MSCOS Act 25अध्याय IV · Members of Multi-state Co-operative Societies and Their Duties, Rights and Liabilities
धारा 25 · वे व्यक्ति जो सदस्य बन सकते हैं।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) निम्नलिखित व्यक्तियों के अलावा किसी भी व्यक्ति को बहुराज्यीय सहकारी समिति का सदस्य नहीं बनाया जाएगा, अर्थात्:--
(क) भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 (1872 का 9) की धारा 11 के तहत अनुबंध करने के लिए सक्षम व्यक्ति;
(ख) कोई बहु-राज्यीय सहकारी समिति या कोई सहकारी समिति;
(ग) केंद्र सरकार;
(घ) राज्य सरकार;
(ई) राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 (26 ऑफ 1962) के तहत स्थापित राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम;
(f) सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण वाली कोई अन्य निगम;
(जी) कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) की धारा 617 में परिभाषित कोई भी सरकारी कंपनी;
(h) ऐसे वर्ग या वर्ग या व्यक्तियों का संघ जैसा कि केंद्रीय रजिस्ट्रार द्वारा बहु-राज्य सहकारी समिति की प्रकृति और गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए अनुमति दी जा सकती है।
(2) कोई भी व्यक्ति राष्ट्रीय सहकारी समिति या संघीय सहकारी समिति के सदस्य के रूप में प्रवेश के लिए पात्र नहीं होगा।
(3) किसी बहु-राज्य सहकारी समिति की सदस्यता के लिए पात्र कोई भी व्यक्ति, अपने आवेदन पर, ऐसी समिति द्वारा सदस्य के रूप में भर्ती किया जा सकता है।
(4) किसी बहु-राज्यीय सहकारी समिति के सदस्य के रूप में प्रवेश के लिए प्रत्येक आवेदन का निपटारा ऐसी समिति द्वारा आवेदन प्राप्त होने की तिथि से चार माह की अवधि के भीतर किया जाएगा, और आवेदन पर ऐसी समिति का निर्णय आवेदक को ऐसे निर्णय की तिथि से पंद्रह दिनों के भीतर सूचित किया जाएगा।
बशर्ते कि यदि आवेदन का निपटारा उपर्युक्त अवधि के भीतर नहीं किया जाता है, या उपर्युक्त चार महीने की अवधि की समाप्ति के पंद्रह दिनों के भीतर निर्णय की सूचना नहीं दी जाती है, तो बहु-राज्य सहकारी समिति को ऐसी अवधि की समाप्ति की तारीख को आवेदक को प्रवेश देने से इनकार करने का निर्णय लिया हुआ माना जाएगा।
(5) बहु-राज्य सहकारी समिति के प्रत्येक सदस्य का यह कर्तव्य होगा कि वह ऐसी समिति के हितों और उद्देश्यों को बढ़ावा दे और उनकी रक्षा करे।
(क) भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 (1872 का 9) की धारा 11 के तहत अनुबंध करने के लिए सक्षम व्यक्ति;
(ख) कोई बहु-राज्यीय सहकारी समिति या कोई सहकारी समिति;
(ग) केंद्र सरकार;
(घ) राज्य सरकार;
(ई) राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 (26 ऑफ 1962) के तहत स्थापित राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम;
(f) सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण वाली कोई अन्य निगम;
(जी) कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) की धारा 617 में परिभाषित कोई भी सरकारी कंपनी;
(h) ऐसे वर्ग या वर्ग या व्यक्तियों का संघ जैसा कि केंद्रीय रजिस्ट्रार द्वारा बहु-राज्य सहकारी समिति की प्रकृति और गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए अनुमति दी जा सकती है।
(2) कोई भी व्यक्ति राष्ट्रीय सहकारी समिति या संघीय सहकारी समिति के सदस्य के रूप में प्रवेश के लिए पात्र नहीं होगा।
(3) किसी बहु-राज्य सहकारी समिति की सदस्यता के लिए पात्र कोई भी व्यक्ति, अपने आवेदन पर, ऐसी समिति द्वारा सदस्य के रूप में भर्ती किया जा सकता है।
(4) किसी बहु-राज्यीय सहकारी समिति के सदस्य के रूप में प्रवेश के लिए प्रत्येक आवेदन का निपटारा ऐसी समिति द्वारा आवेदन प्राप्त होने की तिथि से चार माह की अवधि के भीतर किया जाएगा, और आवेदन पर ऐसी समिति का निर्णय आवेदक को ऐसे निर्णय की तिथि से पंद्रह दिनों के भीतर सूचित किया जाएगा।
बशर्ते कि यदि आवेदन का निपटारा उपर्युक्त अवधि के भीतर नहीं किया जाता है, या उपर्युक्त चार महीने की अवधि की समाप्ति के पंद्रह दिनों के भीतर निर्णय की सूचना नहीं दी जाती है, तो बहु-राज्य सहकारी समिति को ऐसी अवधि की समाप्ति की तारीख को आवेदक को प्रवेश देने से इनकार करने का निर्णय लिया हुआ माना जाएगा।
(5) बहु-राज्य सहकारी समिति के प्रत्येक सदस्य का यह कर्तव्य होगा कि वह ऐसी समिति के हितों और उद्देश्यों को बढ़ावा दे और उनकी रक्षा करे।
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