The Companies Act, 2013 90अध्याय VII · Management and Administration
धारा 90 · किसी कंपनी में महत्वपूर्ण लाभकारी मालिकों का रजिस्टर।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [90. किसी कंपनी में महत्वपूर्ण लाभकारी स्वामियों का रजिस्टर.-- (1) प्रत्येक व्यक्ति, जो अकेले या साथ मिलकर, या एक या एक से अधिक व्यक्तियों या ट्रस्ट के माध्यम से, जिसमें ट्रस्ट और भारत के बाहर निवासी व्यक्ति शामिल हैं, किसी कंपनी के शेयरों में कम से कम पच्चीस प्रतिशत या ऐसा अन्य प्रतिशत, जैसा निर्धारित किया जा सकता है, लाभकारी हित रखता है, या कंपनी पर धारा 2 के खंड (27) में परिभाषित महत्वपूर्ण प्रभाव या नियंत्रण का प्रयोग करने का अधिकार रखता है, या वास्तव में उसका प्रयोग करता है (जिसे यहां "महत्वपूर्ण लाभकारी स्वामी" कहा गया है), कंपनी को अपने हित की प्रकृति और अन्य विवरणों को निर्दिष्ट करते हुए, लाभकारी हित या अधिकारों के अधिग्रहण और उसमें किसी भी परिवर्तन के ऐसे तरीके से और ऐसी अवधि के भीतर घोषणा करेगा, जैसा निर्धारित किया जा सकता है:
बशर्ते कि केंद्र सरकार ऐसे व्यक्तियों का एक या एक से अधिक वर्ग निर्धारित कर सकती है जिन्हें इस उपधारा के अंतर्गत घोषणा करने की आवश्यकता नहीं होगी।
(2) प्रत्येक कंपनी उपधारा (1) के अधीन व्यक्तियों द्वारा घोषित हित तथा उसमें हुए परिवर्तनों का एक रजिस्टर रखेगी, जिसमें व्यक्ति का नाम, उसकी जन्मतिथि, पता, कंपनी में स्वामित्व का विवरण और ऐसे अन्य विवरण शामिल होंगे जो निर्धारित किए जा सकते हैं।
(3) उपधारा (2) के तहत रखा गया रजिस्टर कंपनी के किसी भी सदस्य द्वारा निर्धारित शुल्क के भुगतान पर निरीक्षण के लिए खुला रहेगा।
(4) प्रत्येक कंपनी रजिस्ट्रार के पास कंपनी के महत्वपूर्ण लाभकारी मालिकों और उनमें हुए परिवर्तनों का विवरण दाखिल करेगी, जिसमें नाम, पते और अन्य विवरण शामिल होंगे, जैसा कि निर्धारित समय के भीतर, ऐसे प्रारूप और तरीके से जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
2 [(4ए) प्रत्येक कंपनी कंपनी के संबंध में महत्वपूर्ण लाभकारी स्वामी व्यक्ति की पहचान करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी और उसे इस धारा के प्रावधानों का पालन करने के लिए बाध्य करेगी।]
(5) कोई कंपनी निर्धारित तरीके से किसी भी व्यक्ति (चाहे वह कंपनी का सदस्य हो या न हो) को सूचना देगी, जिसके बारे में कंपनी को जानकारी हो या जिसके बारे में कंपनी को यह मानने का उचित कारण हो—
(क) कंपनी का एक महत्वपूर्ण लाभकारी स्वामी होना;
(ख) किसी महत्वपूर्ण लाभकारी स्वामी या ऐसे किसी अन्य व्यक्ति की पहचान का ज्ञान होना जिसे ऐसा ज्ञान होने की संभावना हो; या
(ग) नोटिस जारी होने की तिथि से ठीक पहले के तीन वर्षों के दौरान किसी भी समय कंपनी का एक महत्वपूर्ण लाभकारी मालिक रहा हो।
और जो इस धारा के तहत आवश्यक रूप से कंपनी के साथ एक महत्वपूर्ण लाभकारी स्वामी के रूप में पंजीकृत नहीं है।
(6) उपधारा (5) के तहत नोटिस द्वारा मांगी गई जानकारी संबंधित व्यक्ति द्वारा नोटिस की तारीख से तीस दिनों की अवधि के भीतर दी जाएगी।
(7) कंपनी निम्नलिखित कार्य करेगी,--
(क) जहां वह व्यक्ति कंपनी को नोटिस में निर्दिष्ट समय के भीतर अपेक्षित जानकारी देने में विफल रहता है; या
(ख) जहां दी गई जानकारी संतोषजनक न हो,
नोटिस में निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के पंद्रह दिनों के भीतर न्यायाधिकरण में आवेदन करें, जिसमें यह आदेश देने का अनुरोध किया जाए कि विचाराधीन शेयरों पर हित के हस्तांतरण, शेयरों से जुड़े सभी अधिकारों के निलंबन और ऐसे अन्य मामलों के संबंध में प्रतिबंध लगाए जाएं, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(8) उपधारा (7) के तहत किए गए किसी भी आवेदन पर, न्यायाधिकरण संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देने के बाद, आवेदन प्राप्त होने के साठ दिनों के भीतर या ऐसी अन्य अवधि के भीतर, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है, शेयरों से जुड़े अधिकारों को प्रतिबंधित करने का ऐसा आदेश दे सकता है।
3 [(9) न्यायाधिकरण के आदेश से पीड़ित कंपनी या व्यक्ति, ऐसे आदेश की तिथि से एक वर्ष की अवधि के भीतर उप-धारा (8) के तहत लगाए गए प्रतिबंधों में छूट या उन्हें हटाने के लिए न्यायाधिकरण को आवेदन कर सकता है:
बशर्ते कि यदि उपधारा (8) के तहत आदेश की तिथि से एक वर्ष की अवधि के भीतर ऐसा कोई आवेदन दाखिल नहीं किया गया है, तो ऐसे शेयरों को बिना किसी प्रतिबंध के, धारा 125 की उपधारा (5) के तहत गठित प्राधिकरण को, निर्धारित तरीके से हस्तांतरित कर दिया जाएगा;]
4 [(9ए) केंद्र सरकार इस धारा के प्रयोजनों के लिए नियम बना सकती है।]
5 [(10) यदि कोई व्यक्ति उपधारा (1) के अधीन अपेक्षित घोषणा करने में विफल रहता है, तो वह पचास हजार रुपये के जुर्माने का हकदार होगा और निरंतर विफलता की स्थिति में, पहली विफलता के बाद प्रत्येक दिन के लिए एक हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा, जिस दौरान ऐसी विफलता जारी रहती है, अधिकतम दो लाख रुपये तक।]
6 [(11) यदि कोई कंपनी, जिसे उपधारा (2) के अधीन रजिस्टर बनाए रखने और उपधारा (4) के अधीन सूचना दाखिल करने या उपधारा (4ए) के अधीन आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता है, ऐसा करने में विफल रहती है या उसमें दिए गए प्रावधानों के अनुसार निरीक्षण से इनकार करती है, तो कंपनी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और निरंतर विफलता की स्थिति में, पहली विफलता के बाद प्रत्येक दिन के लिए पांच सौ रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा, जो अधिकतम पांच लाख रुपये तक सीमित होगा। कंपनी का प्रत्येक अधिकारी जो दोषी है, उस पर पच्चीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और निरंतर विफलता की स्थिति में, पहली विफलता के बाद प्रत्येक दिन के लिए दो सौ रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा, जो अधिकतम एक लाख रुपये तक सीमित होगा।]
(12) यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर इस धारा के अधीन की गई घोषणा में कोई झूठी या असत्य जानकारी देता है या किसी ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी को छुपाता है जिसकी उसे जानकारी है, तो वह धारा 447 के तहत कार्रवाई के लिए उत्तरदायी होगा।]
बशर्ते कि केंद्र सरकार ऐसे व्यक्तियों का एक या एक से अधिक वर्ग निर्धारित कर सकती है जिन्हें इस उपधारा के अंतर्गत घोषणा करने की आवश्यकता नहीं होगी।
(2) प्रत्येक कंपनी उपधारा (1) के अधीन व्यक्तियों द्वारा घोषित हित तथा उसमें हुए परिवर्तनों का एक रजिस्टर रखेगी, जिसमें व्यक्ति का नाम, उसकी जन्मतिथि, पता, कंपनी में स्वामित्व का विवरण और ऐसे अन्य विवरण शामिल होंगे जो निर्धारित किए जा सकते हैं।
(3) उपधारा (2) के तहत रखा गया रजिस्टर कंपनी के किसी भी सदस्य द्वारा निर्धारित शुल्क के भुगतान पर निरीक्षण के लिए खुला रहेगा।
(4) प्रत्येक कंपनी रजिस्ट्रार के पास कंपनी के महत्वपूर्ण लाभकारी मालिकों और उनमें हुए परिवर्तनों का विवरण दाखिल करेगी, जिसमें नाम, पते और अन्य विवरण शामिल होंगे, जैसा कि निर्धारित समय के भीतर, ऐसे प्रारूप और तरीके से जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
2 [(4ए) प्रत्येक कंपनी कंपनी के संबंध में महत्वपूर्ण लाभकारी स्वामी व्यक्ति की पहचान करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी और उसे इस धारा के प्रावधानों का पालन करने के लिए बाध्य करेगी।]
(5) कोई कंपनी निर्धारित तरीके से किसी भी व्यक्ति (चाहे वह कंपनी का सदस्य हो या न हो) को सूचना देगी, जिसके बारे में कंपनी को जानकारी हो या जिसके बारे में कंपनी को यह मानने का उचित कारण हो—
(क) कंपनी का एक महत्वपूर्ण लाभकारी स्वामी होना;
(ख) किसी महत्वपूर्ण लाभकारी स्वामी या ऐसे किसी अन्य व्यक्ति की पहचान का ज्ञान होना जिसे ऐसा ज्ञान होने की संभावना हो; या
(ग) नोटिस जारी होने की तिथि से ठीक पहले के तीन वर्षों के दौरान किसी भी समय कंपनी का एक महत्वपूर्ण लाभकारी मालिक रहा हो।
और जो इस धारा के तहत आवश्यक रूप से कंपनी के साथ एक महत्वपूर्ण लाभकारी स्वामी के रूप में पंजीकृत नहीं है।
(6) उपधारा (5) के तहत नोटिस द्वारा मांगी गई जानकारी संबंधित व्यक्ति द्वारा नोटिस की तारीख से तीस दिनों की अवधि के भीतर दी जाएगी।
(7) कंपनी निम्नलिखित कार्य करेगी,--
(क) जहां वह व्यक्ति कंपनी को नोटिस में निर्दिष्ट समय के भीतर अपेक्षित जानकारी देने में विफल रहता है; या
(ख) जहां दी गई जानकारी संतोषजनक न हो,
नोटिस में निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के पंद्रह दिनों के भीतर न्यायाधिकरण में आवेदन करें, जिसमें यह आदेश देने का अनुरोध किया जाए कि विचाराधीन शेयरों पर हित के हस्तांतरण, शेयरों से जुड़े सभी अधिकारों के निलंबन और ऐसे अन्य मामलों के संबंध में प्रतिबंध लगाए जाएं, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(8) उपधारा (7) के तहत किए गए किसी भी आवेदन पर, न्यायाधिकरण संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देने के बाद, आवेदन प्राप्त होने के साठ दिनों के भीतर या ऐसी अन्य अवधि के भीतर, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है, शेयरों से जुड़े अधिकारों को प्रतिबंधित करने का ऐसा आदेश दे सकता है।
3 [(9) न्यायाधिकरण के आदेश से पीड़ित कंपनी या व्यक्ति, ऐसे आदेश की तिथि से एक वर्ष की अवधि के भीतर उप-धारा (8) के तहत लगाए गए प्रतिबंधों में छूट या उन्हें हटाने के लिए न्यायाधिकरण को आवेदन कर सकता है:
बशर्ते कि यदि उपधारा (8) के तहत आदेश की तिथि से एक वर्ष की अवधि के भीतर ऐसा कोई आवेदन दाखिल नहीं किया गया है, तो ऐसे शेयरों को बिना किसी प्रतिबंध के, धारा 125 की उपधारा (5) के तहत गठित प्राधिकरण को, निर्धारित तरीके से हस्तांतरित कर दिया जाएगा;]
4 [(9ए) केंद्र सरकार इस धारा के प्रयोजनों के लिए नियम बना सकती है।]
5 [(10) यदि कोई व्यक्ति उपधारा (1) के अधीन अपेक्षित घोषणा करने में विफल रहता है, तो वह पचास हजार रुपये के जुर्माने का हकदार होगा और निरंतर विफलता की स्थिति में, पहली विफलता के बाद प्रत्येक दिन के लिए एक हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा, जिस दौरान ऐसी विफलता जारी रहती है, अधिकतम दो लाख रुपये तक।]
6 [(11) यदि कोई कंपनी, जिसे उपधारा (2) के अधीन रजिस्टर बनाए रखने और उपधारा (4) के अधीन सूचना दाखिल करने या उपधारा (4ए) के अधीन आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता है, ऐसा करने में विफल रहती है या उसमें दिए गए प्रावधानों के अनुसार निरीक्षण से इनकार करती है, तो कंपनी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और निरंतर विफलता की स्थिति में, पहली विफलता के बाद प्रत्येक दिन के लिए पांच सौ रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा, जो अधिकतम पांच लाख रुपये तक सीमित होगा। कंपनी का प्रत्येक अधिकारी जो दोषी है, उस पर पच्चीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और निरंतर विफलता की स्थिति में, पहली विफलता के बाद प्रत्येक दिन के लिए दो सौ रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा, जो अधिकतम एक लाख रुपये तक सीमित होगा।]
(12) यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर इस धारा के अधीन की गई घोषणा में कोई झूठी या असत्य जानकारी देता है या किसी ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी को छुपाता है जिसकी उसे जानकारी है, तो वह धारा 447 के तहत कार्रवाई के लिए उत्तरदायी होगा।]
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