The Companies Act, 2013 130अध्याय IX · Accounts of Companies
धारा 130 · न्यायालय या न्यायाधिकरण के आदेशों पर खातों को पुनः खोलना
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) कोई कंपनी अपने खातों की पुस्तकों को पुनः नहीं खोलेगी और न ही अपने वित्तीय विवरणों को पुनः तैयार करेगी, जब तक कि इस संबंध में केंद्र सरकार, आयकर प्राधिकरणों, प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड, किसी अन्य वैधानिक नियामक निकाय या प्राधिकरण या किसी संबंधित व्यक्ति द्वारा आवेदन न किया जाए और सक्षम न्यायालय या न्यायाधिकरण द्वारा इस आशय का आदेश न दिया जाए कि--
(i) संबंधित पूर्ववर्ती खाते कपटपूर्ण तरीके से तैयार किए गए थे; या
(ii) संबंधित अवधि के दौरान कंपनी के मामलों का कुप्रबंधन किया गया, जिससे वित्तीय विवरणों की विश्वसनीयता पर संदेह उत्पन्न होता है:
बशर्ते कि न्यायालय या न्यायाधिकरण, जैसा भी मामला हो, केंद्र सरकार, आयकर प्राधिकरणों, प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड या किसी अन्य वैधानिक नियामक निकाय या प्राधिकरण 1 [या किसी अन्य संबंधित व्यक्ति] को नोटिस देगा और इस धारा के तहत कोई आदेश पारित करने से पहले उस सरकार या प्राधिकरणों, प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड या संबंधित निकाय या प्राधिकरण 1 [या अन्य संबंधित व्यक्ति] द्वारा किए गए अभ्यावेदनों, यदि कोई हो, पर विचार करेगा।
(2) इस अधिनियम में निहित प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उपधारा (1) के अधीन संशोधित या पुनर्गठित खाते अंतिम होंगे।
2 [(3) वर्तमान वित्तीय वर्ष से ठीक पहले के आठ वित्तीय वर्षों से पहले की अवधि से संबंधित लेखा पुस्तकों को पुनः खोलने के संबंध में उप-धारा (1) के तहत कोई आदेश नहीं दिया जाएगा:
बशर्ते कि जहां केंद्र सरकार द्वारा धारा 128 की उपधारा (5) के परंतुक के तहत आठ वर्ष से अधिक अवधि के लिए लेखा-पुस्तकों को रखने का निर्देश जारी किया गया हो, तो ऐसी लंबी अवधि के भीतर लेखा-पुस्तकों को पुनः खोलने का आदेश दिया जा सकता है।]
(i) संबंधित पूर्ववर्ती खाते कपटपूर्ण तरीके से तैयार किए गए थे; या
(ii) संबंधित अवधि के दौरान कंपनी के मामलों का कुप्रबंधन किया गया, जिससे वित्तीय विवरणों की विश्वसनीयता पर संदेह उत्पन्न होता है:
बशर्ते कि न्यायालय या न्यायाधिकरण, जैसा भी मामला हो, केंद्र सरकार, आयकर प्राधिकरणों, प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड या किसी अन्य वैधानिक नियामक निकाय या प्राधिकरण 1 [या किसी अन्य संबंधित व्यक्ति] को नोटिस देगा और इस धारा के तहत कोई आदेश पारित करने से पहले उस सरकार या प्राधिकरणों, प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड या संबंधित निकाय या प्राधिकरण 1 [या अन्य संबंधित व्यक्ति] द्वारा किए गए अभ्यावेदनों, यदि कोई हो, पर विचार करेगा।
(2) इस अधिनियम में निहित प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उपधारा (1) के अधीन संशोधित या पुनर्गठित खाते अंतिम होंगे।
2 [(3) वर्तमान वित्तीय वर्ष से ठीक पहले के आठ वित्तीय वर्षों से पहले की अवधि से संबंधित लेखा पुस्तकों को पुनः खोलने के संबंध में उप-धारा (1) के तहत कोई आदेश नहीं दिया जाएगा:
बशर्ते कि जहां केंद्र सरकार द्वारा धारा 128 की उपधारा (5) के परंतुक के तहत आठ वर्ष से अधिक अवधि के लिए लेखा-पुस्तकों को रखने का निर्देश जारी किया गया हो, तो ऐसी लंबी अवधि के भीतर लेखा-पुस्तकों को पुनः खोलने का आदेश दिया जा सकता है।]
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