The Companies Act, 2013 218अध्याय XIV · Inspection, Inquiry and Investigation
धारा 218 · जांच के दौरान कर्मचारियों की सुरक्षा।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) किसी अन्य कानून में इस समय लागू किसी बात के होते हुए भी, यदि--
(क) धारा 210, धारा 212, धारा 213 या धारा 219 के तहत किसी कंपनी, अन्य निगमित निकाय या व्यक्ति के मामलों और अन्य विषयों की जांच के दौरान, या धारा 216 के तहत किसी कंपनी की सदस्यता और अन्य विषयों की जांच के दौरान, या किसी कंपनी या निगमित निकाय के शेयरों या डिबेंचर के स्वामित्व की जांच के दौरान, या किसी कंपनी, अन्य निगमित निकाय या व्यक्ति के मामलों और अन्य विषयों की जांच के दौरान; या
(ख) अध्याय सोलह के अंतर्गत किसी कंपनी के मामलों के संचालन एवं प्रबंधन से संबंधित किसी व्यक्ति के विरुद्ध किसी कार्यवाही के लंबित रहने के दौरान, ऐसी कंपनी, अन्य निगमित निकाय या व्यक्ति प्रस्ताव करता है
(i) किसी कर्मचारी को बर्खास्त या निलंबित करना; या
(ii) उसे बर्खास्त करके, पद से हटाकर, पदोन्नति में कमी करके या किसी अन्य तरीके से दंडित करना; या
(iii) रोजगार की शर्तों को अपने नुकसान के लिए बदलना,
कंपनी, अन्य निगमित निकाय या व्यक्ति, जैसा भी मामला हो, कर्मचारी के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई के लिए न्यायाधिकरण की स्वीकृति प्राप्त करेगा और यदि न्यायाधिकरण को प्रस्तावित कार्रवाई पर कोई आपत्ति है, तो वह संबंधित कंपनी, अन्य निगमित निकाय या व्यक्ति को डाक द्वारा लिखित सूचना भेजेगा।
(2) यदि कंपनी, अन्य निगमित निकाय या संबंधित व्यक्ति उपधारा (1) के तहत आवेदन करने के तीस दिनों के भीतर न्यायाधिकरण की स्वीकृति प्राप्त नहीं करता है, तो और केवल तभी कंपनी, अन्य निगमित निकाय या संबंधित व्यक्ति कर्मचारी के विरुद्ध प्रस्तावित कार्रवाई करने के लिए आगे बढ़ सकता है।
(3) यदि कंपनी, अन्य निगमित निकाय या संबंधित व्यक्ति न्यायाधिकरण द्वारा उठाई गई आपत्ति से असंतुष्ट है, तो वह आपत्ति की सूचना प्राप्त होने के तीस दिनों के भीतर अपीलीय न्यायाधिकरण में ऐसे तरीके से और ऐसे शुल्क का भुगतान करके अपील कर सकता है जैसा कि निर्धारित किया जाए।
(4) ऐसी अपील पर अपीलीय न्यायाधिकरण का निर्णय न्यायाधिकरण और कंपनी, अन्य निगमित निकाय या संबंधित व्यक्ति पर अंतिम और बाध्यकारी होगा।
(5) संदेह दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि इस धारा के प्रावधान किसी अन्य कानून के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना प्रभावी होंगे जो उस समय लागू हो।
(क) धारा 210, धारा 212, धारा 213 या धारा 219 के तहत किसी कंपनी, अन्य निगमित निकाय या व्यक्ति के मामलों और अन्य विषयों की जांच के दौरान, या धारा 216 के तहत किसी कंपनी की सदस्यता और अन्य विषयों की जांच के दौरान, या किसी कंपनी या निगमित निकाय के शेयरों या डिबेंचर के स्वामित्व की जांच के दौरान, या किसी कंपनी, अन्य निगमित निकाय या व्यक्ति के मामलों और अन्य विषयों की जांच के दौरान; या
(ख) अध्याय सोलह के अंतर्गत किसी कंपनी के मामलों के संचालन एवं प्रबंधन से संबंधित किसी व्यक्ति के विरुद्ध किसी कार्यवाही के लंबित रहने के दौरान, ऐसी कंपनी, अन्य निगमित निकाय या व्यक्ति प्रस्ताव करता है
(i) किसी कर्मचारी को बर्खास्त या निलंबित करना; या
(ii) उसे बर्खास्त करके, पद से हटाकर, पदोन्नति में कमी करके या किसी अन्य तरीके से दंडित करना; या
(iii) रोजगार की शर्तों को अपने नुकसान के लिए बदलना,
कंपनी, अन्य निगमित निकाय या व्यक्ति, जैसा भी मामला हो, कर्मचारी के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई के लिए न्यायाधिकरण की स्वीकृति प्राप्त करेगा और यदि न्यायाधिकरण को प्रस्तावित कार्रवाई पर कोई आपत्ति है, तो वह संबंधित कंपनी, अन्य निगमित निकाय या व्यक्ति को डाक द्वारा लिखित सूचना भेजेगा।
(2) यदि कंपनी, अन्य निगमित निकाय या संबंधित व्यक्ति उपधारा (1) के तहत आवेदन करने के तीस दिनों के भीतर न्यायाधिकरण की स्वीकृति प्राप्त नहीं करता है, तो और केवल तभी कंपनी, अन्य निगमित निकाय या संबंधित व्यक्ति कर्मचारी के विरुद्ध प्रस्तावित कार्रवाई करने के लिए आगे बढ़ सकता है।
(3) यदि कंपनी, अन्य निगमित निकाय या संबंधित व्यक्ति न्यायाधिकरण द्वारा उठाई गई आपत्ति से असंतुष्ट है, तो वह आपत्ति की सूचना प्राप्त होने के तीस दिनों के भीतर अपीलीय न्यायाधिकरण में ऐसे तरीके से और ऐसे शुल्क का भुगतान करके अपील कर सकता है जैसा कि निर्धारित किया जाए।
(4) ऐसी अपील पर अपीलीय न्यायाधिकरण का निर्णय न्यायाधिकरण और कंपनी, अन्य निगमित निकाय या संबंधित व्यक्ति पर अंतिम और बाध्यकारी होगा।
(5) संदेह दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि इस धारा के प्रावधान किसी अन्य कानून के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना प्रभावी होंगे जो उस समय लागू हो।
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