The Companies Act, 2013 216अध्याय XIV · Inspection, Inquiry and Investigation
धारा 216 · कंपनी के स्वामित्व की जांच।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) यदि केंद्र सरकार को ऐसा करने का कोई कारण प्रतीत होता है, तो वह कंपनी और उसकी सदस्यता से संबंधित मामलों की जांच और रिपोर्ट करने के लिए एक या अधिक निरीक्षकों को नियुक्त कर सकती है, ताकि वास्तविक व्यक्तियों का निर्धारण किया जा सके।
(क) जो कंपनी की सफलता या विफलता, चाहे वह वास्तविक हो या स्पष्ट, में वित्तीय रूप से रुचि रखते हों या रख चुके हों; या
(ख) जो 1 [कंपनी] की नीति को नियंत्रित करने या भौतिक रूप से प्रभावित करने में सक्षम हैं या रहे हैं; या।
2 [(सी) जिनके पास किसी कंपनी के शेयरों में लाभकारी हित है या था या जो किसी कंपनी के लाभकारी स्वामी या महत्वपूर्ण लाभकारी स्वामी हैं या रहे हैं]।
(2) उपधारा (1) के अधीन अपनी शक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, केंद्र सरकार उस उपधारा के अधीन एक या अधिक निरीक्षकों की नियुक्ति करेगी, यदि न्यायाधिकरण अपने समक्ष किसी कार्यवाही के दौरान किसी आदेश द्वारा यह निर्देश दे कि कंपनी की सदस्यता और कंपनी से संबंधित अन्य मामलों के संबंध में कंपनी के मामलों की जांच उपधारा (1) में निर्दिष्ट उद्देश्यों के लिए की जानी चाहिए।
(3) उपधारा (1) के अधीन निरीक्षक नियुक्त करते समय केंद्र सरकार जांच का दायरा परिभाषित कर सकती है, चाहे वह मामलों के संबंध में हो या उस अवधि के संबंध में जिस तक इसे बढ़ाया जाना है या अन्यथा, और विशेष रूप से, जांच को विशिष्ट शेयरों या डिबेंचर से जुड़े मामलों तक सीमित कर सकती है।
(4) निरीक्षक की नियुक्ति की शर्तों के अधीन रहते हुए, उसकी शक्तियाँ किसी भी ऐसी परिस्थिति की जाँच तक विस्तारित होंगी जो किसी व्यवस्था या समझ के अस्तित्व का संकेत देती हो, जो यद्यपि कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, फिर भी व्यवहार में देखी जाती है या देखी गई है या देखे जाने की संभावना है और जो उसकी जाँच के प्रयोजनों के लिए प्रासंगिक है।
(क) जो कंपनी की सफलता या विफलता, चाहे वह वास्तविक हो या स्पष्ट, में वित्तीय रूप से रुचि रखते हों या रख चुके हों; या
(ख) जो 1 [कंपनी] की नीति को नियंत्रित करने या भौतिक रूप से प्रभावित करने में सक्षम हैं या रहे हैं; या।
2 [(सी) जिनके पास किसी कंपनी के शेयरों में लाभकारी हित है या था या जो किसी कंपनी के लाभकारी स्वामी या महत्वपूर्ण लाभकारी स्वामी हैं या रहे हैं]।
(2) उपधारा (1) के अधीन अपनी शक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, केंद्र सरकार उस उपधारा के अधीन एक या अधिक निरीक्षकों की नियुक्ति करेगी, यदि न्यायाधिकरण अपने समक्ष किसी कार्यवाही के दौरान किसी आदेश द्वारा यह निर्देश दे कि कंपनी की सदस्यता और कंपनी से संबंधित अन्य मामलों के संबंध में कंपनी के मामलों की जांच उपधारा (1) में निर्दिष्ट उद्देश्यों के लिए की जानी चाहिए।
(3) उपधारा (1) के अधीन निरीक्षक नियुक्त करते समय केंद्र सरकार जांच का दायरा परिभाषित कर सकती है, चाहे वह मामलों के संबंध में हो या उस अवधि के संबंध में जिस तक इसे बढ़ाया जाना है या अन्यथा, और विशेष रूप से, जांच को विशिष्ट शेयरों या डिबेंचर से जुड़े मामलों तक सीमित कर सकती है।
(4) निरीक्षक की नियुक्ति की शर्तों के अधीन रहते हुए, उसकी शक्तियाँ किसी भी ऐसी परिस्थिति की जाँच तक विस्तारित होंगी जो किसी व्यवस्था या समझ के अस्तित्व का संकेत देती हो, जो यद्यपि कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, फिर भी व्यवहार में देखी जाती है या देखी गई है या देखे जाने की संभावना है और जो उसकी जाँच के प्रयोजनों के लिए प्रासंगिक है।
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