The Companies Act, 2013 131अध्याय IX · Accounts of Companies
धारा 131 · वित्तीय विवरणों या बोर्ड की रिपोर्ट का स्वैच्छिक संशोधन
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) यदि किसी कंपनी के निदेशकों को यह प्रतीत होता है कि--
(क) कंपनी का वित्तीय विवरण; या
(ख) बोर्ड की रिपोर्ट,
यदि कोई कंपनी धारा 129 या धारा 134 के प्रावधानों का अनुपालन नहीं करती है, तो वह निर्धारित प्रपत्र और तरीके से किए गए आवेदन पर न्यायाधिकरण की स्वीकृति प्राप्त करने के बाद पिछले तीन वित्तीय वर्षों में से किसी एक के संबंध में संशोधित वित्तीय विवरण या संशोधित रिपोर्ट तैयार कर सकती है और न्यायाधिकरण द्वारा पारित आदेश की एक प्रति रजिस्ट्रार के पास दाखिल की जाएगी।
बशर्ते कि न्यायाधिकरण केंद्र सरकार और आयकर अधिकारियों को नोटिस देगा और इस धारा के तहत कोई भी आदेश पारित करने से पहले उस सरकार या अधिकारियों द्वारा दिए गए अभ्यावेदनों (यदि कोई हो) पर विचार करेगा:
इसके अलावा, यह भी प्रावधान है कि इस प्रकार का संशोधित वित्तीय विवरण या रिपोर्ट एक वित्तीय वर्ष में एक से अधिक बार तैयार या प्रस्तुत नहीं की जाएगी:
इसके अलावा, यह भी प्रावधान है कि ऐसे वित्तीय विवरण या रिपोर्ट में संशोधन के विस्तृत कारणों का खुलासा संबंधित वित्तीय वर्ष में बोर्ड की रिपोर्ट में किया जाएगा, जिस वर्ष में ऐसा संशोधन किया जा रहा है।
(2) जहां पूर्व वित्तीय विवरण या रिपोर्ट की प्रतियां सदस्यों को भेजी गई हों या रजिस्ट्रार को सौंपी गई हों या कंपनी की आम बैठक में प्रस्तुत की गई हों, वहां संशोधन केवल निम्नलिखित तक ही सीमित होने चाहिए--
(क) वह सुधार जिसके संबंध में पूर्व वित्तीय विवरण या रिपोर्ट धारा 129 या धारा 134 के प्रावधानों का अनुपालन नहीं करती; और
(ख) किसी भी आवश्यक परिणामी परिवर्तन को करना।
(3) केंद्र सरकार संशोधित वित्तीय विवरण या संशोधित निदेशक की रिपोर्ट के संबंध में इस अधिनियम के प्रावधानों के लागू होने के बारे में नियम बना सकती है और ऐसे नियम, विशेष रूप से--
(क) ऐसे विभिन्न प्रावधान करना जिनके अनुसार पूर्व वित्तीय विवरण या रिपोर्ट को सुधारों को दर्शाने वाले दस्तावेज़ द्वारा प्रतिस्थापित या पूरक किया जाता है;
(ख) संशोधित वित्तीय विवरण या रिपोर्ट के संबंध में कंपनी के लेखा परीक्षक के कार्यों के संबंध में प्रावधान करना;
(ग) निदेशकों को ऐसे कदम उठाने के लिए कहना जो निर्धारित किए जा सकें।
(क) कंपनी का वित्तीय विवरण; या
(ख) बोर्ड की रिपोर्ट,
यदि कोई कंपनी धारा 129 या धारा 134 के प्रावधानों का अनुपालन नहीं करती है, तो वह निर्धारित प्रपत्र और तरीके से किए गए आवेदन पर न्यायाधिकरण की स्वीकृति प्राप्त करने के बाद पिछले तीन वित्तीय वर्षों में से किसी एक के संबंध में संशोधित वित्तीय विवरण या संशोधित रिपोर्ट तैयार कर सकती है और न्यायाधिकरण द्वारा पारित आदेश की एक प्रति रजिस्ट्रार के पास दाखिल की जाएगी।
बशर्ते कि न्यायाधिकरण केंद्र सरकार और आयकर अधिकारियों को नोटिस देगा और इस धारा के तहत कोई भी आदेश पारित करने से पहले उस सरकार या अधिकारियों द्वारा दिए गए अभ्यावेदनों (यदि कोई हो) पर विचार करेगा:
इसके अलावा, यह भी प्रावधान है कि इस प्रकार का संशोधित वित्तीय विवरण या रिपोर्ट एक वित्तीय वर्ष में एक से अधिक बार तैयार या प्रस्तुत नहीं की जाएगी:
इसके अलावा, यह भी प्रावधान है कि ऐसे वित्तीय विवरण या रिपोर्ट में संशोधन के विस्तृत कारणों का खुलासा संबंधित वित्तीय वर्ष में बोर्ड की रिपोर्ट में किया जाएगा, जिस वर्ष में ऐसा संशोधन किया जा रहा है।
(2) जहां पूर्व वित्तीय विवरण या रिपोर्ट की प्रतियां सदस्यों को भेजी गई हों या रजिस्ट्रार को सौंपी गई हों या कंपनी की आम बैठक में प्रस्तुत की गई हों, वहां संशोधन केवल निम्नलिखित तक ही सीमित होने चाहिए--
(क) वह सुधार जिसके संबंध में पूर्व वित्तीय विवरण या रिपोर्ट धारा 129 या धारा 134 के प्रावधानों का अनुपालन नहीं करती; और
(ख) किसी भी आवश्यक परिणामी परिवर्तन को करना।
(3) केंद्र सरकार संशोधित वित्तीय विवरण या संशोधित निदेशक की रिपोर्ट के संबंध में इस अधिनियम के प्रावधानों के लागू होने के बारे में नियम बना सकती है और ऐसे नियम, विशेष रूप से--
(क) ऐसे विभिन्न प्रावधान करना जिनके अनुसार पूर्व वित्तीय विवरण या रिपोर्ट को सुधारों को दर्शाने वाले दस्तावेज़ द्वारा प्रतिस्थापित या पूरक किया जाता है;
(ख) संशोधित वित्तीय विवरण या रिपोर्ट के संबंध में कंपनी के लेखा परीक्षक के कार्यों के संबंध में प्रावधान करना;
(ग) निदेशकों को ऐसे कदम उठाने के लिए कहना जो निर्धारित किए जा सकें।
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