The Companies Act, 2013 213अध्याय XIV · Inspection, Inquiry and Investigation
धारा 213 · अन्य मामलों में कंपनी के कामकाज की जांच।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
न्यायाधिकरण निम्नलिखित कार्य कर सकता है,--
(क) द्वारा किए गए आवेदन पर--
(i) शेयर पूंजी वाली कंपनी के मामले में, कम से कम सौ सदस्य या कुल मतदान शक्ति के दसवें हिस्से से कम के सदस्य नहीं; या
(ii) शेयर पूंजी रहित कंपनी के मामले में, कंपनी के सदस्यों के रजिस्टर में दर्ज व्यक्तियों के एक-पांचवें से कम नहीं।
और ऐसे साक्ष्यों द्वारा समर्थित हो जो यह दर्शाने के लिए आवश्यक हों कि आवेदकों के पास कंपनी के मामलों की जांच करने का आदेश मांगने के अच्छे कारण हैं; या
(ख) किसी अन्य व्यक्ति द्वारा या अन्यथा किए गए आवेदन पर, यदि वह संतुष्ट हो कि ऐसी परिस्थितियाँ मौजूद हैं जो यह संकेत देती हैं कि--
(i) कंपनी का व्यवसाय उसके लेनदारों, सदस्यों या किसी अन्य व्यक्ति को धोखा देने के इरादे से या अन्यथा किसी कपटपूर्ण या गैरकानूनी उद्देश्य से या उसके किसी सदस्य के लिए दमनकारी तरीके से संचालित किया जा रहा है या कंपनी का गठन किसी कपटपूर्ण या गैरकानूनी उद्देश्य से किया गया था;
(ii) कंपनी के गठन या उसके कामकाज के प्रबंधन से संबंधित व्यक्तियों ने कंपनी या उसके किसी सदस्य के प्रति धोखाधड़ी, कदाचार या अन्य दुराचार किया हो; या
(iii) कंपनी के सदस्यों को उसके मामलों के संबंध में वह सभी जानकारी नहीं दी गई है जिसकी वे यथोचित रूप से अपेक्षा कर सकते हैं, जिसमें कंपनी के प्रबंध निदेशक या अन्य निदेशक, या प्रबंधक को देय कमीशन की गणना से संबंधित जानकारी भी शामिल है।
संबंधित पक्षों को सुनवाई का उचित अवसर देने के बाद, यह आदेश पारित किया जाए कि कंपनी के मामलों की जांच केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एक या अधिक निरीक्षकों द्वारा की जाए और यदि ऐसा आदेश पारित किया जाता है, तो केंद्र सरकार एक या अधिक सक्षम व्यक्तियों को निरीक्षक के रूप में नियुक्त करे जो कंपनी के मामलों की जांच करें और केंद्र सरकार द्वारा निर्देशित तरीके से रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
बशर्ते कि यदि जांच के बाद यह सिद्ध हो जाए कि--
(i) कंपनी का व्यवसाय उसके लेनदारों, सदस्यों या किसी अन्य व्यक्ति को धोखा देने के इरादे से या अन्यथा किसी कपटपूर्ण या गैरकानूनी उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है, या कंपनी का गठन किसी कपटपूर्ण या गैरकानूनी उद्देश्य से किया गया था; या
(ii) यदि कंपनी के गठन या उसके कामकाज के प्रबंधन से संबंधित कोई व्यक्ति इस संबंध में धोखाधड़ी का दोषी पाया गया हो,
तब, कंपनी का प्रत्येक अधिकारी जो चूक करता है और कंपनी के गठन या उसके मामलों के प्रबंधन से संबंधित व्यक्ति या व्यक्तियों को धारा 447 में दिए गए तरीके से धोखाधड़ी के लिए दंडित किया जाएगा।
(क) द्वारा किए गए आवेदन पर--
(i) शेयर पूंजी वाली कंपनी के मामले में, कम से कम सौ सदस्य या कुल मतदान शक्ति के दसवें हिस्से से कम के सदस्य नहीं; या
(ii) शेयर पूंजी रहित कंपनी के मामले में, कंपनी के सदस्यों के रजिस्टर में दर्ज व्यक्तियों के एक-पांचवें से कम नहीं।
और ऐसे साक्ष्यों द्वारा समर्थित हो जो यह दर्शाने के लिए आवश्यक हों कि आवेदकों के पास कंपनी के मामलों की जांच करने का आदेश मांगने के अच्छे कारण हैं; या
(ख) किसी अन्य व्यक्ति द्वारा या अन्यथा किए गए आवेदन पर, यदि वह संतुष्ट हो कि ऐसी परिस्थितियाँ मौजूद हैं जो यह संकेत देती हैं कि--
(i) कंपनी का व्यवसाय उसके लेनदारों, सदस्यों या किसी अन्य व्यक्ति को धोखा देने के इरादे से या अन्यथा किसी कपटपूर्ण या गैरकानूनी उद्देश्य से या उसके किसी सदस्य के लिए दमनकारी तरीके से संचालित किया जा रहा है या कंपनी का गठन किसी कपटपूर्ण या गैरकानूनी उद्देश्य से किया गया था;
(ii) कंपनी के गठन या उसके कामकाज के प्रबंधन से संबंधित व्यक्तियों ने कंपनी या उसके किसी सदस्य के प्रति धोखाधड़ी, कदाचार या अन्य दुराचार किया हो; या
(iii) कंपनी के सदस्यों को उसके मामलों के संबंध में वह सभी जानकारी नहीं दी गई है जिसकी वे यथोचित रूप से अपेक्षा कर सकते हैं, जिसमें कंपनी के प्रबंध निदेशक या अन्य निदेशक, या प्रबंधक को देय कमीशन की गणना से संबंधित जानकारी भी शामिल है।
संबंधित पक्षों को सुनवाई का उचित अवसर देने के बाद, यह आदेश पारित किया जाए कि कंपनी के मामलों की जांच केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एक या अधिक निरीक्षकों द्वारा की जाए और यदि ऐसा आदेश पारित किया जाता है, तो केंद्र सरकार एक या अधिक सक्षम व्यक्तियों को निरीक्षक के रूप में नियुक्त करे जो कंपनी के मामलों की जांच करें और केंद्र सरकार द्वारा निर्देशित तरीके से रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
बशर्ते कि यदि जांच के बाद यह सिद्ध हो जाए कि--
(i) कंपनी का व्यवसाय उसके लेनदारों, सदस्यों या किसी अन्य व्यक्ति को धोखा देने के इरादे से या अन्यथा किसी कपटपूर्ण या गैरकानूनी उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है, या कंपनी का गठन किसी कपटपूर्ण या गैरकानूनी उद्देश्य से किया गया था; या
(ii) यदि कंपनी के गठन या उसके कामकाज के प्रबंधन से संबंधित कोई व्यक्ति इस संबंध में धोखाधड़ी का दोषी पाया गया हो,
तब, कंपनी का प्रत्येक अधिकारी जो चूक करता है और कंपनी के गठन या उसके मामलों के प्रबंधन से संबंधित व्यक्ति या व्यक्तियों को धारा 447 में दिए गए तरीके से धोखाधड़ी के लिए दंडित किया जाएगा।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 10 वर्ष
- न्यूनतम दंड (विधिक)
- 6 माह
- जुर्माना
- जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- विचारण न्यायालय
- विशेष न्यायालय
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
इसी अधिनियम के अपने उपबंध के अनुसार
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
