The Companies Act, 2013 165अध्याय XI · Appointment and Qualifications of Directors
धारा 165 · निदेशकों की संख्या।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम के प्रारंभ होने के बाद कोई भी व्यक्ति एक ही समय में बीस से अधिक कंपनियों में निदेशक, जिसमें कोई वैकल्पिक निदेशक पद भी शामिल है, के रूप में पद धारण नहीं करेगा:
बशर्ते कि किसी व्यक्ति को निदेशक के रूप में नियुक्त किए जा सकने वाली सार्वजनिक कंपनियों की अधिकतम संख्या दस से अधिक नहीं होगी।
1 [ स्पष्टीकरण 1].-- सार्वजनिक कंपनियों की सीमा की गणना के लिए जिनमें किसी व्यक्ति को निदेशक के रूप में नियुक्त किया जा सकता है, निजी कंपनियों में निदेशक पद, जो किसी सार्वजनिक कंपनी की होल्डिंग या सहायक कंपनी हैं, को शामिल किया जाएगा।
2 [स्पष्टीकरण II.-- बीस कंपनियों के निदेशकों की सीमा की गणना के लिए, निष्क्रिय कंपनी में निदेशक पद को शामिल नहीं किया जाएगा।]
(2) उपधारा (1) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, किसी कंपनी के सदस्य विशेष संकल्प द्वारा कंपनियों की कोई कम संख्या निर्दिष्ट कर सकते हैं जिसमें कंपनी का कोई निदेशक निदेशक के रूप में कार्य कर सकता है।
(3) इस अधिनियम के प्रारंभ होने से ठीक पहले उपधारा (1) में निर्दिष्ट सीमा से अधिक कंपनियों में निदेशक के पद पर आसीन कोई भी व्यक्ति, प्रारंभ होने की तिथि से एक वर्ष के भीतर,--
(क) वह उन कंपनियों की निर्दिष्ट सीमा से अधिक का चयन नहीं कर सकता है, जिनमें वह निदेशक का पद धारण करना जारी रखना चाहता है;
(ख) शेष कंपनियों में निदेशक पद से अपना इस्तीफा दे दें; और
(ग) वह खंड (क) के तहत अपने द्वारा किए गए चुनाव की सूचना उन सभी कंपनियों को देगा जिनमें वह ऐसे प्रारंभ से पहले निदेशक का पद धारण कर रहा था और ऐसी प्रत्येक कंपनी के संबंध में अधिकार क्षेत्र रखने वाले रजिस्ट्रार को भी देगा।
(4) उपधारा (3) के खंड (ख) के अनुसरण में किया गया कोई भी त्यागपत्र संबंधित कंपनी को भेजे जाने पर तुरंत प्रभावी हो जाएगा।
(5) ऐसा कोई भी व्यक्ति निर्दिष्ट संख्या से अधिक कंपनियों में निदेशक के रूप में कार्य नहीं करेगा,--
(क) उपधारा (3) के खंड (ख) के अनुसरण में निदेशक या गैर-कार्यकारी निदेशक के पद से अपना त्यागपत्र भेजने के बाद; या
(ख) इस अधिनियम के प्रारंभ होने के एक वर्ष की समाप्ति के बाद, जो भी पहले हो।
3 [(6) यदि कोई व्यक्ति इस धारा के उल्लंघन में निदेशक के रूप में नियुक्ति स्वीकार करता है, तो वह पहले उल्लंघन के बाद प्रत्येक दिन के लिए दो हजार रुपये के जुर्माने का हकदार होगा, जिस दौरान ऐसा उल्लंघन जारी रहता है, अधिकतम दो लाख रुपये के अधीन।]
बशर्ते कि किसी व्यक्ति को निदेशक के रूप में नियुक्त किए जा सकने वाली सार्वजनिक कंपनियों की अधिकतम संख्या दस से अधिक नहीं होगी।
1 [ स्पष्टीकरण 1].-- सार्वजनिक कंपनियों की सीमा की गणना के लिए जिनमें किसी व्यक्ति को निदेशक के रूप में नियुक्त किया जा सकता है, निजी कंपनियों में निदेशक पद, जो किसी सार्वजनिक कंपनी की होल्डिंग या सहायक कंपनी हैं, को शामिल किया जाएगा।
2 [स्पष्टीकरण II.-- बीस कंपनियों के निदेशकों की सीमा की गणना के लिए, निष्क्रिय कंपनी में निदेशक पद को शामिल नहीं किया जाएगा।]
(2) उपधारा (1) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, किसी कंपनी के सदस्य विशेष संकल्प द्वारा कंपनियों की कोई कम संख्या निर्दिष्ट कर सकते हैं जिसमें कंपनी का कोई निदेशक निदेशक के रूप में कार्य कर सकता है।
(3) इस अधिनियम के प्रारंभ होने से ठीक पहले उपधारा (1) में निर्दिष्ट सीमा से अधिक कंपनियों में निदेशक के पद पर आसीन कोई भी व्यक्ति, प्रारंभ होने की तिथि से एक वर्ष के भीतर,--
(क) वह उन कंपनियों की निर्दिष्ट सीमा से अधिक का चयन नहीं कर सकता है, जिनमें वह निदेशक का पद धारण करना जारी रखना चाहता है;
(ख) शेष कंपनियों में निदेशक पद से अपना इस्तीफा दे दें; और
(ग) वह खंड (क) के तहत अपने द्वारा किए गए चुनाव की सूचना उन सभी कंपनियों को देगा जिनमें वह ऐसे प्रारंभ से पहले निदेशक का पद धारण कर रहा था और ऐसी प्रत्येक कंपनी के संबंध में अधिकार क्षेत्र रखने वाले रजिस्ट्रार को भी देगा।
(4) उपधारा (3) के खंड (ख) के अनुसरण में किया गया कोई भी त्यागपत्र संबंधित कंपनी को भेजे जाने पर तुरंत प्रभावी हो जाएगा।
(5) ऐसा कोई भी व्यक्ति निर्दिष्ट संख्या से अधिक कंपनियों में निदेशक के रूप में कार्य नहीं करेगा,--
(क) उपधारा (3) के खंड (ख) के अनुसरण में निदेशक या गैर-कार्यकारी निदेशक के पद से अपना त्यागपत्र भेजने के बाद; या
(ख) इस अधिनियम के प्रारंभ होने के एक वर्ष की समाप्ति के बाद, जो भी पहले हो।
3 [(6) यदि कोई व्यक्ति इस धारा के उल्लंघन में निदेशक के रूप में नियुक्ति स्वीकार करता है, तो वह पहले उल्लंघन के बाद प्रत्येक दिन के लिए दो हजार रुपये के जुर्माने का हकदार होगा, जिस दौरान ऐसा उल्लंघन जारी रहता है, अधिकतम दो लाख रुपये के अधीन।]
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