MSCOS Act 84अध्याय IX · Settlement of Disputes
धारा 84 · विवादों का संदर्भ।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) किसी अन्य कानून में यथास्थिति लागू होने के बावजूद, यदि किसी बहुराज्यीय सहकारी समिति के गठन, प्रबंधन या व्यवसाय से संबंधित कोई विवाद उत्पन्न होता है— (बहुराज्यीय सहकारी समिति द्वारा अपने वेतनभोगी कर्मचारी के विरुद्ध की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई से संबंधित विवाद या औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (14 ऑफ 1947) की धारा 2 के खंड (क) में परिभाषित औद्योगिक विवाद को छोड़कर)—
(क) सदस्यों, पूर्व सदस्यों और सदस्यों, पूर्व सदस्यों और मृत सदस्यों के माध्यम से दावा करने वाले व्यक्तियों के बीच, या
(ख) किसी सदस्य, पूर्व सदस्यों और किसी सदस्य, पूर्व सदस्य या मृतक सदस्य के माध्यम से दावा करने वाले व्यक्तियों और बहुराज्यीय सहकारी समिति, उसके बोर्ड या बहुराज्यीय सहकारी समिति के किसी अधिकारी, एजेंट या कर्मचारी या परिसमापक, भूतपूर्व या वर्तमान, के बीच
(ग) बहुराज्यीय सहकारी समिति या उसके बोर्ड और किसी पूर्व बोर्ड, किसी अधिकारी, एजेंट या कर्मचारी, या किसी पूर्व अधिकारी, पूर्व एजेंट या पूर्व कर्मचारी, बहुराज्यीय सहकारी समिति के किसी मृत अधिकारी, मृत एजेंट या मृत कर्मचारी के वारिसों या कानूनी प्रतिनिधियों के बीच, या
(घ) बहुराज्यीय सहकारी समिति और किसी अन्य बहुराज्यीय सहकारी समिति के बीच, किसी बहुराज्यीय सहकारी समिति और किसी अन्य बहुराज्यीय सहकारी समिति के परिसमापक के बीच, या किसी बहुराज्यीय सहकारी समिति के परिसमापक और किसी अन्य बहुराज्यीय सहकारी समिति के परिसमापक के बीच।
ऐसे विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजा जाएगा।
(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, निम्नलिखित को बहु-राज्य सहकारी समिति के गठन, प्रबंधन या व्यवसाय से संबंधित विवाद माना जाएगा, अर्थात्:--
(क) किसी सदस्य या मृतक सदस्य के नामित व्यक्ति, वारिसों या कानूनी प्रतिनिधियों से बहु-राज्य सहकारी समिति द्वारा देय किसी ऋण या मांग के लिए किया गया दावा, चाहे ऐसा ऋण या मांग स्वीकार की गई हो या नहीं;
(ख) मूल देनदार के विरुद्ध ज़मानतदार द्वारा किया गया दावा, जहाँ बहुराज्यीय सहकारी समिति ने मूल देनदार की चूक के परिणामस्वरूप मूल देनदार से देय किसी ऋण या मांग के संबंध में ज़मानतदार से कोई राशि वसूल की हो, चाहे ऐसा ऋण या मांग स्वीकार की गई हो या नहीं;
(ग) किसी बहु-राज्य सहकारी समिति के किसी अधिकारी के चुनाव के संबंध में उत्पन्न होने वाला कोई विवाद।
(3) यदि कोई प्रश्न उठता है कि इस धारा के अधीन मध्यस्थता के लिए भेजा गया विवाद किसी बहु-राज्य सहकारी समिति के संविधान, प्रबंधन या व्यवसाय से संबंधित विवाद है या नहीं, तो मध्यस्थ का निर्णय अंतिम होगा और किसी भी न्यायालय में उस पर प्रश्न नहीं उठाया जाएगा।
(4) जहां उपधारा (1) के अधीन किसी विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजा गया है, तो उसका निपटारा या निर्णय केंद्रीय रजिस्ट्रार द्वारा नियुक्त मध्यस्थ द्वारा किया जाएगा।
(5) इस अधिनियम के तहत अन्यथा प्रदान किए जाने के अलावा, मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 (26 ऑफ 1996) के प्रावधान इस अधिनियम के तहत सभी मध्यस्थता पर लागू होंगे, मानो मध्यस्थता की कार्यवाही मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 के प्रावधानों के तहत निपटान या निर्णय के लिए संदर्भित की गई हो।
(क) सदस्यों, पूर्व सदस्यों और सदस्यों, पूर्व सदस्यों और मृत सदस्यों के माध्यम से दावा करने वाले व्यक्तियों के बीच, या
(ख) किसी सदस्य, पूर्व सदस्यों और किसी सदस्य, पूर्व सदस्य या मृतक सदस्य के माध्यम से दावा करने वाले व्यक्तियों और बहुराज्यीय सहकारी समिति, उसके बोर्ड या बहुराज्यीय सहकारी समिति के किसी अधिकारी, एजेंट या कर्मचारी या परिसमापक, भूतपूर्व या वर्तमान, के बीच
(ग) बहुराज्यीय सहकारी समिति या उसके बोर्ड और किसी पूर्व बोर्ड, किसी अधिकारी, एजेंट या कर्मचारी, या किसी पूर्व अधिकारी, पूर्व एजेंट या पूर्व कर्मचारी, बहुराज्यीय सहकारी समिति के किसी मृत अधिकारी, मृत एजेंट या मृत कर्मचारी के वारिसों या कानूनी प्रतिनिधियों के बीच, या
(घ) बहुराज्यीय सहकारी समिति और किसी अन्य बहुराज्यीय सहकारी समिति के बीच, किसी बहुराज्यीय सहकारी समिति और किसी अन्य बहुराज्यीय सहकारी समिति के परिसमापक के बीच, या किसी बहुराज्यीय सहकारी समिति के परिसमापक और किसी अन्य बहुराज्यीय सहकारी समिति के परिसमापक के बीच।
ऐसे विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजा जाएगा।
(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, निम्नलिखित को बहु-राज्य सहकारी समिति के गठन, प्रबंधन या व्यवसाय से संबंधित विवाद माना जाएगा, अर्थात्:--
(क) किसी सदस्य या मृतक सदस्य के नामित व्यक्ति, वारिसों या कानूनी प्रतिनिधियों से बहु-राज्य सहकारी समिति द्वारा देय किसी ऋण या मांग के लिए किया गया दावा, चाहे ऐसा ऋण या मांग स्वीकार की गई हो या नहीं;
(ख) मूल देनदार के विरुद्ध ज़मानतदार द्वारा किया गया दावा, जहाँ बहुराज्यीय सहकारी समिति ने मूल देनदार की चूक के परिणामस्वरूप मूल देनदार से देय किसी ऋण या मांग के संबंध में ज़मानतदार से कोई राशि वसूल की हो, चाहे ऐसा ऋण या मांग स्वीकार की गई हो या नहीं;
(ग) किसी बहु-राज्य सहकारी समिति के किसी अधिकारी के चुनाव के संबंध में उत्पन्न होने वाला कोई विवाद।
(3) यदि कोई प्रश्न उठता है कि इस धारा के अधीन मध्यस्थता के लिए भेजा गया विवाद किसी बहु-राज्य सहकारी समिति के संविधान, प्रबंधन या व्यवसाय से संबंधित विवाद है या नहीं, तो मध्यस्थ का निर्णय अंतिम होगा और किसी भी न्यायालय में उस पर प्रश्न नहीं उठाया जाएगा।
(4) जहां उपधारा (1) के अधीन किसी विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजा गया है, तो उसका निपटारा या निर्णय केंद्रीय रजिस्ट्रार द्वारा नियुक्त मध्यस्थ द्वारा किया जाएगा।
(5) इस अधिनियम के तहत अन्यथा प्रदान किए जाने के अलावा, मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 (26 ऑफ 1996) के प्रावधान इस अधिनियम के तहत सभी मध्यस्थता पर लागू होंगे, मानो मध्यस्थता की कार्यवाही मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 के प्रावधानों के तहत निपटान या निर्णय के लिए संदर्भित की गई हो।
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