The Companies Act, 2013 197अध्याय XIII · Appointment and Remuneration of Managerial Personnel
धारा 197 · कुल अधिकतम प्रबंधकीय पारिश्रमिक और लाभ की अनुपस्थिति या अपर्याप्तता की स्थिति में प्रबंधकीय पारिश्रमिक।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) किसी सार्वजनिक कंपनी द्वारा अपने निदेशकों, प्रबंध निदेशक और पूर्णकालिक निदेशक सहित, और अपने प्रबंधक को किसी वित्तीय वर्ष के लिए देय कुल प्रबंधकीय पारिश्रमिक उस वित्तीय वर्ष के लिए धारा 198 में निर्धारित तरीके से गणना किए गए उस कंपनी के शुद्ध लाभ के ग्यारह प्रतिशत से अधिक नहीं होगा, सिवाय इसके कि निदेशकों का पारिश्रमिक सकल लाभ से नहीं घटाया जाएगा।
बशर्ते कि कंपनी आम बैठक में, अनुसूची V के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, कंपनी के शुद्ध लाभ के ग्यारह प्रतिशत से अधिक पारिश्रमिक के भुगतान को अधिकृत कर सकती है:
इसके अलावा, कंपनी की आम बैठक में विशेष प्रस्ताव द्वारा अनुमोदन के अलावा, 2--
(i) किसी एक प्रबंध निदेशक या पूर्णकालिक निदेशक या प्रबंधक को देय पारिश्रमिक कंपनी के शुद्ध लाभ के पाँच प्रतिशत से अधिक नहीं होगा; और यदि एक से अधिक ऐसे निदेशक हैं, तो सभी निदेशकों और प्रबंधकों को मिलाकर दिया जाने वाला पारिश्रमिक शुद्ध लाभ के दस प्रतिशत से अधिक नहीं होगा;
(ii) प्रबंध निदेशक और पूर्णकालिक निदेशक न होने वाले निदेशकों को देय पारिश्रमिक इससे अधिक नहीं होगा,--
(ए) कंपनी के शुद्ध लाभ का एक प्रतिशत, यदि कोई प्रबंध निदेशक या पूर्णकालिक निदेशक या प्रबंधक हो;
(बी) किसी अन्य मामले में शुद्ध लाभ का तीन प्रतिशत।
3. इसके अलावा, यदि कंपनी किसी बैंक या सार्वजनिक वित्तीय संस्था या गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर धारकों या किसी अन्य सुरक्षित लेनदार को देय राशि के भुगतान में चूक करती है, तो आम बैठक में अनुमोदन प्राप्त करने से पहले कंपनी को संबंधित बैंक या सार्वजनिक वित्तीय संस्था या गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर धारकों या अन्य सुरक्षित लेनदार, जैसा भी मामला हो, का पूर्व अनुमोदन प्राप्त करना होगा।
(2) उपर्युक्त प्रतिशत उपधारा (5) के अधीन निदेशकों को देय किसी भी शुल्क को छोड़कर होंगे।
(3) उप-धारा (1) और (2) में किसी बात के होते हुए भी, लेकिन अनुसूची V के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, यदि किसी वित्तीय वर्ष में किसी कंपनी को लाभ नहीं होता है या उसका लाभ अपर्याप्त होता है, तो कंपनी अपने निदेशकों, जिनमें कोई प्रबंध निदेशक या पूर्णकालिक निदेशक या प्रबंधक शामिल हैं, 4 [या कोई अन्य गैर-कार्यकारी निदेशक, जिनमें स्वतंत्र निदेशक शामिल हैं] को पारिश्रमिक के रूप में उप-धारा (5) के तहत निदेशकों को देय किसी भी शुल्क के अतिरिक्त कोई राशि अनुसूची V के प्रावधानों के अनुसार ही भुगतान करेगी।
(4) किसी कंपनी के निदेशकों, जिनमें प्रबंध निदेशक या पूर्णकालिक निदेशक या प्रबंधक शामिल हैं, को देय पारिश्रमिक, इस धारा के प्रावधानों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए, कंपनी के नियमों द्वारा, या किसी प्रस्ताव द्वारा, या यदि नियमों में ऐसा अपेक्षित हो, तो कंपनी की आम बैठक में पारित किसी विशेष प्रस्ताव द्वारा निर्धारित किया जाएगा, और उपर्युक्त रूप से निर्धारित निदेशक को देय पारिश्रमिक में उसके द्वारा किसी अन्य क्षमता में प्रदान की गई सेवाओं के लिए देय पारिश्रमिक भी शामिल होगा।
बशर्ते कि किसी अन्य क्षमता में ऐसे निदेशक द्वारा प्रदान की गई सेवाओं के लिए कोई पारिश्रमिक इसमें शामिल नहीं किया जाएगा यदि--
(क) प्रदान की गई सेवाएं व्यावसायिक प्रकृति की हैं; और
(ख) नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति की राय में, यदि कंपनी धारा 178 की उपधारा (1) के अंतर्गत आती है, या अन्य मामलों में निदेशक मंडल की राय में, निदेशक पेशे के अभ्यास के लिए आवश्यक योग्यता रखता है।
(5) कोई निदेशक बोर्ड या उसकी समिति की बैठकों में उपस्थित होने के लिए या बोर्ड द्वारा तय किए गए किसी अन्य उद्देश्य के लिए शुल्क के रूप में पारिश्रमिक प्राप्त कर सकता है:
बशर्ते कि ऐसे शुल्कों की राशि निर्धारित राशि से अधिक नहीं होगी:
इसके अलावा, विभिन्न प्रकार की कंपनियों के लिए अलग-अलग शुल्क और स्वतंत्र निदेशक के संबंध में शुल्क ऐसे हो सकते हैं जैसे निर्धारित किए जाएं।
(6) किसी निदेशक या प्रबंधक को पारिश्रमिक मासिक भुगतान के रूप में या कंपनी के शुद्ध लाभ के एक निर्दिष्ट प्रतिशत के रूप में या आंशिक रूप से एक तरीके से और आंशिक रूप से दूसरे तरीके से दिया जा सकता है।
6 * * * * * *
(8) इस धारा के प्रयोजनों के लिए शुद्ध लाभ की गणना धारा 198 में निर्दिष्ट तरीके से की जाएगी।
7 [(9) यदि कोई निदेशक इस धारा द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक राशि पारिश्रमिक के रूप में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त करता है या इस धारा के तहत आवश्यक अनुमोदन के बिना प्राप्त करता है, तो वह ऐसी राशि कंपनी को दो वर्ष के भीतर या कंपनी द्वारा अनुमत कम अवधि के भीतर वापस कर देगा, और जब तक ऐसी राशि वापस नहीं कर दी जाती, तब तक वह उसे कंपनी के लिए न्यास में रखेगा।]
(10) कंपनी उप-धारा ( 9 ) के तहत उसे वापस की जाने वाली किसी भी राशि की वसूली को माफ नहीं करेगी, जब तक कि [कंपनी द्वारा राशि वापस किए जाने की तारीख से दो साल के भीतर विशेष संकल्प द्वारा अनुमोदित न किया जाए।]
9. [बशर्ते कि यदि कंपनी किसी बैंक या सार्वजनिक वित्तीय संस्था या गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर धारकों या किसी अन्य सुरक्षित लेनदार को देय राशि के भुगतान में चूक करती है, तो कंपनी को ऐसी छूट की स्वीकृति प्राप्त करने से पहले संबंधित बैंक या सार्वजनिक वित्तीय संस्था या गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर धारकों या अन्य सुरक्षित लेनदार, जैसा भी मामला हो, की पूर्व स्वीकृति प्राप्त करनी होगी।]
(11) ऐसे मामलों में जहां लाभ न होने या अपर्याप्त लाभ के आधार पर अनुसूची V लागू होती है, किसी निदेशक के पारिश्रमिक से संबंधित कोई भी प्रावधान, जो उसकी राशि बढ़ाने का आशय रखता है या बढ़ाने का प्रभाव रखता है, चाहे वह प्रावधान कंपनी के ज्ञापन या लेखों में हो, या उसके द्वारा किए गए किसी समझौते में हो, या कंपनी की आम बैठक या उसके बोर्ड द्वारा पारित किसी प्रस्ताव में हो, तब तक प्रभावी नहीं होगा जब तक कि ऐसी वृद्धि उस अनुसूची 10 *** में निर्दिष्ट शर्तों के अनुसार न हो।
(12) प्रत्येक सूचीबद्ध कंपनी बोर्ड की रिपोर्ट में प्रत्येक निदेशक के पारिश्रमिक और कर्मचारियों के औसत पारिश्रमिक के अनुपात तथा अन्य विवरणों का खुलासा करेगी, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(13) यदि कोई कंपनी अपने प्रबंध निदेशक, पूर्णकालिक निदेशक, प्रबंधक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मुख्य वित्तीय अधिकारी या कंपनी सचिव की ओर से किसी लापरवाही, चूक, कदाचार, कर्तव्य उल्लंघन या विश्वासघात के लिए, जिसके लिए वे कंपनी के संबंध में दोषी हो सकते हैं, किसी दायित्व से उन्हें क्षतिपूर्ति प्रदान करने के लिए कोई बीमा कराती है, तो ऐसे बीमा पर भुगतान किया गया प्रीमियम ऐसे किसी भी कर्मचारी को देय पारिश्रमिक का हिस्सा नहीं माना जाएगा।
बशर्ते कि यदि ऐसे व्यक्ति का दोष सिद्ध हो जाता है, तो ऐसे बीमा पर भुगतान किया गया प्रीमियम पारिश्रमिक का हिस्सा माना जाएगा।
(14) इस धारा के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, कोई भी निदेशक जो कंपनी से कोई कमीशन प्राप्त करता है और जो कंपनी का प्रबंध निदेशक या पूर्णकालिक निदेशक है, ऐसी कंपनी की किसी होल्डिंग कंपनी या सहायक कंपनी से कोई पारिश्रमिक या कमीशन प्राप्त करने से अयोग्य नहीं होगा, बशर्ते कि कंपनी द्वारा बोर्ड की रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया हो।
11 [(15) यदि कोई व्यक्ति इस धारा के प्रावधानों का पालन करने में चूक करता है, तो वह एक लाख रुपये के जुर्माने का उत्तरदायी होगा और यदि किसी कंपनी द्वारा चूक की गई है, तो कंपनी पांच लाख रुपये के जुर्माने का उत्तरदायी होगी।]
12 [(16) कंपनी का लेखा परीक्षक धारा 143 के तहत अपनी रिपोर्ट में यह बताएगा कि क्या कंपनी द्वारा अपने निदेशकों को दिया गया पारिश्रमिक इस धारा के प्रावधानों के अनुसार है, क्या किसी निदेशक को दिया गया पारिश्रमिक इस धारा के तहत निर्धारित सीमा से अधिक है और ऐसे अन्य विवरण देगा जो निर्धारित किए जा सकते हैं।
(17) कंपनी (संशोधन) अधिनियम, 2017 के प्रारंभ होने की तिथि से, इस धारा के प्रावधानों के अंतर्गत केंद्र सरकार को किया गया कोई भी आवेदन [जैसा कि यह अधिनियम के प्रारंभ होने से पूर्व में था], जो उस सरकार के पास लंबित है, समाप्त हो जाएगा, और कंपनी को ऐसे प्रारंभ होने के एक वर्ष के भीतर, इस धारा के संशोधित प्रावधानों के अनुसार अनुमोदन प्राप्त करना होगा।]
बशर्ते कि कंपनी आम बैठक में, अनुसूची V के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, कंपनी के शुद्ध लाभ के ग्यारह प्रतिशत से अधिक पारिश्रमिक के भुगतान को अधिकृत कर सकती है:
इसके अलावा, कंपनी की आम बैठक में विशेष प्रस्ताव द्वारा अनुमोदन के अलावा, 2--
(i) किसी एक प्रबंध निदेशक या पूर्णकालिक निदेशक या प्रबंधक को देय पारिश्रमिक कंपनी के शुद्ध लाभ के पाँच प्रतिशत से अधिक नहीं होगा; और यदि एक से अधिक ऐसे निदेशक हैं, तो सभी निदेशकों और प्रबंधकों को मिलाकर दिया जाने वाला पारिश्रमिक शुद्ध लाभ के दस प्रतिशत से अधिक नहीं होगा;
(ii) प्रबंध निदेशक और पूर्णकालिक निदेशक न होने वाले निदेशकों को देय पारिश्रमिक इससे अधिक नहीं होगा,--
(ए) कंपनी के शुद्ध लाभ का एक प्रतिशत, यदि कोई प्रबंध निदेशक या पूर्णकालिक निदेशक या प्रबंधक हो;
(बी) किसी अन्य मामले में शुद्ध लाभ का तीन प्रतिशत।
3. इसके अलावा, यदि कंपनी किसी बैंक या सार्वजनिक वित्तीय संस्था या गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर धारकों या किसी अन्य सुरक्षित लेनदार को देय राशि के भुगतान में चूक करती है, तो आम बैठक में अनुमोदन प्राप्त करने से पहले कंपनी को संबंधित बैंक या सार्वजनिक वित्तीय संस्था या गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर धारकों या अन्य सुरक्षित लेनदार, जैसा भी मामला हो, का पूर्व अनुमोदन प्राप्त करना होगा।
(2) उपर्युक्त प्रतिशत उपधारा (5) के अधीन निदेशकों को देय किसी भी शुल्क को छोड़कर होंगे।
(3) उप-धारा (1) और (2) में किसी बात के होते हुए भी, लेकिन अनुसूची V के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, यदि किसी वित्तीय वर्ष में किसी कंपनी को लाभ नहीं होता है या उसका लाभ अपर्याप्त होता है, तो कंपनी अपने निदेशकों, जिनमें कोई प्रबंध निदेशक या पूर्णकालिक निदेशक या प्रबंधक शामिल हैं, 4 [या कोई अन्य गैर-कार्यकारी निदेशक, जिनमें स्वतंत्र निदेशक शामिल हैं] को पारिश्रमिक के रूप में उप-धारा (5) के तहत निदेशकों को देय किसी भी शुल्क के अतिरिक्त कोई राशि अनुसूची V के प्रावधानों के अनुसार ही भुगतान करेगी।
(4) किसी कंपनी के निदेशकों, जिनमें प्रबंध निदेशक या पूर्णकालिक निदेशक या प्रबंधक शामिल हैं, को देय पारिश्रमिक, इस धारा के प्रावधानों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए, कंपनी के नियमों द्वारा, या किसी प्रस्ताव द्वारा, या यदि नियमों में ऐसा अपेक्षित हो, तो कंपनी की आम बैठक में पारित किसी विशेष प्रस्ताव द्वारा निर्धारित किया जाएगा, और उपर्युक्त रूप से निर्धारित निदेशक को देय पारिश्रमिक में उसके द्वारा किसी अन्य क्षमता में प्रदान की गई सेवाओं के लिए देय पारिश्रमिक भी शामिल होगा।
बशर्ते कि किसी अन्य क्षमता में ऐसे निदेशक द्वारा प्रदान की गई सेवाओं के लिए कोई पारिश्रमिक इसमें शामिल नहीं किया जाएगा यदि--
(क) प्रदान की गई सेवाएं व्यावसायिक प्रकृति की हैं; और
(ख) नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति की राय में, यदि कंपनी धारा 178 की उपधारा (1) के अंतर्गत आती है, या अन्य मामलों में निदेशक मंडल की राय में, निदेशक पेशे के अभ्यास के लिए आवश्यक योग्यता रखता है।
(5) कोई निदेशक बोर्ड या उसकी समिति की बैठकों में उपस्थित होने के लिए या बोर्ड द्वारा तय किए गए किसी अन्य उद्देश्य के लिए शुल्क के रूप में पारिश्रमिक प्राप्त कर सकता है:
बशर्ते कि ऐसे शुल्कों की राशि निर्धारित राशि से अधिक नहीं होगी:
इसके अलावा, विभिन्न प्रकार की कंपनियों के लिए अलग-अलग शुल्क और स्वतंत्र निदेशक के संबंध में शुल्क ऐसे हो सकते हैं जैसे निर्धारित किए जाएं।
(6) किसी निदेशक या प्रबंधक को पारिश्रमिक मासिक भुगतान के रूप में या कंपनी के शुद्ध लाभ के एक निर्दिष्ट प्रतिशत के रूप में या आंशिक रूप से एक तरीके से और आंशिक रूप से दूसरे तरीके से दिया जा सकता है।
6 * * * * * *
(8) इस धारा के प्रयोजनों के लिए शुद्ध लाभ की गणना धारा 198 में निर्दिष्ट तरीके से की जाएगी।
7 [(9) यदि कोई निदेशक इस धारा द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक राशि पारिश्रमिक के रूप में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त करता है या इस धारा के तहत आवश्यक अनुमोदन के बिना प्राप्त करता है, तो वह ऐसी राशि कंपनी को दो वर्ष के भीतर या कंपनी द्वारा अनुमत कम अवधि के भीतर वापस कर देगा, और जब तक ऐसी राशि वापस नहीं कर दी जाती, तब तक वह उसे कंपनी के लिए न्यास में रखेगा।]
(10) कंपनी उप-धारा ( 9 ) के तहत उसे वापस की जाने वाली किसी भी राशि की वसूली को माफ नहीं करेगी, जब तक कि [कंपनी द्वारा राशि वापस किए जाने की तारीख से दो साल के भीतर विशेष संकल्प द्वारा अनुमोदित न किया जाए।]
9. [बशर्ते कि यदि कंपनी किसी बैंक या सार्वजनिक वित्तीय संस्था या गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर धारकों या किसी अन्य सुरक्षित लेनदार को देय राशि के भुगतान में चूक करती है, तो कंपनी को ऐसी छूट की स्वीकृति प्राप्त करने से पहले संबंधित बैंक या सार्वजनिक वित्तीय संस्था या गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर धारकों या अन्य सुरक्षित लेनदार, जैसा भी मामला हो, की पूर्व स्वीकृति प्राप्त करनी होगी।]
(11) ऐसे मामलों में जहां लाभ न होने या अपर्याप्त लाभ के आधार पर अनुसूची V लागू होती है, किसी निदेशक के पारिश्रमिक से संबंधित कोई भी प्रावधान, जो उसकी राशि बढ़ाने का आशय रखता है या बढ़ाने का प्रभाव रखता है, चाहे वह प्रावधान कंपनी के ज्ञापन या लेखों में हो, या उसके द्वारा किए गए किसी समझौते में हो, या कंपनी की आम बैठक या उसके बोर्ड द्वारा पारित किसी प्रस्ताव में हो, तब तक प्रभावी नहीं होगा जब तक कि ऐसी वृद्धि उस अनुसूची 10 *** में निर्दिष्ट शर्तों के अनुसार न हो।
(12) प्रत्येक सूचीबद्ध कंपनी बोर्ड की रिपोर्ट में प्रत्येक निदेशक के पारिश्रमिक और कर्मचारियों के औसत पारिश्रमिक के अनुपात तथा अन्य विवरणों का खुलासा करेगी, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(13) यदि कोई कंपनी अपने प्रबंध निदेशक, पूर्णकालिक निदेशक, प्रबंधक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मुख्य वित्तीय अधिकारी या कंपनी सचिव की ओर से किसी लापरवाही, चूक, कदाचार, कर्तव्य उल्लंघन या विश्वासघात के लिए, जिसके लिए वे कंपनी के संबंध में दोषी हो सकते हैं, किसी दायित्व से उन्हें क्षतिपूर्ति प्रदान करने के लिए कोई बीमा कराती है, तो ऐसे बीमा पर भुगतान किया गया प्रीमियम ऐसे किसी भी कर्मचारी को देय पारिश्रमिक का हिस्सा नहीं माना जाएगा।
बशर्ते कि यदि ऐसे व्यक्ति का दोष सिद्ध हो जाता है, तो ऐसे बीमा पर भुगतान किया गया प्रीमियम पारिश्रमिक का हिस्सा माना जाएगा।
(14) इस धारा के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, कोई भी निदेशक जो कंपनी से कोई कमीशन प्राप्त करता है और जो कंपनी का प्रबंध निदेशक या पूर्णकालिक निदेशक है, ऐसी कंपनी की किसी होल्डिंग कंपनी या सहायक कंपनी से कोई पारिश्रमिक या कमीशन प्राप्त करने से अयोग्य नहीं होगा, बशर्ते कि कंपनी द्वारा बोर्ड की रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया हो।
11 [(15) यदि कोई व्यक्ति इस धारा के प्रावधानों का पालन करने में चूक करता है, तो वह एक लाख रुपये के जुर्माने का उत्तरदायी होगा और यदि किसी कंपनी द्वारा चूक की गई है, तो कंपनी पांच लाख रुपये के जुर्माने का उत्तरदायी होगी।]
12 [(16) कंपनी का लेखा परीक्षक धारा 143 के तहत अपनी रिपोर्ट में यह बताएगा कि क्या कंपनी द्वारा अपने निदेशकों को दिया गया पारिश्रमिक इस धारा के प्रावधानों के अनुसार है, क्या किसी निदेशक को दिया गया पारिश्रमिक इस धारा के तहत निर्धारित सीमा से अधिक है और ऐसे अन्य विवरण देगा जो निर्धारित किए जा सकते हैं।
(17) कंपनी (संशोधन) अधिनियम, 2017 के प्रारंभ होने की तिथि से, इस धारा के प्रावधानों के अंतर्गत केंद्र सरकार को किया गया कोई भी आवेदन [जैसा कि यह अधिनियम के प्रारंभ होने से पूर्व में था], जो उस सरकार के पास लंबित है, समाप्त हो जाएगा, और कंपनी को ऐसे प्रारंभ होने के एक वर्ष के भीतर, इस धारा के संशोधित प्रावधानों के अनुसार अनुमोदन प्राप्त करना होगा।]
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