The Companies Act, 2013 230अध्याय XV · Compromises, Arrangements and Amalgamations
धारा 230 · लेनदारों और सदस्यों के साथ समझौता करने या व्यवस्था करने की शक्ति
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जहां कोई समझौता या व्यवस्था प्रस्तावित की जाती है--
(क) किसी कंपनी और उसके लेनदारों या उनके किसी वर्ग के बीच; या
(ख) के बीच कोई कंपनी और उसके सदस्य या उनका कोई वर्ग,
ट्रिब्यूनल, कंपनी या किसी लेनदार या कंपनी के सदस्य के आवेदन पर, या किसी ऐसी कंपनी के मामले में जिसका परिसमापन किया जा रहा है, परिसमापक 1 [इस अधिनियम या दिवालियापन और दिवालियापन संहिता, 2016 (31 ऑफ 2016) के तहत नियुक्त, जैसा भी मामला हो,] लेनदारों या लेनदारों के वर्ग, या सदस्यों या सदस्यों के वर्ग, जैसा भी मामला हो, की बैठक बुलाने, आयोजित करने और ट्रिब्यूनल द्वारा निर्देशित तरीके से संचालित करने का आदेश दे सकता है।
स्पष्टीकरण। -- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, व्यवस्था में कंपनी की शेयर पूंजी का पुनर्गठन शामिल है, जो विभिन्न वर्गों के शेयरों के समेकन द्वारा या शेयरों को विभिन्न वर्गों के शेयरों में विभाजित करके या इन दोनों विधियों द्वारा किया जाता है।
(2) जिस कंपनी या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उपधारा (1) के अंतर्गत आवेदन किया जाता है, वह न्यायाधिकरण को हलफनामे के माध्यम से निम्नलिखित जानकारी देगा--
(क) कंपनी से संबंधित सभी महत्वपूर्ण तथ्य, जैसे कि कंपनी की नवीनतम वित्तीय स्थिति, कंपनी के खातों पर लेखा परीक्षकों की नवीनतम रिपोर्ट और कंपनी के खिलाफ किसी भी जांच या कार्यवाही का लंबित होना;
(ख) समझौते या व्यवस्था में शामिल कंपनी की शेयर पूंजी में कमी, यदि कोई हो;
(ग) कॉरपोरेट ऋण पुनर्गठन की कोई भी योजना जिसे मूल्य के हिसाब से कम से कम पचहत्तर प्रतिशत सुरक्षित लेनदारों द्वारा सहमति दी गई हो, जिसमें शामिल हैं--
(i) निर्धारित प्रपत्र में लेनदारों की उत्तरदायित्व विवरण;
(ii) अन्य सुरक्षित और असुरक्षित लेनदारों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा उपाय;
(iii) लेखा परीक्षक द्वारा रिपोर्ट कि अनुमोदित कॉर्पोरेट ऋण पुनर्गठन के बाद कंपनी की निधि आवश्यकताएं बोर्ड द्वारा उन्हें प्रदान किए गए अनुमानों के आधार पर तरलता परीक्षण के अनुरूप होंगी;
(iv) जहां कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्दिष्ट कॉर्पोरेट ऋण पुनर्गठन दिशानिर्देशों को अपनाने का प्रस्ताव करती है, वहां इस आशय का एक विवरण; और
(v) कंपनी के शेयरों, संपत्ति और सभी परिसंपत्तियों, मूर्त और अमूर्त, चल और अचल, के संबंध में एक पंजीकृत मूल्यांकनकर्ता द्वारा मूल्यांकन रिपोर्ट।
(3) जहां उपधारा (1) के अधीन न्यायाधिकरण के आदेश के अनुसरण में कोई बैठक बुलाई जानी प्रस्तावित हो, तो ऐसी बैठक की सूचना सभी लेनदारों या लेनदारों के वर्ग तथा कंपनी के सभी सदस्यों या सदस्यों के वर्ग और डिबेंचर धारकों को कंपनी के साथ पंजीकृत पते पर व्यक्तिगत रूप से भेजी जाएगी, जिसके साथ एक विवरण संलग्न होगा जिसमें समझौते या व्यवस्था का विवरण, यदि कोई हो तो मूल्यांकन रिपोर्ट की एक प्रति, और लेनदारों, प्रमुख प्रबंधकीय कर्मियों, प्रवर्तकों और गैर-प्रवर्तक सदस्यों तथा डिबेंचर धारकों पर इसके प्रभाव तथा कंपनी के निदेशकों या डिबेंचर ट्रस्टियों के किसी भी महत्वपूर्ण हित पर समझौते या व्यवस्था के प्रभाव तथा ऐसे अन्य मामलों का विवरण होगा जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
बशर्ते कि ऐसी सूचना और अन्य दस्तावेज कंपनी की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराए जाएंगे, यदि कोई हो, और सूचीबद्ध कंपनी के मामले में, ये दस्तावेज प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड और स्टॉक एक्सचेंज को भेजे जाएंगे जहां कंपनी की प्रतिभूतियां सूचीबद्ध हैं, ताकि उन्हें उनकी वेबसाइट पर प्रकाशित किया जा सके और साथ ही समाचार पत्रों में भी निर्धारित तरीके से प्रकाशित किया जाएगा।
इसके अलावा, यदि बैठक की सूचना विज्ञापन के माध्यम से भी जारी की जाती है, तो उसमें वह समय सीमा बताई जाएगी जिसके भीतर समझौते या व्यवस्था की प्रतियां कंपनी के पंजीकृत कार्यालय से संबंधित व्यक्तियों को नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।
(4) उपधारा (3) के तहत दी गई सूचना में यह प्रावधान होगा कि जिन व्यक्तियों को सूचना भेजी गई है, वे ऐसी सूचना प्राप्त होने की तिथि से एक माह के भीतर बैठक में स्वयं, या प्रतिनिधियों के माध्यम से, या डाक मतपत्र द्वारा समझौते या व्यवस्था को अपनाने के लिए मतदान कर सकते हैं।
बशर्ते कि समझौते या व्यवस्था पर कोई भी आपत्ति केवल उन व्यक्तियों द्वारा की जाएगी जिनके पास कम से कम दस प्रतिशत शेयरधारिता हो या जिनका बकाया ऋण नवीनतम लेखापरीक्षित वित्तीय विवरण के अनुसार कुल बकाया ऋण के कम से कम पांच प्रतिशत के बराबर हो।
(5) उप-धारा (3) के तहत एक नोटिस, निर्धारित प्रारूप में सभी दस्तावेजों के साथ, केंद्र सरकार, आयकर प्राधिकरणों, भारतीय रिजर्व बैंक, प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड, रजिस्ट्रार, संबंधित स्टॉक एक्सचेंजों, आधिकारिक परिसमापक, प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 (12 ऑफ 2003) की धारा 7 की उप-धारा (1) के तहत स्थापित भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग, यदि आवश्यक हो, और ऐसे अन्य क्षेत्रीय नियामकों या प्राधिकरणों को भी भेजा जाएगा जो समझौते या व्यवस्था से प्रभावित होने की संभावना रखते हैं, और उनसे यह अपेक्षा की जाएगी कि यदि कोई अभ्यावेदन देना हो तो वह नोटिस प्राप्त होने की तिथि से तीस दिनों की अवधि के भीतर दिया जाए, अन्यथा यह मान लिया जाएगा कि प्रस्तावों पर उन्हें कोई अभ्यावेदन नहीं देना है।
(6) जहां उपधारा (1) के अनुसरण में आयोजित बैठक में, लेनदारों, लेनदारों के वर्ग, सदस्यों या सदस्यों के वर्ग के मूल्य के तीन-चौथाई का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकांश व्यक्ति, व्यक्तिगत रूप से या परोक्ष रूप से या डाक मतपत्र द्वारा मतदान करके, किसी समझौते या व्यवस्था पर सहमत होते हैं और यदि ऐसे समझौते या व्यवस्था को न्यायाधिकरण द्वारा किसी आदेश द्वारा स्वीकृत किया जाता है, तो वह कंपनी, सभी लेनदारों, लेनदारों के वर्ग, सदस्यों या सदस्यों के वर्ग पर, जैसा भी मामला हो, या, परिसमापन की जा रही कंपनी के मामले में, परिसमापक 2 [इस अधिनियम के तहत या दिवालियापन और दिवालिया संहिता, 2016 (31 ऑफ 2016) के तहत नियुक्त, जैसा भी मामला हो,] और कंपनी के अंशदाताओं पर बाध्यकारी होगा।
(7) उपधारा (6) के अंतर्गत न्यायाधिकरण द्वारा पारित आदेश में निम्नलिखित सभी या इनमें से किसी भी मामले का प्रावधान होगा, अर्थात्:--
(क) जहां समझौता या व्यवस्था में अधिमान्य शेयरों को इक्विटी शेयरों में परिवर्तित करने का प्रावधान है, वहां ऐसे अधिमान्य शेयरधारकों को नकद में लाभांश का बकाया प्राप्त करने या देय लाभांश के मूल्य के बराबर इक्विटी शेयर स्वीकार करने का विकल्प दिया जाएगा;
(ख) लेनदारों के किसी भी वर्ग का संरक्षण;
(ग) यदि समझौता या व्यवस्था के परिणामस्वरूप शेयरधारकों के अधिकारों में परिवर्तन होता है, तो इसे धारा 48 के प्रावधानों के तहत प्रभावी किया जाएगा;
(घ) यदि उपधारा (6) के अधीन लेनदारों द्वारा समझौता या व्यवस्था पर सहमति हो जाती है, तो बीमार औद्योगिक कंपनियां (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1985 (1 ऑफ 1986) की धारा 4 के तहत स्थापित औद्योगिक और वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड के समक्ष लंबित कोई भी कार्यवाही समाप्त हो जाएगी;
(ई) ऐसे अन्य मामले जिनमें असंतुष्ट शेयरधारकों को निकास प्रस्ताव देना शामिल है, यदि कोई हो, जो न्यायाधिकरण की राय में समझौते या व्यवस्था की शर्तों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए आवश्यक हैं:
बशर्ते कि न्यायाधिकरण द्वारा किसी भी समझौते या व्यवस्था को तब तक स्वीकृत नहीं किया जाएगा जब तक कि कंपनी के लेखा परीक्षक द्वारा न्यायाधिकरण के समक्ष इस आशय का प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया जाता है कि समझौते या व्यवस्था की योजना में प्रस्तावित लेखांकन उपचार, यदि कोई हो, धारा 133 के तहत निर्धारित लेखांकन मानकों के अनुरूप है।
(8) ट्रिब्यूनल का आदेश कंपनी द्वारा आदेश प्राप्त होने के तीस दिनों के भीतर रजिस्ट्रार के पास दाखिल किया जाएगा।
(9) न्यायाधिकरण लेनदार या लेनदारों के वर्ग की बैठक बुलाने से छूट दे सकता है, जहाँ ऐसे लेनदार या लेनदारों का वर्ग, जिनका कम से कम नब्बे प्रतिशत मूल्य हो, समझौता या व्यवस्था की योजना पर शपथपत्र के माध्यम से सहमत और पुष्टि करते हैं।
(10) इस धारा के अंतर्गत प्रतिभूतियों की किसी भी खरीद-वापसी के संबंध में न्यायाधिकरण द्वारा कोई समझौता या व्यवस्था स्वीकृत नहीं की जाएगी, जब तक कि ऐसी खरीद-वापसी धारा 68 के प्रावधानों के अनुसार न हो।
(11) किसी भी समझौते या व्यवस्था में निर्धारित तरीके से किया गया अधिग्रहण प्रस्ताव शामिल हो सकता है:
बशर्ते कि सूचीबद्ध कंपनियों के मामले में, अधिग्रहण प्रस्ताव प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार होगा।
(12) पीड़ित पक्ष, सूचीबद्ध कंपनियों के अलावा अन्य कंपनियों के अधिग्रहण प्रस्ताव के संबंध में किसी भी शिकायत की स्थिति में, निर्धारित तरीके से न्यायाधिकरण में आवेदन कर सकता है और न्यायाधिकरण आवेदन पर ऐसा आदेश पारित कर सकता है जैसा वह उचित समझे।
स्पष्टीकरण। -- संदेह दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि धारा 66 के प्रावधान इस धारा के तहत न्यायाधिकरण के आदेश के अनुसरण में किए गए शेयर पूंजी में कमी पर लागू नहीं होंगे।
(क) किसी कंपनी और उसके लेनदारों या उनके किसी वर्ग के बीच; या
(ख) के बीच कोई कंपनी और उसके सदस्य या उनका कोई वर्ग,
ट्रिब्यूनल, कंपनी या किसी लेनदार या कंपनी के सदस्य के आवेदन पर, या किसी ऐसी कंपनी के मामले में जिसका परिसमापन किया जा रहा है, परिसमापक 1 [इस अधिनियम या दिवालियापन और दिवालियापन संहिता, 2016 (31 ऑफ 2016) के तहत नियुक्त, जैसा भी मामला हो,] लेनदारों या लेनदारों के वर्ग, या सदस्यों या सदस्यों के वर्ग, जैसा भी मामला हो, की बैठक बुलाने, आयोजित करने और ट्रिब्यूनल द्वारा निर्देशित तरीके से संचालित करने का आदेश दे सकता है।
स्पष्टीकरण। -- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, व्यवस्था में कंपनी की शेयर पूंजी का पुनर्गठन शामिल है, जो विभिन्न वर्गों के शेयरों के समेकन द्वारा या शेयरों को विभिन्न वर्गों के शेयरों में विभाजित करके या इन दोनों विधियों द्वारा किया जाता है।
(2) जिस कंपनी या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उपधारा (1) के अंतर्गत आवेदन किया जाता है, वह न्यायाधिकरण को हलफनामे के माध्यम से निम्नलिखित जानकारी देगा--
(क) कंपनी से संबंधित सभी महत्वपूर्ण तथ्य, जैसे कि कंपनी की नवीनतम वित्तीय स्थिति, कंपनी के खातों पर लेखा परीक्षकों की नवीनतम रिपोर्ट और कंपनी के खिलाफ किसी भी जांच या कार्यवाही का लंबित होना;
(ख) समझौते या व्यवस्था में शामिल कंपनी की शेयर पूंजी में कमी, यदि कोई हो;
(ग) कॉरपोरेट ऋण पुनर्गठन की कोई भी योजना जिसे मूल्य के हिसाब से कम से कम पचहत्तर प्रतिशत सुरक्षित लेनदारों द्वारा सहमति दी गई हो, जिसमें शामिल हैं--
(i) निर्धारित प्रपत्र में लेनदारों की उत्तरदायित्व विवरण;
(ii) अन्य सुरक्षित और असुरक्षित लेनदारों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा उपाय;
(iii) लेखा परीक्षक द्वारा रिपोर्ट कि अनुमोदित कॉर्पोरेट ऋण पुनर्गठन के बाद कंपनी की निधि आवश्यकताएं बोर्ड द्वारा उन्हें प्रदान किए गए अनुमानों के आधार पर तरलता परीक्षण के अनुरूप होंगी;
(iv) जहां कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्दिष्ट कॉर्पोरेट ऋण पुनर्गठन दिशानिर्देशों को अपनाने का प्रस्ताव करती है, वहां इस आशय का एक विवरण; और
(v) कंपनी के शेयरों, संपत्ति और सभी परिसंपत्तियों, मूर्त और अमूर्त, चल और अचल, के संबंध में एक पंजीकृत मूल्यांकनकर्ता द्वारा मूल्यांकन रिपोर्ट।
(3) जहां उपधारा (1) के अधीन न्यायाधिकरण के आदेश के अनुसरण में कोई बैठक बुलाई जानी प्रस्तावित हो, तो ऐसी बैठक की सूचना सभी लेनदारों या लेनदारों के वर्ग तथा कंपनी के सभी सदस्यों या सदस्यों के वर्ग और डिबेंचर धारकों को कंपनी के साथ पंजीकृत पते पर व्यक्तिगत रूप से भेजी जाएगी, जिसके साथ एक विवरण संलग्न होगा जिसमें समझौते या व्यवस्था का विवरण, यदि कोई हो तो मूल्यांकन रिपोर्ट की एक प्रति, और लेनदारों, प्रमुख प्रबंधकीय कर्मियों, प्रवर्तकों और गैर-प्रवर्तक सदस्यों तथा डिबेंचर धारकों पर इसके प्रभाव तथा कंपनी के निदेशकों या डिबेंचर ट्रस्टियों के किसी भी महत्वपूर्ण हित पर समझौते या व्यवस्था के प्रभाव तथा ऐसे अन्य मामलों का विवरण होगा जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
बशर्ते कि ऐसी सूचना और अन्य दस्तावेज कंपनी की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराए जाएंगे, यदि कोई हो, और सूचीबद्ध कंपनी के मामले में, ये दस्तावेज प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड और स्टॉक एक्सचेंज को भेजे जाएंगे जहां कंपनी की प्रतिभूतियां सूचीबद्ध हैं, ताकि उन्हें उनकी वेबसाइट पर प्रकाशित किया जा सके और साथ ही समाचार पत्रों में भी निर्धारित तरीके से प्रकाशित किया जाएगा।
इसके अलावा, यदि बैठक की सूचना विज्ञापन के माध्यम से भी जारी की जाती है, तो उसमें वह समय सीमा बताई जाएगी जिसके भीतर समझौते या व्यवस्था की प्रतियां कंपनी के पंजीकृत कार्यालय से संबंधित व्यक्तियों को नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।
(4) उपधारा (3) के तहत दी गई सूचना में यह प्रावधान होगा कि जिन व्यक्तियों को सूचना भेजी गई है, वे ऐसी सूचना प्राप्त होने की तिथि से एक माह के भीतर बैठक में स्वयं, या प्रतिनिधियों के माध्यम से, या डाक मतपत्र द्वारा समझौते या व्यवस्था को अपनाने के लिए मतदान कर सकते हैं।
बशर्ते कि समझौते या व्यवस्था पर कोई भी आपत्ति केवल उन व्यक्तियों द्वारा की जाएगी जिनके पास कम से कम दस प्रतिशत शेयरधारिता हो या जिनका बकाया ऋण नवीनतम लेखापरीक्षित वित्तीय विवरण के अनुसार कुल बकाया ऋण के कम से कम पांच प्रतिशत के बराबर हो।
(5) उप-धारा (3) के तहत एक नोटिस, निर्धारित प्रारूप में सभी दस्तावेजों के साथ, केंद्र सरकार, आयकर प्राधिकरणों, भारतीय रिजर्व बैंक, प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड, रजिस्ट्रार, संबंधित स्टॉक एक्सचेंजों, आधिकारिक परिसमापक, प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 (12 ऑफ 2003) की धारा 7 की उप-धारा (1) के तहत स्थापित भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग, यदि आवश्यक हो, और ऐसे अन्य क्षेत्रीय नियामकों या प्राधिकरणों को भी भेजा जाएगा जो समझौते या व्यवस्था से प्रभावित होने की संभावना रखते हैं, और उनसे यह अपेक्षा की जाएगी कि यदि कोई अभ्यावेदन देना हो तो वह नोटिस प्राप्त होने की तिथि से तीस दिनों की अवधि के भीतर दिया जाए, अन्यथा यह मान लिया जाएगा कि प्रस्तावों पर उन्हें कोई अभ्यावेदन नहीं देना है।
(6) जहां उपधारा (1) के अनुसरण में आयोजित बैठक में, लेनदारों, लेनदारों के वर्ग, सदस्यों या सदस्यों के वर्ग के मूल्य के तीन-चौथाई का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकांश व्यक्ति, व्यक्तिगत रूप से या परोक्ष रूप से या डाक मतपत्र द्वारा मतदान करके, किसी समझौते या व्यवस्था पर सहमत होते हैं और यदि ऐसे समझौते या व्यवस्था को न्यायाधिकरण द्वारा किसी आदेश द्वारा स्वीकृत किया जाता है, तो वह कंपनी, सभी लेनदारों, लेनदारों के वर्ग, सदस्यों या सदस्यों के वर्ग पर, जैसा भी मामला हो, या, परिसमापन की जा रही कंपनी के मामले में, परिसमापक 2 [इस अधिनियम के तहत या दिवालियापन और दिवालिया संहिता, 2016 (31 ऑफ 2016) के तहत नियुक्त, जैसा भी मामला हो,] और कंपनी के अंशदाताओं पर बाध्यकारी होगा।
(7) उपधारा (6) के अंतर्गत न्यायाधिकरण द्वारा पारित आदेश में निम्नलिखित सभी या इनमें से किसी भी मामले का प्रावधान होगा, अर्थात्:--
(क) जहां समझौता या व्यवस्था में अधिमान्य शेयरों को इक्विटी शेयरों में परिवर्तित करने का प्रावधान है, वहां ऐसे अधिमान्य शेयरधारकों को नकद में लाभांश का बकाया प्राप्त करने या देय लाभांश के मूल्य के बराबर इक्विटी शेयर स्वीकार करने का विकल्प दिया जाएगा;
(ख) लेनदारों के किसी भी वर्ग का संरक्षण;
(ग) यदि समझौता या व्यवस्था के परिणामस्वरूप शेयरधारकों के अधिकारों में परिवर्तन होता है, तो इसे धारा 48 के प्रावधानों के तहत प्रभावी किया जाएगा;
(घ) यदि उपधारा (6) के अधीन लेनदारों द्वारा समझौता या व्यवस्था पर सहमति हो जाती है, तो बीमार औद्योगिक कंपनियां (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1985 (1 ऑफ 1986) की धारा 4 के तहत स्थापित औद्योगिक और वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड के समक्ष लंबित कोई भी कार्यवाही समाप्त हो जाएगी;
(ई) ऐसे अन्य मामले जिनमें असंतुष्ट शेयरधारकों को निकास प्रस्ताव देना शामिल है, यदि कोई हो, जो न्यायाधिकरण की राय में समझौते या व्यवस्था की शर्तों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए आवश्यक हैं:
बशर्ते कि न्यायाधिकरण द्वारा किसी भी समझौते या व्यवस्था को तब तक स्वीकृत नहीं किया जाएगा जब तक कि कंपनी के लेखा परीक्षक द्वारा न्यायाधिकरण के समक्ष इस आशय का प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया जाता है कि समझौते या व्यवस्था की योजना में प्रस्तावित लेखांकन उपचार, यदि कोई हो, धारा 133 के तहत निर्धारित लेखांकन मानकों के अनुरूप है।
(8) ट्रिब्यूनल का आदेश कंपनी द्वारा आदेश प्राप्त होने के तीस दिनों के भीतर रजिस्ट्रार के पास दाखिल किया जाएगा।
(9) न्यायाधिकरण लेनदार या लेनदारों के वर्ग की बैठक बुलाने से छूट दे सकता है, जहाँ ऐसे लेनदार या लेनदारों का वर्ग, जिनका कम से कम नब्बे प्रतिशत मूल्य हो, समझौता या व्यवस्था की योजना पर शपथपत्र के माध्यम से सहमत और पुष्टि करते हैं।
(10) इस धारा के अंतर्गत प्रतिभूतियों की किसी भी खरीद-वापसी के संबंध में न्यायाधिकरण द्वारा कोई समझौता या व्यवस्था स्वीकृत नहीं की जाएगी, जब तक कि ऐसी खरीद-वापसी धारा 68 के प्रावधानों के अनुसार न हो।
(11) किसी भी समझौते या व्यवस्था में निर्धारित तरीके से किया गया अधिग्रहण प्रस्ताव शामिल हो सकता है:
बशर्ते कि सूचीबद्ध कंपनियों के मामले में, अधिग्रहण प्रस्ताव प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार होगा।
(12) पीड़ित पक्ष, सूचीबद्ध कंपनियों के अलावा अन्य कंपनियों के अधिग्रहण प्रस्ताव के संबंध में किसी भी शिकायत की स्थिति में, निर्धारित तरीके से न्यायाधिकरण में आवेदन कर सकता है और न्यायाधिकरण आवेदन पर ऐसा आदेश पारित कर सकता है जैसा वह उचित समझे।
स्पष्टीकरण। -- संदेह दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि धारा 66 के प्रावधान इस धारा के तहत न्यायाधिकरण के आदेश के अनुसरण में किए गए शेयर पूंजी में कमी पर लागू नहीं होंगे।
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
