Electricity Act 42अध्याय VI · Provisions with respect to distribution licensees
धारा 42 · वितरण लाइसेंसधारी और ओपन एक्सेस के कर्तव्य।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) वितरण लाइसेंसधारी का यह कर्तव्य होगा कि वह अपने आपूर्ति क्षेत्र में एक कुशल, समन्वित और किफायती वितरण प्रणाली विकसित करे और उसे बनाए रखे तथा इस अधिनियम में निहित प्रावधानों के अनुसार बिजली की आपूर्ति करे।
(2) राज्य आयोग, नियुक्ति तिथि से एक वर्ष के भीतर, ऐसे चरणों में और ऐसी शर्तों (जिनमें क्रॉस सब्सिडी और अन्य परिचालन संबंधी बाधाएं शामिल हैं) के अधीन खुली पहुंच लागू करेगा, जैसा कि उसके द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है, और क्रमिक चरणों में खुली पहुंच की सीमा निर्दिष्ट करते समय और पहिए चलाने के शुल्क निर्धारित करते समय, वह क्रॉस सब्सिडी और अन्य परिचालन संबंधी बाधाओं सहित सभी प्रासंगिक कारकों का उचित ध्यान रखेगा।
बशर्ते कि 1 [इस प्रकार की खुली पहुंच राज्य आयोग द्वारा निर्धारित किए जाने वाले पहिए चलाने के शुल्क के अतिरिक्त अधिभार के भुगतान पर अनुमत होगी]
इसके अलावा, यह भी प्रावधान है कि इस प्रकार के अधिभार का उपयोग वितरण लाइसेंसधारी के आपूर्ति क्षेत्र के भीतर वर्तमान स्तर की क्रॉस सब्सिडी की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जाएगा:
इसके अलावा, ऐसे अधिभार और क्रॉस सब्सिडी को राज्य आयोग द्वारा निर्दिष्ट तरीके से उत्तरोत्तर कम किया जाएगा:
इसके अलावा, यदि किसी व्यक्ति ने अपने स्वयं के उपयोग के लिए बिजली पहुंचाने हेतु एक कैप्टिव जनरेटिंग प्लांट स्थापित किया है और उसे खुली पहुंच प्रदान की जाती है, तो ऐसे मामले में ऐसा अधिभार लागू नहीं होगा।
3. [यह भी प्रावधान है कि राज्य आयोग, विद्युत (संशोधन) अधिनियम, 2003 के प्रारंभ होने की तिथि से पांच वर्ष के भीतर, विनियमों द्वारा उन सभी उपभोक्ताओं को बिजली की खुली पहुंच प्रदान करेगा जिन्हें बिजली की आपूर्ति की आवश्यकता है जहां किसी भी समय उपलब्ध कराई जाने वाली अधिकतम बिजली एक मेगावाट से अधिक हो।]
(3) जहां कोई व्यक्ति, जिसका परिसर किसी वितरण लाइसेंसधारी के आपूर्ति क्षेत्र के भीतर स्थित है, (नियुक्त तिथि से पहले बिजली वितरण के व्यवसाय में संलग्न स्थानीय प्राधिकरण न हो) किसी उत्पादन कंपनी या ऐसे वितरण लाइसेंसधारी के अलावा किसी अन्य लाइसेंसधारी से बिजली की आपूर्ति चाहता है, तो वह व्यक्ति नोटिस द्वारा वितरण लाइसेंसधारी से राज्य आयोग द्वारा बनाए गए विनियमों के अनुसार ऐसी बिजली की आपूर्ति करने की मांग कर सकता है और ऐसी आपूर्ति के संबंध में वितरण लाइसेंसधारी के कर्तव्य गैर-भेदभावपूर्ण खुली पहुंच प्रदान करने वाले एक सामान्य वाहक के होंगे।
(4) जहां राज्य आयोग किसी उपभोक्ता या उपभोक्ताओं के वर्ग को उसके आपूर्ति क्षेत्र के वितरण लाइसेंसधारी के अलावा किसी अन्य व्यक्ति से बिजली की आपूर्ति प्राप्त करने की अनुमति देता है, तो ऐसा उपभोक्ता व्हीलिंग के शुल्क पर अतिरिक्त अधिभार का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा, जैसा कि राज्य आयोग द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है, ताकि आपूर्ति करने के अपने दायित्व से उत्पन्न होने वाली वितरण लाइसेंसधारी की निश्चित लागत को पूरा किया जा सके।
(5) प्रत्येक वितरण लाइसेंसधारी, नियुक्त तिथि या लाइसेंस प्रदान करने की तिथि, जो भी पहले हो, से छह महीने के भीतर, राज्य आयोग द्वारा निर्दिष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार उपभोक्ताओं की शिकायतों के निवारण के लिए एक मंच स्थापित करेगा।
(6) उपधारा (5) के तहत अपनी शिकायतों के निवारण न होने से पीड़ित कोई भी उपभोक्ता, राज्य आयोग द्वारा नियुक्त या नामित लोकपाल के नाम से जाने जाने वाले प्राधिकरण को अपनी शिकायत के निवारण के लिए अभ्यावेदन कर सकता है।
(7) लोकपाल उपभोक्ता की शिकायत का निपटारा ऐसे समय में और ऐसे तरीके से करेगा जैसा कि राज्य आयोग द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है।
(8) उपधारा (5) , (6) और (7) के प्रावधान उन अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेंगे जो उपभोक्ता को उन उपधाराओं द्वारा प्रदत्त अधिकारों के अतिरिक्त प्राप्त हो सकते हैं।
(2) राज्य आयोग, नियुक्ति तिथि से एक वर्ष के भीतर, ऐसे चरणों में और ऐसी शर्तों (जिनमें क्रॉस सब्सिडी और अन्य परिचालन संबंधी बाधाएं शामिल हैं) के अधीन खुली पहुंच लागू करेगा, जैसा कि उसके द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है, और क्रमिक चरणों में खुली पहुंच की सीमा निर्दिष्ट करते समय और पहिए चलाने के शुल्क निर्धारित करते समय, वह क्रॉस सब्सिडी और अन्य परिचालन संबंधी बाधाओं सहित सभी प्रासंगिक कारकों का उचित ध्यान रखेगा।
बशर्ते कि 1 [इस प्रकार की खुली पहुंच राज्य आयोग द्वारा निर्धारित किए जाने वाले पहिए चलाने के शुल्क के अतिरिक्त अधिभार के भुगतान पर अनुमत होगी]
इसके अलावा, यह भी प्रावधान है कि इस प्रकार के अधिभार का उपयोग वितरण लाइसेंसधारी के आपूर्ति क्षेत्र के भीतर वर्तमान स्तर की क्रॉस सब्सिडी की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जाएगा:
इसके अलावा, ऐसे अधिभार और क्रॉस सब्सिडी को राज्य आयोग द्वारा निर्दिष्ट तरीके से उत्तरोत्तर कम किया जाएगा:
इसके अलावा, यदि किसी व्यक्ति ने अपने स्वयं के उपयोग के लिए बिजली पहुंचाने हेतु एक कैप्टिव जनरेटिंग प्लांट स्थापित किया है और उसे खुली पहुंच प्रदान की जाती है, तो ऐसे मामले में ऐसा अधिभार लागू नहीं होगा।
3. [यह भी प्रावधान है कि राज्य आयोग, विद्युत (संशोधन) अधिनियम, 2003 के प्रारंभ होने की तिथि से पांच वर्ष के भीतर, विनियमों द्वारा उन सभी उपभोक्ताओं को बिजली की खुली पहुंच प्रदान करेगा जिन्हें बिजली की आपूर्ति की आवश्यकता है जहां किसी भी समय उपलब्ध कराई जाने वाली अधिकतम बिजली एक मेगावाट से अधिक हो।]
(3) जहां कोई व्यक्ति, जिसका परिसर किसी वितरण लाइसेंसधारी के आपूर्ति क्षेत्र के भीतर स्थित है, (नियुक्त तिथि से पहले बिजली वितरण के व्यवसाय में संलग्न स्थानीय प्राधिकरण न हो) किसी उत्पादन कंपनी या ऐसे वितरण लाइसेंसधारी के अलावा किसी अन्य लाइसेंसधारी से बिजली की आपूर्ति चाहता है, तो वह व्यक्ति नोटिस द्वारा वितरण लाइसेंसधारी से राज्य आयोग द्वारा बनाए गए विनियमों के अनुसार ऐसी बिजली की आपूर्ति करने की मांग कर सकता है और ऐसी आपूर्ति के संबंध में वितरण लाइसेंसधारी के कर्तव्य गैर-भेदभावपूर्ण खुली पहुंच प्रदान करने वाले एक सामान्य वाहक के होंगे।
(4) जहां राज्य आयोग किसी उपभोक्ता या उपभोक्ताओं के वर्ग को उसके आपूर्ति क्षेत्र के वितरण लाइसेंसधारी के अलावा किसी अन्य व्यक्ति से बिजली की आपूर्ति प्राप्त करने की अनुमति देता है, तो ऐसा उपभोक्ता व्हीलिंग के शुल्क पर अतिरिक्त अधिभार का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा, जैसा कि राज्य आयोग द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है, ताकि आपूर्ति करने के अपने दायित्व से उत्पन्न होने वाली वितरण लाइसेंसधारी की निश्चित लागत को पूरा किया जा सके।
(5) प्रत्येक वितरण लाइसेंसधारी, नियुक्त तिथि या लाइसेंस प्रदान करने की तिथि, जो भी पहले हो, से छह महीने के भीतर, राज्य आयोग द्वारा निर्दिष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार उपभोक्ताओं की शिकायतों के निवारण के लिए एक मंच स्थापित करेगा।
(6) उपधारा (5) के तहत अपनी शिकायतों के निवारण न होने से पीड़ित कोई भी उपभोक्ता, राज्य आयोग द्वारा नियुक्त या नामित लोकपाल के नाम से जाने जाने वाले प्राधिकरण को अपनी शिकायत के निवारण के लिए अभ्यावेदन कर सकता है।
(7) लोकपाल उपभोक्ता की शिकायत का निपटारा ऐसे समय में और ऐसे तरीके से करेगा जैसा कि राज्य आयोग द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है।
(8) उपधारा (5) , (6) और (7) के प्रावधान उन अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेंगे जो उपभोक्ता को उन उपधाराओं द्वारा प्रदत्त अधिकारों के अतिरिक्त प्राप्त हो सकते हैं।
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