Electricity Act 90अध्याय X · Appropriate Commission–Other provisions
धारा 90 · सदस्य को हटाना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस धारा के प्रावधानों के अनुसार ही किसी सदस्य को पद से हटाया जाएगा।
(2) केंद्रीय आयोग, केंद्रीय आयोग के किसी सदस्य के मामले में, और राज्य सरकार, राज्य आयोग के किसी सदस्य के मामले में, आदेश द्वारा किसी सदस्य को पद से हटा सकती है, यदि वह--
(क) दिवालिया घोषित किया गया है;
(ख) ऐसे अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो, जो उपयुक्त सरकार की राय में नैतिक पतन से संबंधित हो;
(ग) सदस्य के रूप में कार्य करने के लिए शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम हो गया हो;
(घ) ऐसा वित्तीय या अन्य हित अर्जित कर लिया है जिससे सदस्य के रूप में उसके कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है;
(ई) उसने अपने पद का इस प्रकार दुरुपयोग किया है कि उसका पद पर बने रहना जनहित के लिए हानिकारक हो; या
(f) सिद्ध दुर्व्यवहार का दोषी पाया गया है:
बशर्ते कि किसी भी सदस्य को खंड (घ) , (ङ) और (च) में निर्दिष्ट किसी भी आधार पर उसके पद से नहीं हटाया जाएगा, जब तक कि केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष को संदर्भित न किया जाए, जैसा भी मामला हो, केंद्रीय सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसके द्वारा की गई जांच के आधार पर यह रिपोर्ट न दी जाए कि सदस्य को ऐसे आधार या आधारों पर हटाया जाना चाहिए।
(3) केंद्र सरकार या राज्य सरकार, जैसा भी मामला हो, अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष से परामर्श करके, उपयुक्त आयोग के किसी भी सदस्य को, जिसके संबंध में उपधारा (2) के अंतर्गत अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष को संदर्भ भेजा गया है, तब तक निलंबित कर सकती है जब तक कि केंद्र सरकार या राज्य सरकार, जैसा भी मामला हो, अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष की रिपोर्ट प्राप्त होने पर ऐसे संदर्भ पर आदेश पारित न कर दे।
बशर्ते कि इस धारा में निहित कोई भी बात उपयुक्त आयोग के अध्यक्ष पर लागू नहीं होगी, जो अपनी नियुक्ति के समय सर्वोच्च न्यायालय का मौजूदा न्यायाधीश या उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश या उच्च न्यायालय का न्यायाधीश हो।
(2) केंद्रीय आयोग, केंद्रीय आयोग के किसी सदस्य के मामले में, और राज्य सरकार, राज्य आयोग के किसी सदस्य के मामले में, आदेश द्वारा किसी सदस्य को पद से हटा सकती है, यदि वह--
(क) दिवालिया घोषित किया गया है;
(ख) ऐसे अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो, जो उपयुक्त सरकार की राय में नैतिक पतन से संबंधित हो;
(ग) सदस्य के रूप में कार्य करने के लिए शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम हो गया हो;
(घ) ऐसा वित्तीय या अन्य हित अर्जित कर लिया है जिससे सदस्य के रूप में उसके कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है;
(ई) उसने अपने पद का इस प्रकार दुरुपयोग किया है कि उसका पद पर बने रहना जनहित के लिए हानिकारक हो; या
(f) सिद्ध दुर्व्यवहार का दोषी पाया गया है:
बशर्ते कि किसी भी सदस्य को खंड (घ) , (ङ) और (च) में निर्दिष्ट किसी भी आधार पर उसके पद से नहीं हटाया जाएगा, जब तक कि केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष को संदर्भित न किया जाए, जैसा भी मामला हो, केंद्रीय सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसके द्वारा की गई जांच के आधार पर यह रिपोर्ट न दी जाए कि सदस्य को ऐसे आधार या आधारों पर हटाया जाना चाहिए।
(3) केंद्र सरकार या राज्य सरकार, जैसा भी मामला हो, अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष से परामर्श करके, उपयुक्त आयोग के किसी भी सदस्य को, जिसके संबंध में उपधारा (2) के अंतर्गत अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष को संदर्भ भेजा गया है, तब तक निलंबित कर सकती है जब तक कि केंद्र सरकार या राज्य सरकार, जैसा भी मामला हो, अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष की रिपोर्ट प्राप्त होने पर ऐसे संदर्भ पर आदेश पारित न कर दे।
बशर्ते कि इस धारा में निहित कोई भी बात उपयुक्त आयोग के अध्यक्ष पर लागू नहीं होगी, जो अपनी नियुक्ति के समय सर्वोच्च न्यायालय का मौजूदा न्यायाधीश या उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश या उच्च न्यायालय का न्यायाधीश हो।
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