The Companies Act, 2013 249अध्याय XVIII · Removal of Names of Companies from the Register of Companies
धारा 249 · कुछ परिस्थितियों में धारा 248 के तहत आवेदन करने पर प्रतिबंध।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) धारा 248 की उपधारा (2) के अंतर्गत किसी कंपनी की ओर से आवेदन तब तक नहीं किया जाएगा, जब तक कि पिछले तीन महीनों में किसी भी समय कंपनी--
(क) जिसने अपना नाम बदल लिया हो या अपना पंजीकृत कार्यालय एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरित कर दिया हो;
(ख) व्यापार बंद होने या कारोबार जारी रखने से ठीक पहले, सामान्य व्यापार या कारोबार जारी रखने के दौरान लाभ के लिए संपत्ति या अधिकारों का मूल्य के बदले निपटान किया हो;
(ग) उस धारा के तहत आवेदन करने, ऐसा करने का निर्णय लेने, कंपनी के मामलों को निपटाने, या किसी वैधानिक आवश्यकता का अनुपालन करने के उद्देश्य से आवश्यक या उपयुक्त गतिविधि के अलावा किसी अन्य गतिविधि में संलग्न रहा हो;
(घ) ने किसी समझौते या व्यवस्था को मंजूरी देने के लिए न्यायाधिकरण में आवेदन किया है और मामला अभी तक अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है; या
1 [(ई) इस अधिनियम के अध्याय XX या दिवालियापन और दिवालियापन संहिता, 2016 (31 ऑफ 2016) के तहत परिसमापन किया जा रहा है।]
(2) यदि कोई कंपनी धारा 248 की उपधारा (2) के अंतर्गत उपधारा (1) का उल्लंघन करते हुए आवेदन दाखिल करती है, तो उसे जुर्माने से दंडित किया जाएगा जो एक लाख रुपये तक हो सकता है।
(3) धारा 248 की उपधारा (2) के तहत दायर आवेदन कंपनी द्वारा वापस ले लिया जाएगा या रजिस्ट्रार द्वारा अस्वीकार कर दिया जाएगा जैसे ही उपधारा (1) के तहत शर्तें उसके संज्ञान में लाई जाती हैं।
(क) जिसने अपना नाम बदल लिया हो या अपना पंजीकृत कार्यालय एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरित कर दिया हो;
(ख) व्यापार बंद होने या कारोबार जारी रखने से ठीक पहले, सामान्य व्यापार या कारोबार जारी रखने के दौरान लाभ के लिए संपत्ति या अधिकारों का मूल्य के बदले निपटान किया हो;
(ग) उस धारा के तहत आवेदन करने, ऐसा करने का निर्णय लेने, कंपनी के मामलों को निपटाने, या किसी वैधानिक आवश्यकता का अनुपालन करने के उद्देश्य से आवश्यक या उपयुक्त गतिविधि के अलावा किसी अन्य गतिविधि में संलग्न रहा हो;
(घ) ने किसी समझौते या व्यवस्था को मंजूरी देने के लिए न्यायाधिकरण में आवेदन किया है और मामला अभी तक अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है; या
1 [(ई) इस अधिनियम के अध्याय XX या दिवालियापन और दिवालियापन संहिता, 2016 (31 ऑफ 2016) के तहत परिसमापन किया जा रहा है।]
(2) यदि कोई कंपनी धारा 248 की उपधारा (2) के अंतर्गत उपधारा (1) का उल्लंघन करते हुए आवेदन दाखिल करती है, तो उसे जुर्माने से दंडित किया जाएगा जो एक लाख रुपये तक हो सकता है।
(3) धारा 248 की उपधारा (2) के तहत दायर आवेदन कंपनी द्वारा वापस ले लिया जाएगा या रजिस्ट्रार द्वारा अस्वीकार कर दिया जाएगा जैसे ही उपधारा (1) के तहत शर्तें उसके संज्ञान में लाई जाती हैं।
अपराध एक नज़र में
- जुर्माना
- ₹1,00,000
- संज्ञेय
- असंज्ञेय
- जमानतीय
- जमानतीय
- विचारण न्यायालय
- कोई भी मजिस्ट्रेट
- असंज्ञेय — पुलिस बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के जाँच नहीं कर सकती
- जमानतीय — जमानत आपका अधिकार है — थाने से भी मिल सकती है
इसी अधिनियम के अपने उपबंध के अनुसार
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
