Electricity Act 86अध्याय X · Constitution, powers and functions of State Commissions
धारा 86 · राज्य आयोग के कार्य।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) राज्य आयोग निम्नलिखित कार्यों का निर्वहन करेगा, अर्थात्:--
(क) राज्य के भीतर बिजली के उत्पादन, आपूर्ति, पारेषण और परिवहन के लिए थोक, थोक या खुदरा, जैसा भी मामला हो, टैरिफ निर्धारित करना:
बशर्ते कि जहां धारा 42 के तहत उपभोक्ताओं की किसी श्रेणी को खुली पहुंच की अनुमति दी गई है, वहां राज्य आयोग केवल उक्त श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए व्हीलिंग शुल्क और उस पर लगने वाले अधिभार (यदि कोई हो) का निर्धारण करेगा;
(ख) वितरण लाइसेंसधारियों की बिजली खरीद और प्राप्ति प्रक्रिया को विनियमित करना, जिसमें वह कीमत भी शामिल है जिस पर राज्य के भीतर वितरण और आपूर्ति के लिए बिजली की खरीद के समझौतों के माध्यम से उत्पादन कंपनियों या लाइसेंसधारियों या अन्य स्रोतों से बिजली खरीदी जाएगी;
(ग) राज्य के भीतर विद्युत संचरण और परिवहन को सुगम बनाना;
(घ) राज्य के भीतर अपने संचालन के संबंध में पारेषण लाइसेंसधारियों, वितरण लाइसेंसधारियों और बिजली व्यापारियों के रूप में कार्य करने के इच्छुक व्यक्तियों को लाइसेंस जारी करना;
(ई) ग्रिड से कनेक्टिविटी और किसी भी व्यक्ति को बिजली की बिक्री के लिए उपयुक्त उपाय प्रदान करके सह-उत्पादन और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से बिजली उत्पादन को बढ़ावा देना, और वितरण लाइसेंसधारी के क्षेत्र में बिजली की कुल खपत का एक प्रतिशत ऐसे स्रोतों से बिजली की खरीद के लिए निर्दिष्ट करना;
(f) लाइसेंसधारियों और उत्पादन कंपनियों के बीच विवादों का निपटारा करना और किसी भी विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजना;
(जी) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए शुल्क लगाना;
(h) धारा 79 की उपधारा (1) के खंड (h) के अधीन निर्दिष्ट ग्रिड कोड के अनुरूप राज्य ग्रिड कोड निर्दिष्ट करना;
(i) लाइसेंसधारियों द्वारा सेवा की गुणवत्ता, निरंतरता और विश्वसनीयता के संबंध में मानकों को निर्दिष्ट करना या लागू करना;
(j) यदि आवश्यक समझा जाए तो राज्य के भीतर विद्युत व्यापार में व्यापार मार्जिन निर्धारित करना;
(k) इस अधिनियम के अधीन इसे सौंपे गए अन्य कार्यों का निर्वहन करना।
(2) राज्य आयोग राज्य सरकार को निम्नलिखित में से सभी या किसी भी मामले पर सलाह देगा, अर्थात्:--
(i) विद्युत उद्योग की गतिविधियों में प्रतिस्पर्धा, दक्षता और मितव्ययिता को बढ़ावा देना;
(ii) विद्युत उद्योग में निवेश को प्रोत्साहन देना;
(iii) राज्य में विद्युत उद्योग का पुनर्गठन और पुनर्संरचना;
(iv) बिजली के उत्पादन, पारेषण, वितरण और व्यापार से संबंधित मामले या उस सरकार द्वारा राज्य आयोग को संदर्भित कोई अन्य मामला।
(3) राज्य आयोग अपनी शक्तियों का प्रयोग करते समय और अपने कार्यों का निर्वहन करते समय पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा।
(4) अपने कार्यों के निर्वहन में, राज्य आयोग धारा 3 के तहत प्रकाशित राष्ट्रीय विद्युत नीति, राष्ट्रीय विद्युत योजना और टैरिफ नीति द्वारा निर्देशित होगा।
(क) राज्य के भीतर बिजली के उत्पादन, आपूर्ति, पारेषण और परिवहन के लिए थोक, थोक या खुदरा, जैसा भी मामला हो, टैरिफ निर्धारित करना:
बशर्ते कि जहां धारा 42 के तहत उपभोक्ताओं की किसी श्रेणी को खुली पहुंच की अनुमति दी गई है, वहां राज्य आयोग केवल उक्त श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए व्हीलिंग शुल्क और उस पर लगने वाले अधिभार (यदि कोई हो) का निर्धारण करेगा;
(ख) वितरण लाइसेंसधारियों की बिजली खरीद और प्राप्ति प्रक्रिया को विनियमित करना, जिसमें वह कीमत भी शामिल है जिस पर राज्य के भीतर वितरण और आपूर्ति के लिए बिजली की खरीद के समझौतों के माध्यम से उत्पादन कंपनियों या लाइसेंसधारियों या अन्य स्रोतों से बिजली खरीदी जाएगी;
(ग) राज्य के भीतर विद्युत संचरण और परिवहन को सुगम बनाना;
(घ) राज्य के भीतर अपने संचालन के संबंध में पारेषण लाइसेंसधारियों, वितरण लाइसेंसधारियों और बिजली व्यापारियों के रूप में कार्य करने के इच्छुक व्यक्तियों को लाइसेंस जारी करना;
(ई) ग्रिड से कनेक्टिविटी और किसी भी व्यक्ति को बिजली की बिक्री के लिए उपयुक्त उपाय प्रदान करके सह-उत्पादन और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से बिजली उत्पादन को बढ़ावा देना, और वितरण लाइसेंसधारी के क्षेत्र में बिजली की कुल खपत का एक प्रतिशत ऐसे स्रोतों से बिजली की खरीद के लिए निर्दिष्ट करना;
(f) लाइसेंसधारियों और उत्पादन कंपनियों के बीच विवादों का निपटारा करना और किसी भी विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजना;
(जी) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए शुल्क लगाना;
(h) धारा 79 की उपधारा (1) के खंड (h) के अधीन निर्दिष्ट ग्रिड कोड के अनुरूप राज्य ग्रिड कोड निर्दिष्ट करना;
(i) लाइसेंसधारियों द्वारा सेवा की गुणवत्ता, निरंतरता और विश्वसनीयता के संबंध में मानकों को निर्दिष्ट करना या लागू करना;
(j) यदि आवश्यक समझा जाए तो राज्य के भीतर विद्युत व्यापार में व्यापार मार्जिन निर्धारित करना;
(k) इस अधिनियम के अधीन इसे सौंपे गए अन्य कार्यों का निर्वहन करना।
(2) राज्य आयोग राज्य सरकार को निम्नलिखित में से सभी या किसी भी मामले पर सलाह देगा, अर्थात्:--
(i) विद्युत उद्योग की गतिविधियों में प्रतिस्पर्धा, दक्षता और मितव्ययिता को बढ़ावा देना;
(ii) विद्युत उद्योग में निवेश को प्रोत्साहन देना;
(iii) राज्य में विद्युत उद्योग का पुनर्गठन और पुनर्संरचना;
(iv) बिजली के उत्पादन, पारेषण, वितरण और व्यापार से संबंधित मामले या उस सरकार द्वारा राज्य आयोग को संदर्भित कोई अन्य मामला।
(3) राज्य आयोग अपनी शक्तियों का प्रयोग करते समय और अपने कार्यों का निर्वहन करते समय पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा।
(4) अपने कार्यों के निर्वहन में, राज्य आयोग धारा 3 के तहत प्रकाशित राष्ट्रीय विद्युत नीति, राष्ट्रीय विद्युत योजना और टैरिफ नीति द्वारा निर्देशित होगा।
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