The Companies Act, 2013 224अध्याय XIV · Inspection, Inquiry and Investigation
धारा 224 · निरीक्षक की रिपोर्ट के अनुसरण में की जाने वाली कार्रवाई।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) यदि धारा 223 के तहत निरीक्षक की रिपोर्ट से केंद्र सरकार को यह प्रतीत होता है कि किसी व्यक्ति ने कंपनी के संबंध में या किसी अन्य निगमित निकाय या अन्य व्यक्ति के संबंध में, जिसके मामलों की इस अध्याय के तहत जांच की गई है, किसी ऐसे अपराध का दोषी पाया गया है जिसके लिए वह आपराधिक रूप से उत्तरदायी है, तो केंद्र सरकार ऐसे व्यक्ति पर उस अपराध के लिए मुकदमा चला सकती है और कंपनी या निगमित निकाय के सभी अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों का यह कर्तव्य होगा कि वे अभियोजन के संबंध में केंद्र सरकार को आवश्यक सहायता प्रदान करें।
(2) यदि कोई कंपनी या अन्य निगमित निकाय इस अधिनियम 1 [या दिवालियापन और दिवालिया संहिता, 2016 (31 ऑफ 2016)] के तहत परिसमापन के लिए उत्तरदायी है और केंद्र सरकार को धारा 223 के तहत बनाई गई किसी रिपोर्ट से यह प्रतीत होता है कि धारा 213 में निर्दिष्ट किसी भी परिस्थिति के कारण ऐसा करना उचित है, तो केंद्र सरकार, जब तक कि कंपनी या निगमित निकाय का परिसमापन न्यायाधिकरण द्वारा पहले से ही नहीं किया जा रहा हो, इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा अधिकृत किसी व्यक्ति के माध्यम से न्यायाधिकरण के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करवा सकती है--
(क) कंपनी या निगमित निकाय के परिसमापन के लिए याचिका इस आधार पर कि इसका परिसमापन न्यायसंगत और उचित है;
(ख) धारा 241 के तहत आवेदन; या
(सी) दोनों।
(3) यदि उपर्युक्त किसी रिपोर्ट से केंद्र सरकार को यह प्रतीत होता है कि जनहित में उस कंपनी या किसी निगमित निकाय द्वारा कार्यवाही की जानी चाहिए जिसके मामलों की इस अध्याय के अंतर्गत जांच की गई है--
(क) ऐसी कंपनी या निगमित निकाय के प्रचार या गठन, या उसके कामकाज के प्रबंधन के संबंध में किसी धोखाधड़ी, कदाचार या अन्य दुराचार के लिए क्षतिपूर्ति की वसूली हेतु; या
(ख) ऐसी कंपनी या निगमित निकाय की किसी संपत्ति की वसूली के लिए जिसका दुरुपयोग किया गया हो या जिसे गलत तरीके से अपने पास रखा गया हो,
केंद्र सरकार स्वयं ऐसी कंपनी या निगमित निकाय के नाम पर परिसमापन की कार्यवाही शुरू कर सकती है।
(4) केंद्र सरकार को ऐसी कंपनी या निगमित निकाय द्वारा उपधारा (3) के आधार पर लाई गई किसी भी कार्यवाही में या उसके संबंध में किए गए किसी भी खर्च या व्यय के लिए क्षतिपूर्ति की जाएगी।
(5) यदि किसी निरीक्षक की रिपोर्ट में यह कहा गया हो कि किसी कंपनी में धोखाधड़ी हुई है और ऐसी धोखाधड़ी के कारण किसी निदेशक, प्रमुख प्रबंधकीय अधिकारी, कंपनी के किसी अन्य अधिकारी या किसी अन्य व्यक्ति या संस्था ने किसी परिसंपत्ति, संपत्ति या नकदी के रूप में या किसी अन्य तरीके से अनुचित लाभ उठाया है, तो केंद्र सरकार न्यायाधिकरण के समक्ष ऐसी परिसंपत्ति, संपत्ति या नकदी की वापसी के संबंध में उचित आदेशों के लिए आवेदन कर सकती है, और साथ ही ऐसे निदेशक, प्रमुख प्रबंधकीय अधिकारी, अधिकारी या अन्य व्यक्ति को बिना किसी सीमा के व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी ठहराने के लिए भी आवेदन कर सकती है।
(2) यदि कोई कंपनी या अन्य निगमित निकाय इस अधिनियम 1 [या दिवालियापन और दिवालिया संहिता, 2016 (31 ऑफ 2016)] के तहत परिसमापन के लिए उत्तरदायी है और केंद्र सरकार को धारा 223 के तहत बनाई गई किसी रिपोर्ट से यह प्रतीत होता है कि धारा 213 में निर्दिष्ट किसी भी परिस्थिति के कारण ऐसा करना उचित है, तो केंद्र सरकार, जब तक कि कंपनी या निगमित निकाय का परिसमापन न्यायाधिकरण द्वारा पहले से ही नहीं किया जा रहा हो, इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा अधिकृत किसी व्यक्ति के माध्यम से न्यायाधिकरण के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करवा सकती है--
(क) कंपनी या निगमित निकाय के परिसमापन के लिए याचिका इस आधार पर कि इसका परिसमापन न्यायसंगत और उचित है;
(ख) धारा 241 के तहत आवेदन; या
(सी) दोनों।
(3) यदि उपर्युक्त किसी रिपोर्ट से केंद्र सरकार को यह प्रतीत होता है कि जनहित में उस कंपनी या किसी निगमित निकाय द्वारा कार्यवाही की जानी चाहिए जिसके मामलों की इस अध्याय के अंतर्गत जांच की गई है--
(क) ऐसी कंपनी या निगमित निकाय के प्रचार या गठन, या उसके कामकाज के प्रबंधन के संबंध में किसी धोखाधड़ी, कदाचार या अन्य दुराचार के लिए क्षतिपूर्ति की वसूली हेतु; या
(ख) ऐसी कंपनी या निगमित निकाय की किसी संपत्ति की वसूली के लिए जिसका दुरुपयोग किया गया हो या जिसे गलत तरीके से अपने पास रखा गया हो,
केंद्र सरकार स्वयं ऐसी कंपनी या निगमित निकाय के नाम पर परिसमापन की कार्यवाही शुरू कर सकती है।
(4) केंद्र सरकार को ऐसी कंपनी या निगमित निकाय द्वारा उपधारा (3) के आधार पर लाई गई किसी भी कार्यवाही में या उसके संबंध में किए गए किसी भी खर्च या व्यय के लिए क्षतिपूर्ति की जाएगी।
(5) यदि किसी निरीक्षक की रिपोर्ट में यह कहा गया हो कि किसी कंपनी में धोखाधड़ी हुई है और ऐसी धोखाधड़ी के कारण किसी निदेशक, प्रमुख प्रबंधकीय अधिकारी, कंपनी के किसी अन्य अधिकारी या किसी अन्य व्यक्ति या संस्था ने किसी परिसंपत्ति, संपत्ति या नकदी के रूप में या किसी अन्य तरीके से अनुचित लाभ उठाया है, तो केंद्र सरकार न्यायाधिकरण के समक्ष ऐसी परिसंपत्ति, संपत्ति या नकदी की वापसी के संबंध में उचित आदेशों के लिए आवेदन कर सकती है, और साथ ही ऐसे निदेशक, प्रमुख प्रबंधकीय अधिकारी, अधिकारी या अन्य व्यक्ति को बिना किसी सीमा के व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी ठहराने के लिए भी आवेदन कर सकती है।
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