Electricity Act 185अध्याय XVIII · Miscellaneous
धारा 185 · निरसन और बचत।
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(1) इस अधिनियम में अन्यथा प्रावधान किए जाने के अलावा, भारतीय विद्युत अधिनियम, 1910 (1910 का 9), विद्युत (आपूर्ति) अधिनियम, 1948 (1948 का 54) और विद्युत नियामक आयोग अधिनियम, 1998 (998 का 14) को इसके द्वारा निरस्त किया जाता है।
(2) ऐसे निरसन के बावजूद,--
(क) निरस्त कानूनों के तहत किया गया कोई भी कार्य या की गई कोई भी कार्रवाई, जिसमें कोई नियम, अधिसूचना, निरीक्षण, आदेश या नोटिस जारी करना या कोई नियुक्ति, पुष्टि या घोषणा करना या कोई लाइसेंस, अनुमति, प्राधिकरण या छूट देना या कोई दस्तावेज या उपकरण निष्पादित करना या कोई निर्देश देना शामिल है, इस अधिनियम के प्रावधानों के साथ असंगत न होने की सीमा तक, इस अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत किया गया या लिया गया माना जाएगा;
(ख) भारतीय विद्युत अधिनियम, 1910 (1910 का 9) की धारा 12 से 18 में निहित प्रावधान और उसके अंतर्गत बनाए गए नियम तब तक प्रभावी रहेंगे जब तक इस अधिनियम की धारा 67 से 69 के अंतर्गत नियम नहीं बनाए जाते;
(ग) भारतीय विद्युत अधिनियम, 1910 (1910 का 9) की धारा 37 के तहत बनाए गए भारतीय विद्युत नियम, 1956, जैसा कि ऐसे निरसन से पहले था, इस अधिनियम की धारा 53 के तहत विनियम बनाए जाने तक लागू रहेंगे;
(घ) विद्युत (आपूर्ति) अधिनियम, 1948 (1948 का 54) की धारा 69 की उपधारा (1) के तहत बनाए गए सभी नियम तब तक प्रभावी रहेंगे जब तक कि ऐसे नियमों को निरस्त या संशोधित नहीं कर दिया जाता, जैसा भी मामला हो;
(ई) इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले, अनुसूची में निर्दिष्ट अधिनियमों के तहत किसी राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए सभी निर्देश उस अवधि के लिए लागू रहेंगे जिसके लिए राज्य सरकार द्वारा ऐसे निर्देश जारी किए गए थे।
(3) अनुसूची में निर्दिष्ट अधिनियमों के प्रावधान, जो इस अधिनियम के प्रावधानों के साथ असंगत नहीं हैं, उन राज्यों पर लागू होंगे जिनमें ऐसे अधिनियम लागू होते हैं।
(4) केंद्र सरकार, जब भी आवश्यक समझे, अधिसूचना द्वारा अनुसूची में संशोधन कर सकती है।
(5) उपधारा (2) में अन्यथा प्रावधान किए जाने के अलावा, उस धारा में विशिष्ट मामलों का उल्लेख, निरसन के प्रभाव के संबंध में सामान्य खंड अधिनियम, 1897 (10 ऑफ 1897) की धारा 6 के सामान्य अनुप्रयोग पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
(2) ऐसे निरसन के बावजूद,--
(क) निरस्त कानूनों के तहत किया गया कोई भी कार्य या की गई कोई भी कार्रवाई, जिसमें कोई नियम, अधिसूचना, निरीक्षण, आदेश या नोटिस जारी करना या कोई नियुक्ति, पुष्टि या घोषणा करना या कोई लाइसेंस, अनुमति, प्राधिकरण या छूट देना या कोई दस्तावेज या उपकरण निष्पादित करना या कोई निर्देश देना शामिल है, इस अधिनियम के प्रावधानों के साथ असंगत न होने की सीमा तक, इस अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत किया गया या लिया गया माना जाएगा;
(ख) भारतीय विद्युत अधिनियम, 1910 (1910 का 9) की धारा 12 से 18 में निहित प्रावधान और उसके अंतर्गत बनाए गए नियम तब तक प्रभावी रहेंगे जब तक इस अधिनियम की धारा 67 से 69 के अंतर्गत नियम नहीं बनाए जाते;
(ग) भारतीय विद्युत अधिनियम, 1910 (1910 का 9) की धारा 37 के तहत बनाए गए भारतीय विद्युत नियम, 1956, जैसा कि ऐसे निरसन से पहले था, इस अधिनियम की धारा 53 के तहत विनियम बनाए जाने तक लागू रहेंगे;
(घ) विद्युत (आपूर्ति) अधिनियम, 1948 (1948 का 54) की धारा 69 की उपधारा (1) के तहत बनाए गए सभी नियम तब तक प्रभावी रहेंगे जब तक कि ऐसे नियमों को निरस्त या संशोधित नहीं कर दिया जाता, जैसा भी मामला हो;
(ई) इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले, अनुसूची में निर्दिष्ट अधिनियमों के तहत किसी राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए सभी निर्देश उस अवधि के लिए लागू रहेंगे जिसके लिए राज्य सरकार द्वारा ऐसे निर्देश जारी किए गए थे।
(3) अनुसूची में निर्दिष्ट अधिनियमों के प्रावधान, जो इस अधिनियम के प्रावधानों के साथ असंगत नहीं हैं, उन राज्यों पर लागू होंगे जिनमें ऐसे अधिनियम लागू होते हैं।
(4) केंद्र सरकार, जब भी आवश्यक समझे, अधिसूचना द्वारा अनुसूची में संशोधन कर सकती है।
(5) उपधारा (2) में अन्यथा प्रावधान किए जाने के अलावा, उस धारा में विशिष्ट मामलों का उल्लेख, निरसन के प्रभाव के संबंध में सामान्य खंड अधिनियम, 1897 (10 ऑफ 1897) की धारा 6 के सामान्य अनुप्रयोग पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
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