The Companies Act, 2013 452अध्याय XXIX · Miscellaneous
धारा 452 · संपत्ति को गलत तरीके से रोके रखने पर दंड
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) यदि किसी कंपनी का कोई अधिकारी या कर्मचारी--
(क) कंपनी की किसी भी संपत्ति, जिसमें नकदी भी शामिल है, पर गलत तरीके से कब्जा प्राप्त करता है; या
(ख) यदि वह अपने कब्जे में ऐसी कोई संपत्ति, जिसमें नकदी भी शामिल है, रखता है, तो उसे गलत तरीके से रोक लेता है या जानबूझकर उसका उपयोग उन उद्देश्यों के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए करता है जो इस अधिनियम के अनुच्छेदों में व्यक्त या निर्देशित हैं तथा इस अधिनियम द्वारा अधिकृत हैं।
कंपनी या उसके किसी सदस्य, लेनदार या अंशदाता की शिकायत पर, उसे कम से कम एक लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया जाएगा, जो पांच लाख रुपये तक हो सकता है।
(2) उपधारा (1) के तहत किसी अपराध की सुनवाई करने वाला न्यायालय ऐसे अधिकारी या कर्मचारी को आदेश दे सकता है कि वह उसके द्वारा निर्धारित समय के भीतर, गलत तरीके से प्राप्त की गई, गलत तरीके से रोकी गई या जानबूझकर दुरुपयोग की गई किसी भी संपत्ति या नकदी को, या ऐसी संपत्ति या नकदी से प्राप्त लाभों को लौटा दे या वापस कर दे, अन्यथा उसे दो वर्ष तक के कारावास का सामना करना पड़ सकता है।
(क) कंपनी की किसी भी संपत्ति, जिसमें नकदी भी शामिल है, पर गलत तरीके से कब्जा प्राप्त करता है; या
(ख) यदि वह अपने कब्जे में ऐसी कोई संपत्ति, जिसमें नकदी भी शामिल है, रखता है, तो उसे गलत तरीके से रोक लेता है या जानबूझकर उसका उपयोग उन उद्देश्यों के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए करता है जो इस अधिनियम के अनुच्छेदों में व्यक्त या निर्देशित हैं तथा इस अधिनियम द्वारा अधिकृत हैं।
कंपनी या उसके किसी सदस्य, लेनदार या अंशदाता की शिकायत पर, उसे कम से कम एक लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया जाएगा, जो पांच लाख रुपये तक हो सकता है।
(2) उपधारा (1) के तहत किसी अपराध की सुनवाई करने वाला न्यायालय ऐसे अधिकारी या कर्मचारी को आदेश दे सकता है कि वह उसके द्वारा निर्धारित समय के भीतर, गलत तरीके से प्राप्त की गई, गलत तरीके से रोकी गई या जानबूझकर दुरुपयोग की गई किसी भी संपत्ति या नकदी को, या ऐसी संपत्ति या नकदी से प्राप्त लाभों को लौटा दे या वापस कर दे, अन्यथा उसे दो वर्ष तक के कारावास का सामना करना पड़ सकता है।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 2 वर्ष
- जुर्माना
- ₹5,00,000
- संज्ञेय
- असंज्ञेय
- जमानतीय
- जमानतीय
- विचारण न्यायालय
- कोई भी मजिस्ट्रेट
- असंज्ञेय — पुलिस बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के जाँच नहीं कर सकती
- जमानतीय — जमानत आपका अधिकार है — थाने से भी मिल सकती है
इसी अधिनियम के अपने उपबंध के अनुसार
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
