The Companies Act, 2013 465अध्याय XXIX · Miscellaneous
धारा 465 · कुछ अधिनियमों और छूटों को निरस्त करना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) और कंपनी पंजीकरण (सिक्किम) अधिनियम, 1961 (सिक्किम अधिनियम 8 ऑफ 1961) (इसके बाद इस धारा में निरस्त अधिनियमों के रूप में संदर्भित) निरस्त माने जाएंगे:
बशर्ते कि कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) के भाग IX ए के प्रावधान उत्पादक कंपनी पर यथावश्यक परिवर्तनों के साथ इस प्रकार लागू होंगे मानो कंपनी अधिनियम, 1956 को निरस्त नहीं किया गया हो, जब तक कि उत्पादक कंपनियों के लिए कोई विशेष अधिनियम अधिनियमित नहीं किया जाता है:
इसके अलावा, जब तक केंद्र सरकार द्वारा धारा 434 की उपधारा (1) के तहत सभी मामलों, कार्यवाहियों या मुकदमों को न्यायाधिकरण में स्थानांतरित करने के लिए कोई तिथि अधिसूचित नहीं की जाती है, तब तक कंपनी विधि प्रशासन बोर्ड और न्यायालय के अधिकार क्षेत्र, शक्तियों, अधिकार और कार्यों के संबंध में कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) के प्रावधान इस प्रकार लागू रहेंगे मानो कंपनी अधिनियम, 1956 निरस्त नहीं किया गया हो।
इसके अलावा, यह भी प्रावधान है कि सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 (2009 का 6) की धारा 67 के तहत जारी अधिसूचना में संदर्भित कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) के प्रावधान, जब तक कि इस अधिनियम के प्रासंगिक संबंधित प्रावधानों को सीमित देयता भागीदारी पर लागू करने वाली ऐसी धारा के तहत प्रासंगिक अधिसूचना जारी नहीं हो जाती, तब तक लागू रहेंगे मानो कंपनी अधिनियम, 1956 निरस्त नहीं हुआ हो।
(2) निरस्त अधिनियमों की उपधारा (1) के तहत निरस्त किए जाने के बावजूद,--
(क) निरस्त अधिनियमों के तहत किया गया कोई भी कार्य या की गई कोई भी कार्रवाई, जिसमें कोई नियम, अधिसूचना, निरीक्षण, आदेश या नोटिस जारी करना या कोई नियुक्ति या घोषणा करना या कोई संचालन करना या कोई निर्देश देना या कोई कार्यवाही करना या कोई दंड, सजा, ज़ब्ती या जुर्माना लगाना शामिल है, इस अधिनियम के प्रावधानों के साथ असंगत न होने की सीमा तक, इस अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत किया गया या लिया गया माना जाएगा;
(ख) खंड (क) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, किसी निरस्त अधिनियम के अधीन या उसके अनुसरण में बनाया गया कोई आदेश, नियम, अधिसूचना, विनियम, नियुक्ति, हस्तांतरण, गिरवी, विलेख, दस्तावेज या समझौता, निर्देशित शुल्क, पारित संकल्प, दिया गया निर्देश, की गई कार्यवाही, निष्पादित या जारी किया गया उपकरण, या किया गया कार्य, यदि इस अधिनियम के प्रारंभ होने के समय लागू था, तो लागू रहेगा और इस अधिनियम के अधीन या उसके अनुसरण में बनाए गए, निर्देशित किए गए, पारित किए गए, दिए गए, लिए गए, निष्पादित किए गए, जारी किए गए या किए गए कार्य के समान प्रभावी होगा;
(ग) विधि का कोई सिद्धांत या नियम, या स्थापित क्षेत्राधिकार, अभिवेदन का रूप या तरीका, प्रथा या प्रक्रिया या मौजूदा उपयोग, रीति-रिवाज, विशेषाधिकार, प्रतिबंध या छूट प्रभावित नहीं होगी, भले ही निरस्त अधिनियमों द्वारा, उनमें या उनसे किसी भी प्रकार से पुष्टि या मान्यता प्राप्त या व्युत्पन्न किया गया हो;
(घ) किसी निरस्त अधिनियम के अधीन या उसके आधार पर किसी पद पर नियुक्त कोई व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन या उसके आधार पर उस पद पर नियुक्त माना जाएगा;
(ई) कोई भी अधिकार क्षेत्र, रीति-रिवाज, दायित्व, अधिकार, हक, विशेषाधिकार, प्रतिबंध, छूट, उपयोग, प्रथा, प्रक्रिया या अन्य मामला या वस्तु जो अस्तित्व में नहीं है या लागू नहीं है, उसे संशोधित या बहाल नहीं किया जाएगा;
(f) इस अधिनियम के प्रारंभ होने पर कंपनियों के पंजीकरण के लिए विद्यमान कार्यालय इस प्रकार बने रहेंगे मानो वे इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत स्थापित किए गए हों;
(जी) निरस्त अधिनियमों के तहत पंजीकृत कंपनियों का निगमन वैध बना रहेगा और इस अधिनियम के प्रावधान ऐसी कंपनियों पर इस प्रकार लागू होंगे मानो वे इस अधिनियम के तहत पंजीकृत हों;
(h) निरस्त अधिनियमों के तहत गठित और स्थापित सभी रजिस्टर और सभी निधियां इस अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत गठित या स्थापित रजिस्टर और निधियां मानी जाएंगी;
(i) निरस्त अधिनियमों के तहत शुरू की गई और इस अधिनियम के प्रारंभ होने से ठीक पहले किसी न्यायालय के समक्ष लंबित कोई भी अभियोग, इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, उक्त न्यायालय द्वारा सुना और निपटाया जाता रहेगा;
(j) कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) के तहत आदेशित कोई भी निरीक्षण, जांच या पूछताछ उसी प्रकार जारी रहेगी जैसे कि ऐसा निरीक्षण, जांच या पूछताछ इस अधिनियम के संगत प्रावधानों के तहत आदेशित की गई हो; और
(k) इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) के तहत रजिस्ट्रार, क्षेत्रीय निदेशक या केंद्र सरकार के पास दायर किया गया कोई भी मामला, जिसका उस समय पूरी तरह से समाधान नहीं किया गया हो, रजिस्ट्रार, क्षेत्रीय निदेशक या केंद्र सरकार द्वारा, जैसा भी मामला हो, उस अधिनियम के अनुसार, उसके निरस्त होने के बावजूद, निपटाया जाएगा।
(3) उपधारा (2) में विशिष्ट मामलों का उल्लेख, निरस्त अधिनियमों के निरसन के प्रभाव के संबंध में सामान्य खंड अधिनियम, 1897 (10 ऑफ 1897) की धारा 6 के सामान्य अनुप्रयोग पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा, मानो कंपनी पंजीकरण (सिक्किम) अधिनियम, 1961 (सिक्किम अधिनियम 8 ऑफ 1961) भी एक केंद्रीय अधिनियम हो।
बशर्ते कि कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) के भाग IX ए के प्रावधान उत्पादक कंपनी पर यथावश्यक परिवर्तनों के साथ इस प्रकार लागू होंगे मानो कंपनी अधिनियम, 1956 को निरस्त नहीं किया गया हो, जब तक कि उत्पादक कंपनियों के लिए कोई विशेष अधिनियम अधिनियमित नहीं किया जाता है:
इसके अलावा, जब तक केंद्र सरकार द्वारा धारा 434 की उपधारा (1) के तहत सभी मामलों, कार्यवाहियों या मुकदमों को न्यायाधिकरण में स्थानांतरित करने के लिए कोई तिथि अधिसूचित नहीं की जाती है, तब तक कंपनी विधि प्रशासन बोर्ड और न्यायालय के अधिकार क्षेत्र, शक्तियों, अधिकार और कार्यों के संबंध में कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) के प्रावधान इस प्रकार लागू रहेंगे मानो कंपनी अधिनियम, 1956 निरस्त नहीं किया गया हो।
इसके अलावा, यह भी प्रावधान है कि सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 (2009 का 6) की धारा 67 के तहत जारी अधिसूचना में संदर्भित कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) के प्रावधान, जब तक कि इस अधिनियम के प्रासंगिक संबंधित प्रावधानों को सीमित देयता भागीदारी पर लागू करने वाली ऐसी धारा के तहत प्रासंगिक अधिसूचना जारी नहीं हो जाती, तब तक लागू रहेंगे मानो कंपनी अधिनियम, 1956 निरस्त नहीं हुआ हो।
(2) निरस्त अधिनियमों की उपधारा (1) के तहत निरस्त किए जाने के बावजूद,--
(क) निरस्त अधिनियमों के तहत किया गया कोई भी कार्य या की गई कोई भी कार्रवाई, जिसमें कोई नियम, अधिसूचना, निरीक्षण, आदेश या नोटिस जारी करना या कोई नियुक्ति या घोषणा करना या कोई संचालन करना या कोई निर्देश देना या कोई कार्यवाही करना या कोई दंड, सजा, ज़ब्ती या जुर्माना लगाना शामिल है, इस अधिनियम के प्रावधानों के साथ असंगत न होने की सीमा तक, इस अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत किया गया या लिया गया माना जाएगा;
(ख) खंड (क) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, किसी निरस्त अधिनियम के अधीन या उसके अनुसरण में बनाया गया कोई आदेश, नियम, अधिसूचना, विनियम, नियुक्ति, हस्तांतरण, गिरवी, विलेख, दस्तावेज या समझौता, निर्देशित शुल्क, पारित संकल्प, दिया गया निर्देश, की गई कार्यवाही, निष्पादित या जारी किया गया उपकरण, या किया गया कार्य, यदि इस अधिनियम के प्रारंभ होने के समय लागू था, तो लागू रहेगा और इस अधिनियम के अधीन या उसके अनुसरण में बनाए गए, निर्देशित किए गए, पारित किए गए, दिए गए, लिए गए, निष्पादित किए गए, जारी किए गए या किए गए कार्य के समान प्रभावी होगा;
(ग) विधि का कोई सिद्धांत या नियम, या स्थापित क्षेत्राधिकार, अभिवेदन का रूप या तरीका, प्रथा या प्रक्रिया या मौजूदा उपयोग, रीति-रिवाज, विशेषाधिकार, प्रतिबंध या छूट प्रभावित नहीं होगी, भले ही निरस्त अधिनियमों द्वारा, उनमें या उनसे किसी भी प्रकार से पुष्टि या मान्यता प्राप्त या व्युत्पन्न किया गया हो;
(घ) किसी निरस्त अधिनियम के अधीन या उसके आधार पर किसी पद पर नियुक्त कोई व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन या उसके आधार पर उस पद पर नियुक्त माना जाएगा;
(ई) कोई भी अधिकार क्षेत्र, रीति-रिवाज, दायित्व, अधिकार, हक, विशेषाधिकार, प्रतिबंध, छूट, उपयोग, प्रथा, प्रक्रिया या अन्य मामला या वस्तु जो अस्तित्व में नहीं है या लागू नहीं है, उसे संशोधित या बहाल नहीं किया जाएगा;
(f) इस अधिनियम के प्रारंभ होने पर कंपनियों के पंजीकरण के लिए विद्यमान कार्यालय इस प्रकार बने रहेंगे मानो वे इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत स्थापित किए गए हों;
(जी) निरस्त अधिनियमों के तहत पंजीकृत कंपनियों का निगमन वैध बना रहेगा और इस अधिनियम के प्रावधान ऐसी कंपनियों पर इस प्रकार लागू होंगे मानो वे इस अधिनियम के तहत पंजीकृत हों;
(h) निरस्त अधिनियमों के तहत गठित और स्थापित सभी रजिस्टर और सभी निधियां इस अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत गठित या स्थापित रजिस्टर और निधियां मानी जाएंगी;
(i) निरस्त अधिनियमों के तहत शुरू की गई और इस अधिनियम के प्रारंभ होने से ठीक पहले किसी न्यायालय के समक्ष लंबित कोई भी अभियोग, इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, उक्त न्यायालय द्वारा सुना और निपटाया जाता रहेगा;
(j) कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) के तहत आदेशित कोई भी निरीक्षण, जांच या पूछताछ उसी प्रकार जारी रहेगी जैसे कि ऐसा निरीक्षण, जांच या पूछताछ इस अधिनियम के संगत प्रावधानों के तहत आदेशित की गई हो; और
(k) इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) के तहत रजिस्ट्रार, क्षेत्रीय निदेशक या केंद्र सरकार के पास दायर किया गया कोई भी मामला, जिसका उस समय पूरी तरह से समाधान नहीं किया गया हो, रजिस्ट्रार, क्षेत्रीय निदेशक या केंद्र सरकार द्वारा, जैसा भी मामला हो, उस अधिनियम के अनुसार, उसके निरस्त होने के बावजूद, निपटाया जाएगा।
(3) उपधारा (2) में विशिष्ट मामलों का उल्लेख, निरस्त अधिनियमों के निरसन के प्रभाव के संबंध में सामान्य खंड अधिनियम, 1897 (10 ऑफ 1897) की धारा 6 के सामान्य अनुप्रयोग पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा, मानो कंपनी पंजीकरण (सिक्किम) अधिनियम, 1961 (सिक्किम अधिनियम 8 ऑफ 1961) भी एक केंद्रीय अधिनियम हो।
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