Electricity Act 89अध्याय X · Appropriate Commission–Other provisions
धारा 89 · सदस्यों के कार्यकाल और सेवा की शर्तें।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) अध्यक्ष या अन्य सदस्य अपने पद ग्रहण करने की तिथि से पांच वर्ष की अवधि के लिए पद पर बने रहेंगे:
बशर्ते कि केंद्रीय आयोग या राज्य आयोग के अध्यक्ष या अन्य सदस्य उसी पद पर पुनः नियुक्त होने के पात्र नहीं होंगे जिस पद पर वे पहले अध्यक्ष या सदस्य के रूप में रह चुके हों:
इसके अलावा, कोई भी अध्यक्ष या सदस्य पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद पद धारण नहीं करेगा।
(2) अध्यक्ष और सदस्यों का वेतन, भत्ते और सेवा की अन्य शर्तें एवं नियम ऐसे होंगे जो उपयुक्त सरकार द्वारा निर्धारित किए जाएं:
बशर्ते कि नियुक्ति के बाद सदस्यों के वेतन, भत्ते और सेवा की अन्य शर्तों और नियमों में उनके नुकसान के लिए कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
(3) प्रत्येक सदस्य अपने पद का कार्यभार ग्रहण करने से पहले, निर्धारित प्रपत्र, तरीके और प्राधिकारी के समक्ष पद और गोपनीयता की शपथ लेगा और उस पर हस्ताक्षर करेगा।
(4) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, कोई सदस्य—=
(क) उपयुक्त सरकार को कम से कम तीन महीने का लिखित नोटिस देकर अपने पद का त्याग करना; या
(ख) धारा 90 के प्रावधानों के अनुसार उसे उसके पद से हटा दिया जाए।
(5) कोई भी सदस्य जब अपना पद छोड़ देता है तो--
(क) पद छोड़ने की तिथि से दो वर्ष की अवधि तक कोई वाणिज्यिक रोजगार स्वीकार न करना; और
(ख) केंद्रीय आयोग या किसी राज्य आयोग के समक्ष किसी भी व्यक्ति का किसी भी प्रकार से प्रतिनिधित्व न करना।
स्पष्टीकरण .--इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए "वाणिज्यिक रोजगार" का अर्थ किसी ऐसे संगठन में किसी भी क्षमता में रोजगार है जो उपयुक्त आयोग के समक्ष कार्यवाही में पक्षकार रहा हो, या विद्युत उद्योग में व्यापार, वाणिज्यिक, औद्योगिक या वित्तीय व्यवसाय में लगे किसी व्यक्ति के अधीन या उसकी एजेंसी के माध्यम से किसी भी क्षमता में रोजगार है, और इसमें किसी कंपनी का निदेशक, किसी फर्म का भागीदार, या स्वतंत्र रूप से या किसी फर्म के भागीदार के रूप में अपना व्यवसाय स्थापित करने वाला व्यक्ति, या सलाहकार या परामर्शदाता शामिल है।
राज्य संशोधन
आंध्र प्रदेश
धारा 89 की उपधारा (1) में, मौजूदा दो परंतुकों के स्थान पर, आंध्र प्रदेश राज्य के संबंध में, निम्नलिखित परंतुक प्रतिस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्:--
बशर्ते कि राज्य आयोग के अध्यक्ष या अन्य सदस्य उसी पद पर पुनः नियुक्ति के पात्र होंगे और वे पुनः नियुक्ति से पहले पहले से धारित अवधि सहित पांच वर्ष की अवधि पूरी होने तक उस पद पर बने रहेंगे।
इसके अलावा, कोई भी अध्यक्ष या सदस्य सत्तर वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद पद धारण नहीं करेगा।
[आंध्र प्रदेश अधिनियम 11, 2016, धारा 3 (दिनांक 14-4-2016 से प्रभावी )]
बशर्ते कि केंद्रीय आयोग या राज्य आयोग के अध्यक्ष या अन्य सदस्य उसी पद पर पुनः नियुक्त होने के पात्र नहीं होंगे जिस पद पर वे पहले अध्यक्ष या सदस्य के रूप में रह चुके हों:
इसके अलावा, कोई भी अध्यक्ष या सदस्य पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद पद धारण नहीं करेगा।
(2) अध्यक्ष और सदस्यों का वेतन, भत्ते और सेवा की अन्य शर्तें एवं नियम ऐसे होंगे जो उपयुक्त सरकार द्वारा निर्धारित किए जाएं:
बशर्ते कि नियुक्ति के बाद सदस्यों के वेतन, भत्ते और सेवा की अन्य शर्तों और नियमों में उनके नुकसान के लिए कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
(3) प्रत्येक सदस्य अपने पद का कार्यभार ग्रहण करने से पहले, निर्धारित प्रपत्र, तरीके और प्राधिकारी के समक्ष पद और गोपनीयता की शपथ लेगा और उस पर हस्ताक्षर करेगा।
(4) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, कोई सदस्य—=
(क) उपयुक्त सरकार को कम से कम तीन महीने का लिखित नोटिस देकर अपने पद का त्याग करना; या
(ख) धारा 90 के प्रावधानों के अनुसार उसे उसके पद से हटा दिया जाए।
(5) कोई भी सदस्य जब अपना पद छोड़ देता है तो--
(क) पद छोड़ने की तिथि से दो वर्ष की अवधि तक कोई वाणिज्यिक रोजगार स्वीकार न करना; और
(ख) केंद्रीय आयोग या किसी राज्य आयोग के समक्ष किसी भी व्यक्ति का किसी भी प्रकार से प्रतिनिधित्व न करना।
स्पष्टीकरण .--इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए "वाणिज्यिक रोजगार" का अर्थ किसी ऐसे संगठन में किसी भी क्षमता में रोजगार है जो उपयुक्त आयोग के समक्ष कार्यवाही में पक्षकार रहा हो, या विद्युत उद्योग में व्यापार, वाणिज्यिक, औद्योगिक या वित्तीय व्यवसाय में लगे किसी व्यक्ति के अधीन या उसकी एजेंसी के माध्यम से किसी भी क्षमता में रोजगार है, और इसमें किसी कंपनी का निदेशक, किसी फर्म का भागीदार, या स्वतंत्र रूप से या किसी फर्म के भागीदार के रूप में अपना व्यवसाय स्थापित करने वाला व्यक्ति, या सलाहकार या परामर्शदाता शामिल है।
राज्य संशोधन
आंध्र प्रदेश
धारा 89 की उपधारा (1) में, मौजूदा दो परंतुकों के स्थान पर, आंध्र प्रदेश राज्य के संबंध में, निम्नलिखित परंतुक प्रतिस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्:--
बशर्ते कि राज्य आयोग के अध्यक्ष या अन्य सदस्य उसी पद पर पुनः नियुक्ति के पात्र होंगे और वे पुनः नियुक्ति से पहले पहले से धारित अवधि सहित पांच वर्ष की अवधि पूरी होने तक उस पद पर बने रहेंगे।
इसके अलावा, कोई भी अध्यक्ष या सदस्य सत्तर वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद पद धारण नहीं करेगा।
[आंध्र प्रदेश अधिनियम 11, 2016, धारा 3 (दिनांक 14-4-2016 से प्रभावी )]
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