The Companies Act, 2013 187अध्याय XII · Meetings of Board and Its Powers
धारा 187 · कंपनी के निवेश उसी के नाम पर रखे जाएंगे।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) किसी कंपनी द्वारा किसी संपत्ति, प्रतिभूति या अन्य परिसंपत्ति में किए गए या रखे गए सभी निवेश उसके अपने नाम से किए जाएंगे और उसके द्वारा रखे जाएंगे:
बशर्ते कि कंपनी अपनी सहायक कंपनी में कंपनी के किसी नामित व्यक्ति या व्यक्तियों के नाम पर कोई शेयर रख सकती है, यदि ऐसा करना आवश्यक हो, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सहायक कंपनी के सदस्यों की संख्या वैधानिक सीमा से कम न हो।
(2) इस धारा की कोई बात किसी कंपनी को रोकने वाली नहीं मानी जाएगी--
(क) कंपनी के बैंकर के रूप में किसी बैंक में लाभांश या उस पर देय ब्याज की वसूली के लिए कोई शेयर या प्रतिभूतियां जमा करने से; या
(ख) कंपनी के बैंकर, भारतीय स्टेट बैंक या किसी अनुसूचित बैंक के पास शेयर या प्रतिभूतियां जमा करने, हस्तांतरित करने या उनके नाम पर रखने से, ताकि उनका हस्तांतरण सुगम हो सके:
बशर्ते कि यदि शेयरों या प्रतिभूतियों को कंपनी द्वारा भारतीय स्टेट बैंक या उपर्युक्त अनुसूचित बैंक को हस्तांतरित किए जाने की तिथि से छह महीने की अवधि के भीतर, या कंपनी द्वारा उपर्युक्त स्टेट बैंक ऑफ इंडिया या अनुसूचित बैंक के नाम पर पहली बार धारित किए जाने की तिथि से, ऐसे शेयरों या प्रतिभूतियों का कोई हस्तांतरण नहीं होता है, तो कंपनी उस अवधि की समाप्ति के बाद यथाशीघ्र उन शेयरों या प्रतिभूतियों को भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया या अनुसूचित बैंक से पुनः अपने नाम पर हस्तांतरित करवाएगी या, जैसा भी मामला हो, शेयरों या प्रतिभूतियों को पुनः अपने नाम पर धारित करेगी; या
(ग) कंपनी को दिए गए किसी ऋण के पुनर्भुगतान या उसके द्वारा किए गए किसी दायित्व के निष्पादन के लिए सुरक्षा के रूप में किसी व्यक्ति के पास कोई शेयर या प्रतिभूति जमा करने या हस्तांतरित करने से;
(घ) डिपॉजिटरी के नाम पर निवेश रखने से, जब ऐसे निवेश कंपनी द्वारा लाभकारी स्वामी के रूप में धारित प्रतिभूतियों के रूप में हों।
(3) जहां उपधारा (2) के खंड (घ) के अनुसरण में, किसी कंपनी द्वारा निवेश किए गए शेयर या प्रतिभूतियां उसके अपने नाम से धारित नहीं हैं, तो कंपनी एक रजिस्टर रखेगी जिसमें निर्धारित विवरण होंगे और ऐसा रजिस्टर कंपनी के किसी भी सदस्य या डिबेंचर धारक द्वारा व्यावसायिक घंटों के दौरान बिना किसी शुल्क के निरीक्षण के लिए खुला रहेगा, बशर्ते कि कंपनी अपने नियमों या आम बैठक में उचित प्रतिबंध लगा सके।
1 [(4) यदि कोई कंपनी इस धारा के प्रावधानों का पालन करने में चूक करती है, तो कंपनी पर पाँच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और कंपनी के प्रत्येक अधिकारी पर, जो चूक करता है, पचास हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।]
बशर्ते कि कंपनी अपनी सहायक कंपनी में कंपनी के किसी नामित व्यक्ति या व्यक्तियों के नाम पर कोई शेयर रख सकती है, यदि ऐसा करना आवश्यक हो, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सहायक कंपनी के सदस्यों की संख्या वैधानिक सीमा से कम न हो।
(2) इस धारा की कोई बात किसी कंपनी को रोकने वाली नहीं मानी जाएगी--
(क) कंपनी के बैंकर के रूप में किसी बैंक में लाभांश या उस पर देय ब्याज की वसूली के लिए कोई शेयर या प्रतिभूतियां जमा करने से; या
(ख) कंपनी के बैंकर, भारतीय स्टेट बैंक या किसी अनुसूचित बैंक के पास शेयर या प्रतिभूतियां जमा करने, हस्तांतरित करने या उनके नाम पर रखने से, ताकि उनका हस्तांतरण सुगम हो सके:
बशर्ते कि यदि शेयरों या प्रतिभूतियों को कंपनी द्वारा भारतीय स्टेट बैंक या उपर्युक्त अनुसूचित बैंक को हस्तांतरित किए जाने की तिथि से छह महीने की अवधि के भीतर, या कंपनी द्वारा उपर्युक्त स्टेट बैंक ऑफ इंडिया या अनुसूचित बैंक के नाम पर पहली बार धारित किए जाने की तिथि से, ऐसे शेयरों या प्रतिभूतियों का कोई हस्तांतरण नहीं होता है, तो कंपनी उस अवधि की समाप्ति के बाद यथाशीघ्र उन शेयरों या प्रतिभूतियों को भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया या अनुसूचित बैंक से पुनः अपने नाम पर हस्तांतरित करवाएगी या, जैसा भी मामला हो, शेयरों या प्रतिभूतियों को पुनः अपने नाम पर धारित करेगी; या
(ग) कंपनी को दिए गए किसी ऋण के पुनर्भुगतान या उसके द्वारा किए गए किसी दायित्व के निष्पादन के लिए सुरक्षा के रूप में किसी व्यक्ति के पास कोई शेयर या प्रतिभूति जमा करने या हस्तांतरित करने से;
(घ) डिपॉजिटरी के नाम पर निवेश रखने से, जब ऐसे निवेश कंपनी द्वारा लाभकारी स्वामी के रूप में धारित प्रतिभूतियों के रूप में हों।
(3) जहां उपधारा (2) के खंड (घ) के अनुसरण में, किसी कंपनी द्वारा निवेश किए गए शेयर या प्रतिभूतियां उसके अपने नाम से धारित नहीं हैं, तो कंपनी एक रजिस्टर रखेगी जिसमें निर्धारित विवरण होंगे और ऐसा रजिस्टर कंपनी के किसी भी सदस्य या डिबेंचर धारक द्वारा व्यावसायिक घंटों के दौरान बिना किसी शुल्क के निरीक्षण के लिए खुला रहेगा, बशर्ते कि कंपनी अपने नियमों या आम बैठक में उचित प्रतिबंध लगा सके।
1 [(4) यदि कोई कंपनी इस धारा के प्रावधानों का पालन करने में चूक करती है, तो कंपनी पर पाँच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और कंपनी के प्रत्येक अधिकारी पर, जो चूक करता है, पचास हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।]
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