी योजना को उपयुक्त उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीश को भेज सकता है, जिसे इस संबंध में उसके मुख्य न्यायाधीश द्वारा नामित किया जाए, और योजना के संबंध में उस न्यायाधीश का निर्णय अंतिम होगा और योजना से प्रभावित सभी समितियों के साथ-साथ ऐसी सभी समितियों के शेयरधारकों और लेनदारों पर बाध्यकारी होगा।
स्पष्टीकरण .--इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "उपयुक्त उच्च न्यायालय" से तात्पर्य उस उच्च न्यायालय से है जिसकी स्थानीय सीमा के अधिकार क्षेत्र में बहु-राज्यीय सहकारी समिति का मुख्य व्यवसाय स्थल स्थित है।
(5) इस धारा में किसी बात के होते हुए भी, यदि उपधारा (2) के अंतर्गत किसी योजना में खंड (ख) में निर्दिष्ट किसी बहुराज्यीय सहकारी समिति की परिसंपत्तियों एवं देनदारियों के हस्तांतरण से संबंधित कोई प्रस्ताव शामिल हो, तो वह योजना ऐसी बहुराज्यीय सहकारी समिति या उसके शेयरधारकों एवं लेनदारों पर तब तक बाध्यकारी नहीं होगी, जब तक कि ऐसे हस्तांतरण से संबंधित प्रस्ताव को उस बहुराज्यीय सहकारी समिति द्वारा उसकी आम सभा की बैठक में उपस्थित सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा स्वीकार न कर लिया जाए।
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