The Companies Act, 2013 417अध्याय XXVII · National Company Law Tribunal and Appellate Tribunal
धारा 417 · सदस्यों को हटाना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) केंद्र सरकार, भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करने के बाद, अध्यक्ष, अध्यक्ष या किसी भी सदस्य को पद से हटा सकती है, जो
(क) दिवालिया घोषित किया गया हो; या--
(ख) ऐसे अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो, जो केंद्र सरकार की राय में नैतिक पतन से संबंधित हो; या
(ग) राष्ट्रपति, अध्यक्ष या सदस्य के रूप में कार्य करने के लिए शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम हो गया हो; या
(घ) ने ऐसा वित्तीय या अन्य हित अर्जित कर लिया है जिससे राष्ट्रपति, अध्यक्ष या सदस्य के रूप में उनके कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है; या
(ई) उसने अपने पद का इस प्रकार दुरुपयोग किया है कि उसका पद पर बने रहना जनहित के लिए हानिकारक है:
बशर्ते कि अध्यक्ष, अध्यक्ष या सदस्य को खंड (ख) से (ङ) में निर्दिष्ट किसी भी आधार पर सुनवाई का उचित अवसर दिए बिना नहीं हटाया जाएगा।
(2) उपधारा (1) के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, राष्ट्रपति, अध्यक्ष या सदस्य को उनके पद से तब तक नहीं हटाया जाएगा जब तक कि केंद्र सरकार द्वारा सिद्ध दुर्व्यवहार या अक्षमता के आधार पर ऐसा आदेश जारी न किया जाए, जो भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा केंद्र सरकार द्वारा उन्हें भेजे गए संदर्भ पर नामित सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा की गई जांच के बाद जारी किया गया हो, जिसमें ऐसे राष्ट्रपति, अध्यक्ष या सदस्य को उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की सूचना दी गई हो और उन्हें सुनवाई का उचित अवसर दिया गया हो।
(3) केंद्र सरकार, भारत के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से, राष्ट्रपति, अध्यक्ष या सदस्य को, जिसके संबंध में उपधारा (2) के तहत सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को संदर्भ भेजा गया है, पद से निलंबित कर सकती है, जब तक कि केंद्र सरकार ने ऐसे संदर्भ पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की रिपोर्ट प्राप्त होने पर आदेश पारित न कर दिया हो।
(4) केंद्र सरकार, सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श करने के बाद, उपधारा (2) में निर्दिष्ट सिद्ध दुर्व्यवहार या अक्षमता के आधार पर जांच की प्रक्रिया को विनियमित करने के लिए नियम बनाएगी।
(क) दिवालिया घोषित किया गया हो; या--
(ख) ऐसे अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो, जो केंद्र सरकार की राय में नैतिक पतन से संबंधित हो; या
(ग) राष्ट्रपति, अध्यक्ष या सदस्य के रूप में कार्य करने के लिए शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम हो गया हो; या
(घ) ने ऐसा वित्तीय या अन्य हित अर्जित कर लिया है जिससे राष्ट्रपति, अध्यक्ष या सदस्य के रूप में उनके कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है; या
(ई) उसने अपने पद का इस प्रकार दुरुपयोग किया है कि उसका पद पर बने रहना जनहित के लिए हानिकारक है:
बशर्ते कि अध्यक्ष, अध्यक्ष या सदस्य को खंड (ख) से (ङ) में निर्दिष्ट किसी भी आधार पर सुनवाई का उचित अवसर दिए बिना नहीं हटाया जाएगा।
(2) उपधारा (1) के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, राष्ट्रपति, अध्यक्ष या सदस्य को उनके पद से तब तक नहीं हटाया जाएगा जब तक कि केंद्र सरकार द्वारा सिद्ध दुर्व्यवहार या अक्षमता के आधार पर ऐसा आदेश जारी न किया जाए, जो भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा केंद्र सरकार द्वारा उन्हें भेजे गए संदर्भ पर नामित सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा की गई जांच के बाद जारी किया गया हो, जिसमें ऐसे राष्ट्रपति, अध्यक्ष या सदस्य को उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की सूचना दी गई हो और उन्हें सुनवाई का उचित अवसर दिया गया हो।
(3) केंद्र सरकार, भारत के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से, राष्ट्रपति, अध्यक्ष या सदस्य को, जिसके संबंध में उपधारा (2) के तहत सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को संदर्भ भेजा गया है, पद से निलंबित कर सकती है, जब तक कि केंद्र सरकार ने ऐसे संदर्भ पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की रिपोर्ट प्राप्त होने पर आदेश पारित न कर दिया हो।
(4) केंद्र सरकार, सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श करने के बाद, उपधारा (2) में निर्दिष्ट सिद्ध दुर्व्यवहार या अक्षमता के आधार पर जांच की प्रक्रिया को विनियमित करने के लिए नियम बनाएगी।
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