Electricity Act 111अध्याय XI · Appellate Tribunal for Electricity
धारा 111 · अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम के अंतर्गत किसी निर्णय अधिकारी द्वारा दिए गए आदेश (धारा 127 के अंतर्गत दिए गए आदेश को छोड़कर) या इस अधिनियम के अंतर्गत उपयुक्त आयोग द्वारा दिए गए आदेश से पीड़ित कोई व्यक्ति विद्युत अपील न्यायाधिकरण में अपील कर सकता है:
बशर्ते कि किसी भी व्यक्ति द्वारा न्यायनिर्णायक अधिकारी के किसी भी दंड लगाने के आदेश के विरुद्ध अपील करते समय, उस दंड की राशि जमा करनी होगी:
इसके अलावा, यदि किसी विशेष मामले में अपीलीय न्यायाधिकरण की राय है कि ऐसे जुर्माने का जमा करना उस व्यक्ति के लिए अनुचित कठिनाई का कारण बनेगा, तो वह ऐसे जुर्माने की वसूली सुनिश्चित करने के लिए उचित समझे जाने वाली शर्तों के अधीन ऐसे जमा से छूट दे सकता है।
(2) उपधारा (1) के अंतर्गत प्रत्येक अपील, निर्णय अधिकारी या उपयुक्त आयोग द्वारा दिए गए आदेश की प्रति पीड़ित व्यक्ति को प्राप्त होने की तिथि से पैंतालीस दिनों की अवधि के भीतर दाखिल की जाएगी और यह ऐसे प्रपत्र में होगी, ऐसे तरीके से सत्यापित होगी और इसके साथ ऐसा शुल्क संलग्न होगा जैसा निर्धारित किया जाए।
बशर्ते कि अपीलीय न्यायाधिकरण उक्त पैंतालीस दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद भी अपील पर विचार कर सकता है, यदि वह संतुष्ट हो कि उस अवधि के भीतर अपील दायर न करने का पर्याप्त कारण था।
(3) उपधारा (1) के तहत अपील प्राप्त होने पर, अपीलीय न्यायाधिकरण अपील के पक्षकारों को सुनवाई का अवसर देने के बाद, उस पर ऐसे आदेश पारित कर सकता है, जैसा वह उचित समझे, अपील के विरुद्ध आदेश की पुष्टि, संशोधन या निरस्त कर सकता है।
(4) अपीलीय न्यायाधिकरण अपने द्वारा दिए गए प्रत्येक आदेश की एक प्रति अपील के पक्षकारों और संबंधित निर्णय अधिकारी या उपयुक्त आयोग को भेजेगा, जैसा भी मामला हो।
(5) उपधारा (1) के अंतर्गत अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष दायर की गई अपील पर यथाशीघ्र कार्रवाई की जाएगी और अपील प्राप्त होने की तिथि से एक सौ अस्सी दिनों के भीतर अपील का अंतिम निपटारा करने का प्रयास किया जाएगा।
बशर्ते कि यदि कोई अपील उक्त एक सौ अस्सी दिनों की अवधि के भीतर निपटाई नहीं जा सकी, तो अपीलीय न्यायाधिकरण उक्त अवधि के भीतर अपील का निपटारा न करने के कारणों को लिखित रूप में दर्ज करेगा।
(6) अपीलीय न्यायाधिकरण, इस अधिनियम के अंतर्गत निर्णय अधिकारी या उपयुक्त आयोग द्वारा किसी कार्यवाही के संबंध में दिए गए किसी आदेश की वैधता, औचित्य या शुद्धता की जाँच करने के उद्देश्य से, स्वयं या अन्यथा, ऐसी कार्यवाही के अभिलेख मंगवा सकता है और मामले में ऐसा आदेश दे सकता है जैसा वह उचित समझे।
बशर्ते कि किसी भी व्यक्ति द्वारा न्यायनिर्णायक अधिकारी के किसी भी दंड लगाने के आदेश के विरुद्ध अपील करते समय, उस दंड की राशि जमा करनी होगी:
इसके अलावा, यदि किसी विशेष मामले में अपीलीय न्यायाधिकरण की राय है कि ऐसे जुर्माने का जमा करना उस व्यक्ति के लिए अनुचित कठिनाई का कारण बनेगा, तो वह ऐसे जुर्माने की वसूली सुनिश्चित करने के लिए उचित समझे जाने वाली शर्तों के अधीन ऐसे जमा से छूट दे सकता है।
(2) उपधारा (1) के अंतर्गत प्रत्येक अपील, निर्णय अधिकारी या उपयुक्त आयोग द्वारा दिए गए आदेश की प्रति पीड़ित व्यक्ति को प्राप्त होने की तिथि से पैंतालीस दिनों की अवधि के भीतर दाखिल की जाएगी और यह ऐसे प्रपत्र में होगी, ऐसे तरीके से सत्यापित होगी और इसके साथ ऐसा शुल्क संलग्न होगा जैसा निर्धारित किया जाए।
बशर्ते कि अपीलीय न्यायाधिकरण उक्त पैंतालीस दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद भी अपील पर विचार कर सकता है, यदि वह संतुष्ट हो कि उस अवधि के भीतर अपील दायर न करने का पर्याप्त कारण था।
(3) उपधारा (1) के तहत अपील प्राप्त होने पर, अपीलीय न्यायाधिकरण अपील के पक्षकारों को सुनवाई का अवसर देने के बाद, उस पर ऐसे आदेश पारित कर सकता है, जैसा वह उचित समझे, अपील के विरुद्ध आदेश की पुष्टि, संशोधन या निरस्त कर सकता है।
(4) अपीलीय न्यायाधिकरण अपने द्वारा दिए गए प्रत्येक आदेश की एक प्रति अपील के पक्षकारों और संबंधित निर्णय अधिकारी या उपयुक्त आयोग को भेजेगा, जैसा भी मामला हो।
(5) उपधारा (1) के अंतर्गत अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष दायर की गई अपील पर यथाशीघ्र कार्रवाई की जाएगी और अपील प्राप्त होने की तिथि से एक सौ अस्सी दिनों के भीतर अपील का अंतिम निपटारा करने का प्रयास किया जाएगा।
बशर्ते कि यदि कोई अपील उक्त एक सौ अस्सी दिनों की अवधि के भीतर निपटाई नहीं जा सकी, तो अपीलीय न्यायाधिकरण उक्त अवधि के भीतर अपील का निपटारा न करने के कारणों को लिखित रूप में दर्ज करेगा।
(6) अपीलीय न्यायाधिकरण, इस अधिनियम के अंतर्गत निर्णय अधिकारी या उपयुक्त आयोग द्वारा किसी कार्यवाही के संबंध में दिए गए किसी आदेश की वैधता, औचित्य या शुद्धता की जाँच करने के उद्देश्य से, स्वयं या अन्यथा, ऐसी कार्यवाही के अभिलेख मंगवा सकता है और मामले में ऐसा आदेश दे सकता है जैसा वह उचित समझे।
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