The Companies Act, 2013 371अध्याय XXI · PARTI.--Companies authorised to Register under this Act
धारा 371 · इस भाग के अंतर्गत पंजीकरण का प्रभाव।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जब इस भाग के अनुसरण में कोई कंपनी पंजीकृत की जाती है, तो उपधारा (2) से (7) लागू होंगी।
(2) संसद के किसी अधिनियम या उस समय लागू किसी अन्य कानून, या कंपनी के गठन या विनियमन से संबंधित किसी अन्य दस्तावेज में निहित सभी प्रावधान, जिनमें गारंटी द्वारा सीमित कंपनी के रूप में पंजीकृत कंपनी के मामले में गारंटी की राशि घोषित करने वाला संकल्प भी शामिल है, कंपनी की शर्तें और नियम माने जाएंगे, उसी प्रकार और उसी अर्थों के साथ जैसे कि यदि कंपनी का गठन इस अधिनियम के तहत किया गया होता तो ज्ञापन में शामिल किए जाने वाले प्रावधान पंजीकृत ज्ञापन में शामिल होते और शेष प्रावधान पंजीकृत लेखों में शामिल होते।
(3) इस अधिनियम के सभी प्रावधान कंपनी और उसके सदस्यों, अंशदाताओं और लेनदारों पर सभी मामलों में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे कि कंपनी का गठन इस अधिनियम के तहत किया गया हो, बशर्ते कि निम्नलिखित शर्तें लागू हों:--
(क) अनुसूची 1 में सारणी एफ तब तक लागू नहीं होगी जब तक कि इसे विशेष प्रस्ताव द्वारा अपनाया न जाए;
(ख) इस अधिनियम के शेयरों की क्रमांकन संबंधी प्रावधान किसी ऐसी कंपनी पर लागू नहीं होंगे जिसके शेयरों का क्रमांकन नहीं किया गया हो;
(ग) कंपनी के परिसमापन की स्थिति में, पंजीकरण से पूर्व अनुबंधित कंपनी के ऋणों और देनदारियों के संबंध में, प्रत्येक व्यक्ति अंशदाता होगा, जो पंजीकरण से पूर्व अनुबंधित कंपनी के किसी ऋण या देनदारी के भुगतान या अंशदान के लिए उत्तरदायी है, या ऐसे किसी ऋण या देनदारी के संबंध में सदस्यों के अधिकारों के समायोजन हेतु किसी राशि के भुगतान या अंशदान के लिए उत्तरदायी है, या कंपनी के परिसमापन की लागत, शुल्क और व्यय के भुगतान या अंशदान के लिए उत्तरदायी है, जहां तक उक्त ऋणों या देनदारियों से संबंधित है;
(घ) यदि कंपनी का परिसमापन किया जाता है, तो प्रत्येक अंशदाता परिसमापन की प्रक्रिया के दौरान कंपनी की परिसंपत्तियों में उपर्युक्त किसी भी दायित्व के संबंध में उससे देय सभी राशियों का अंशदान करने के लिए उत्तरदायी होगा; और किसी अंशदाता की मृत्यु या दिवालियापन की स्थिति में, मृतक अंशदाताओं के कानूनी प्रतिनिधियों या दिवालिया अंशदाताओं के उत्तराधिकारियों के संबंध में इस अधिनियम के प्रावधान, जैसा भी मामला हो, लागू होंगे।
(4) इस अधिनियम के प्रावधान निम्नलिखित के संबंध में--
(क) किसी असीमित कंपनी का सीमित कंपनी के रूप में पंजीकरण;
(ख) किसी असीमित कंपनी को सीमित कंपनी के रूप में पंजीकृत होने पर, अपनी शेयर पूंजी की नाममात्र राशि बढ़ाने और यह प्रावधान करने की शक्तियाँ कि उसकी शेयर पूंजी का एक हिस्सा परिसमापन की स्थिति को छोड़कर किसी अन्य स्थिति में नहीं मांगा जा सकेगा;
(ग) किसी सीमित कंपनी की यह शक्ति कि वह यह निर्धारित कर सके कि उसकी शेयर पूंजी का एक हिस्सा परिसमापन की स्थिति को छोड़कर किसी अन्य स्थिति में नहीं मांगा जा सकेगा।
संसद के किसी भी अधिनियम या उस समय लागू किसी अन्य कानून, या कंपनी का गठन या विनियमन करने वाले किसी अन्य दस्तावेज में किसी भी बात के होते हुए भी, यह लागू होगा।
(5) इस धारा में कोई बात कंपनी को कंपनी के गठन या विनियमन से संबंधित किसी भी दस्तावेज में निहित ऐसे प्रावधानों को बदलने के लिए अधिकृत नहीं करेगी, जो कि यदि कंपनी मूल रूप से इस अधिनियम के तहत गठित की गई होती, तो ज्ञापन में निहित होना आवश्यक होता और इस अधिनियम द्वारा परिवर्तित करने के लिए अधिकृत नहीं है।
(6) इस अधिनियम के किसी भी प्रावधान (धारा 242 के प्रावधानों के अलावा) कंपनी के संविधान या विनियमों में परिवर्तन करने की किसी भी शक्ति को कम नहीं करेगा, जो संसद के किसी अधिनियम या उस समय लागू किसी अन्य कानून या कंपनी का गठन या विनियमन करने वाले किसी अन्य साधन के आधार पर कंपनी में निहित हो।
(7) इस खंड में, 'इंस्ट्रूमेंट' अभिव्यक्ति में समझौता विलेख, साझेदारी विलेख, या सीमित देयता साझेदारी विलेख शामिल है।
(2) संसद के किसी अधिनियम या उस समय लागू किसी अन्य कानून, या कंपनी के गठन या विनियमन से संबंधित किसी अन्य दस्तावेज में निहित सभी प्रावधान, जिनमें गारंटी द्वारा सीमित कंपनी के रूप में पंजीकृत कंपनी के मामले में गारंटी की राशि घोषित करने वाला संकल्प भी शामिल है, कंपनी की शर्तें और नियम माने जाएंगे, उसी प्रकार और उसी अर्थों के साथ जैसे कि यदि कंपनी का गठन इस अधिनियम के तहत किया गया होता तो ज्ञापन में शामिल किए जाने वाले प्रावधान पंजीकृत ज्ञापन में शामिल होते और शेष प्रावधान पंजीकृत लेखों में शामिल होते।
(3) इस अधिनियम के सभी प्रावधान कंपनी और उसके सदस्यों, अंशदाताओं और लेनदारों पर सभी मामलों में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे कि कंपनी का गठन इस अधिनियम के तहत किया गया हो, बशर्ते कि निम्नलिखित शर्तें लागू हों:--
(क) अनुसूची 1 में सारणी एफ तब तक लागू नहीं होगी जब तक कि इसे विशेष प्रस्ताव द्वारा अपनाया न जाए;
(ख) इस अधिनियम के शेयरों की क्रमांकन संबंधी प्रावधान किसी ऐसी कंपनी पर लागू नहीं होंगे जिसके शेयरों का क्रमांकन नहीं किया गया हो;
(ग) कंपनी के परिसमापन की स्थिति में, पंजीकरण से पूर्व अनुबंधित कंपनी के ऋणों और देनदारियों के संबंध में, प्रत्येक व्यक्ति अंशदाता होगा, जो पंजीकरण से पूर्व अनुबंधित कंपनी के किसी ऋण या देनदारी के भुगतान या अंशदान के लिए उत्तरदायी है, या ऐसे किसी ऋण या देनदारी के संबंध में सदस्यों के अधिकारों के समायोजन हेतु किसी राशि के भुगतान या अंशदान के लिए उत्तरदायी है, या कंपनी के परिसमापन की लागत, शुल्क और व्यय के भुगतान या अंशदान के लिए उत्तरदायी है, जहां तक उक्त ऋणों या देनदारियों से संबंधित है;
(घ) यदि कंपनी का परिसमापन किया जाता है, तो प्रत्येक अंशदाता परिसमापन की प्रक्रिया के दौरान कंपनी की परिसंपत्तियों में उपर्युक्त किसी भी दायित्व के संबंध में उससे देय सभी राशियों का अंशदान करने के लिए उत्तरदायी होगा; और किसी अंशदाता की मृत्यु या दिवालियापन की स्थिति में, मृतक अंशदाताओं के कानूनी प्रतिनिधियों या दिवालिया अंशदाताओं के उत्तराधिकारियों के संबंध में इस अधिनियम के प्रावधान, जैसा भी मामला हो, लागू होंगे।
(4) इस अधिनियम के प्रावधान निम्नलिखित के संबंध में--
(क) किसी असीमित कंपनी का सीमित कंपनी के रूप में पंजीकरण;
(ख) किसी असीमित कंपनी को सीमित कंपनी के रूप में पंजीकृत होने पर, अपनी शेयर पूंजी की नाममात्र राशि बढ़ाने और यह प्रावधान करने की शक्तियाँ कि उसकी शेयर पूंजी का एक हिस्सा परिसमापन की स्थिति को छोड़कर किसी अन्य स्थिति में नहीं मांगा जा सकेगा;
(ग) किसी सीमित कंपनी की यह शक्ति कि वह यह निर्धारित कर सके कि उसकी शेयर पूंजी का एक हिस्सा परिसमापन की स्थिति को छोड़कर किसी अन्य स्थिति में नहीं मांगा जा सकेगा।
संसद के किसी भी अधिनियम या उस समय लागू किसी अन्य कानून, या कंपनी का गठन या विनियमन करने वाले किसी अन्य दस्तावेज में किसी भी बात के होते हुए भी, यह लागू होगा।
(5) इस धारा में कोई बात कंपनी को कंपनी के गठन या विनियमन से संबंधित किसी भी दस्तावेज में निहित ऐसे प्रावधानों को बदलने के लिए अधिकृत नहीं करेगी, जो कि यदि कंपनी मूल रूप से इस अधिनियम के तहत गठित की गई होती, तो ज्ञापन में निहित होना आवश्यक होता और इस अधिनियम द्वारा परिवर्तित करने के लिए अधिकृत नहीं है।
(6) इस अधिनियम के किसी भी प्रावधान (धारा 242 के प्रावधानों के अलावा) कंपनी के संविधान या विनियमों में परिवर्तन करने की किसी भी शक्ति को कम नहीं करेगा, जो संसद के किसी अधिनियम या उस समय लागू किसी अन्य कानून या कंपनी का गठन या विनियमन करने वाले किसी अन्य साधन के आधार पर कंपनी में निहित हो।
(7) इस खंड में, 'इंस्ट्रूमेंट' अभिव्यक्ति में समझौता विलेख, साझेदारी विलेख, या सीमित देयता साझेदारी विलेख शामिल है।
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