Electricity Act 151अध्याय XIV · Offences and Penalties
धारा 151 · अपराधों का संज्ञान।
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इस अधिनियम के तहत दंडनीय किसी भी अपराध का संज्ञान कोई भी न्यायालय तब तक नहीं लेगा जब तक कि उपयुक्त सरकार या उपयुक्त आयोग या उनके द्वारा अधिकृत किसी अधिकारी या मुख्य विद्युत निरीक्षक या विद्युत निरीक्षक या लाइसेंसधारी या उत्पादन कंपनी द्वारा, जैसा भी मामला हो, इस उद्देश्य के लिए लिखित शिकायत न की गई हो।
1. बशर्ते कि न्यायालय दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 173 के तहत पुलिस अधिकारी द्वारा दर्ज की गई रिपोर्ट पर भी इस अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध का संज्ञान ले सकता है:
इसके अलावा, धारा 153 के तहत गठित विशेष न्यायालय, अभियुक्त को मुकदमे के लिए उसके समक्ष प्रस्तुत किए बिना भी किसी अपराध का संज्ञान लेने के लिए सक्षम होगा।
राज्य संशोधन
कर्नाटक
धारा 151 का प्रतिस्थापन.-- विद्युत अधिनियम, 2003 (केंद्रीय अधिनियम 36 ऑफ 2003) की धारा 151 के स्थान पर निम्नलिखित को प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:--
"151. अभियोग की शुरुआत.-- इस अधिनियम या इसके अंतर्गत बनाए गए या जारी किए गए किसी नियम, विनियम, लाइसेंस या आदेश के तहत किसी अपराध के लिए किसी व्यक्ति के विरुद्ध अभियोग तब तक शुरू नहीं किया जाएगा, जब तक कि राज्य सरकार या अधिनियम के तहत लाइसेंसधारी या उत्पादन कंपनी या राज्य सरकार या लाइसेंसधारी या उत्पादन कंपनी द्वारा इस संबंध में अधिकृत अधिकारी या कथित अपराध गठित करने वाले कृत्य से प्रभावित किसी व्यक्ति द्वारा ऐसा न किया जाए।"
[कर्नाटक अधिनियम 12, 2006, धारा 2 देखें ]
महाराष्ट्र
अधिनियम 36, 2003 की धारा 151 का प्रतिस्थापन।--- महाराष्ट्र राज्य पर लागू होने वाले विद्युत अधिनियम, 2003 (36, 2003) की धारा 151 के स्थान पर (जिसे इसके बाद "प्रमुख अधिनियम" कहा गया है), निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्:--
151. अपराधों का संज्ञान.-- कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध का संज्ञान तब तक नहीं लेगा, जब तक कि,--
(क) उपयुक्त सरकार या उपयुक्त आयोग या उनके द्वारा अधिकृत किसी अधिकारी या मुख्य विद्युत निरीक्षक या विद्युत निरीक्षक या लाइसेंसधारी या उत्पादन कंपनी द्वारा, जैसा भी मामला हो, इस उद्देश्य के लिए लिखित शिकायत पर; या
(ख) अपराध गठित करने वाले तथ्यों की पुलिस रिपोर्ट पर:
बशर्ते कि ऐसी पुलिस रिपोर्ट प्रथम सूचना रिपोर्ट पर आधारित हो, जो उस व्यक्ति द्वारा दर्ज की गई हो जिसे खंड (क) के तहत शिकायत दर्ज करने का अधिकार है।
[महाराष्ट्र अधिनियम 36, 2005, धारा 2 देखें ]
1. बशर्ते कि न्यायालय दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 173 के तहत पुलिस अधिकारी द्वारा दर्ज की गई रिपोर्ट पर भी इस अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध का संज्ञान ले सकता है:
इसके अलावा, धारा 153 के तहत गठित विशेष न्यायालय, अभियुक्त को मुकदमे के लिए उसके समक्ष प्रस्तुत किए बिना भी किसी अपराध का संज्ञान लेने के लिए सक्षम होगा।
राज्य संशोधन
कर्नाटक
धारा 151 का प्रतिस्थापन.-- विद्युत अधिनियम, 2003 (केंद्रीय अधिनियम 36 ऑफ 2003) की धारा 151 के स्थान पर निम्नलिखित को प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:--
"151. अभियोग की शुरुआत.-- इस अधिनियम या इसके अंतर्गत बनाए गए या जारी किए गए किसी नियम, विनियम, लाइसेंस या आदेश के तहत किसी अपराध के लिए किसी व्यक्ति के विरुद्ध अभियोग तब तक शुरू नहीं किया जाएगा, जब तक कि राज्य सरकार या अधिनियम के तहत लाइसेंसधारी या उत्पादन कंपनी या राज्य सरकार या लाइसेंसधारी या उत्पादन कंपनी द्वारा इस संबंध में अधिकृत अधिकारी या कथित अपराध गठित करने वाले कृत्य से प्रभावित किसी व्यक्ति द्वारा ऐसा न किया जाए।"
[कर्नाटक अधिनियम 12, 2006, धारा 2 देखें ]
महाराष्ट्र
अधिनियम 36, 2003 की धारा 151 का प्रतिस्थापन।--- महाराष्ट्र राज्य पर लागू होने वाले विद्युत अधिनियम, 2003 (36, 2003) की धारा 151 के स्थान पर (जिसे इसके बाद "प्रमुख अधिनियम" कहा गया है), निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्:--
151. अपराधों का संज्ञान.-- कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध का संज्ञान तब तक नहीं लेगा, जब तक कि,--
(क) उपयुक्त सरकार या उपयुक्त आयोग या उनके द्वारा अधिकृत किसी अधिकारी या मुख्य विद्युत निरीक्षक या विद्युत निरीक्षक या लाइसेंसधारी या उत्पादन कंपनी द्वारा, जैसा भी मामला हो, इस उद्देश्य के लिए लिखित शिकायत पर; या
(ख) अपराध गठित करने वाले तथ्यों की पुलिस रिपोर्ट पर:
बशर्ते कि ऐसी पुलिस रिपोर्ट प्रथम सूचना रिपोर्ट पर आधारित हो, जो उस व्यक्ति द्वारा दर्ज की गई हो जिसे खंड (क) के तहत शिकायत दर्ज करने का अधिकार है।
[महाराष्ट्र अधिनियम 36, 2005, धारा 2 देखें ]
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