The Companies Act, 2013 73अध्याय V · Acceptance of Deposits by Companies
धारा 73 · जनता से जमा स्वीकार करने पर प्रतिबंध।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम के लागू होने के बाद, कोई भी कंपनी इस अध्याय में दिए गए तरीके के अलावा किसी अन्य तरीके से जनता से इस अधिनियम के तहत जमा आमंत्रित, स्वीकार या नवीनीकृत नहीं करेगी:
बशर्ते कि इस उपधारा में कोई बात भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) में परिभाषित बैंकिंग कंपनी और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी पर तथा ऐसी अन्य कंपनी पर लागू नहीं होगी जिसे केंद्र सरकार भारतीय रिजर्व बैंक से परामर्श करने के बाद इस संबंध में निर्दिष्ट करे।
(2) कोई कंपनी, आम बैठक में प्रस्ताव पारित करके और भारतीय रिज़र्व बैंक के परामर्श से निर्धारित नियमों के अधीन रहते हुए, अपने सदस्यों से ऐसी शर्तों और नियमों पर जमा स्वीकार कर सकती है, जिनमें यदि कोई सुरक्षा प्रदान की जाए या ब्याज सहित ऐसी जमा राशि की वापसी की व्यवस्था की जाए, जैसा कि कंपनी और उसके सदस्यों के बीच सहमति हो, बशर्ते निम्नलिखित शर्तें पूरी हों, अर्थात्:--
(क) अपने सदस्यों को एक परिपत्र जारी करना जिसमें कंपनी की वित्तीय स्थिति, प्राप्त क्रेडिट रेटिंग, जमाकर्ताओं की कुल संख्या और कंपनी द्वारा पहले स्वीकार किए गए किसी भी जमा के संबंध में जमा राशि के लिए देय राशि और ऐसे अन्य विवरणों को ऐसे प्रारूप में और ऐसे तरीके से दर्शाया गया हो जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है;
(ख) परिपत्र जारी होने की तिथि से तीस दिन पहले ऐसे विवरण के साथ परिपत्र की एक प्रति रजिस्ट्रार के पास दाखिल करना;
1 [(ग) प्रत्येक वर्ष तीस अप्रैल को या उससे पहले, ऐसी राशि जमा करना जो अगले वित्तीय वर्ष के दौरान परिपक्व होने वाली उसकी जमा राशि के बीस प्रतिशत से कम न हो, और जिसे अनुसूचित बैंक में जमा चुकौती आरक्षित खाता कहलाने वाले एक अलग बैंक खाते में रखा जाए;]
2 * * * * *
(ई) यह प्रमाणित करना कि कंपनी ने इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले या बाद में स्वीकार की गई जमा राशि के पुनर्भुगतान या उस पर ब्याज के भुगतान में कोई चूक नहीं की है, 3 [और यदि कोई चूक हुई थी, तो कंपनी ने चूक को ठीक कर दिया है और चूक को ठीक करने की तारीख से पांच वर्ष की अवधि बीत चुकी है;]
(f) जमा राशि या उस पर ब्याज की उचित वापसी के लिए, यदि कोई हो, सुरक्षा प्रदान करना, जिसमें कंपनी की संपत्ति या परिसंपत्तियों पर ऐसा प्रभार बनाना शामिल है:
बशर्ते कि यदि कोई कंपनी जमा राशि की गारंटी नहीं देती है या ऐसी जमा राशि की आंशिक गारंटी देती है, तो ऐसी जमा राशि को असुरक्षित जमा राशि कहा जाएगा और जमा राशि के आमंत्रण या स्वीकृति से संबंधित प्रत्येक परिपत्र, प्रपत्र, विज्ञापन या किसी भी दस्तावेज में इसका उल्लेख इसी प्रकार किया जाएगा।
(3) उपधारा (2) के अधीन किसी कंपनी द्वारा स्वीकार की गई प्रत्येक जमा राशि उस उपधारा में निर्दिष्ट समझौते की शर्तों और नियमों के अनुसार ब्याज सहित वापस की जाएगी।
(4) यदि कोई कंपनी उपधारा (3) के अधीन जमा राशि या उसके किसी भाग या उस पर किसी ब्याज का भुगतान करने में विफल रहती है, तो संबंधित जमाकर्ता कंपनी को देय राशि का भुगतान करने या ऐसे भुगतान न करने के परिणामस्वरूप उसे हुई किसी हानि या क्षति के लिए तथा न्यायाधिकरण द्वारा उचित समझे जाने वाले अन्य आदेशों के लिए न्यायाधिकरण में आवेदन कर सकता है।
(5) उपधारा (2) के खंड (सी) में निर्दिष्ट जमा वापसी आरक्षित खाते का उपयोग कंपनी द्वारा जमा की वापसी के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा।
बशर्ते कि इस उपधारा में कोई बात भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) में परिभाषित बैंकिंग कंपनी और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी पर तथा ऐसी अन्य कंपनी पर लागू नहीं होगी जिसे केंद्र सरकार भारतीय रिजर्व बैंक से परामर्श करने के बाद इस संबंध में निर्दिष्ट करे।
(2) कोई कंपनी, आम बैठक में प्रस्ताव पारित करके और भारतीय रिज़र्व बैंक के परामर्श से निर्धारित नियमों के अधीन रहते हुए, अपने सदस्यों से ऐसी शर्तों और नियमों पर जमा स्वीकार कर सकती है, जिनमें यदि कोई सुरक्षा प्रदान की जाए या ब्याज सहित ऐसी जमा राशि की वापसी की व्यवस्था की जाए, जैसा कि कंपनी और उसके सदस्यों के बीच सहमति हो, बशर्ते निम्नलिखित शर्तें पूरी हों, अर्थात्:--
(क) अपने सदस्यों को एक परिपत्र जारी करना जिसमें कंपनी की वित्तीय स्थिति, प्राप्त क्रेडिट रेटिंग, जमाकर्ताओं की कुल संख्या और कंपनी द्वारा पहले स्वीकार किए गए किसी भी जमा के संबंध में जमा राशि के लिए देय राशि और ऐसे अन्य विवरणों को ऐसे प्रारूप में और ऐसे तरीके से दर्शाया गया हो जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है;
(ख) परिपत्र जारी होने की तिथि से तीस दिन पहले ऐसे विवरण के साथ परिपत्र की एक प्रति रजिस्ट्रार के पास दाखिल करना;
1 [(ग) प्रत्येक वर्ष तीस अप्रैल को या उससे पहले, ऐसी राशि जमा करना जो अगले वित्तीय वर्ष के दौरान परिपक्व होने वाली उसकी जमा राशि के बीस प्रतिशत से कम न हो, और जिसे अनुसूचित बैंक में जमा चुकौती आरक्षित खाता कहलाने वाले एक अलग बैंक खाते में रखा जाए;]
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(ई) यह प्रमाणित करना कि कंपनी ने इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले या बाद में स्वीकार की गई जमा राशि के पुनर्भुगतान या उस पर ब्याज के भुगतान में कोई चूक नहीं की है, 3 [और यदि कोई चूक हुई थी, तो कंपनी ने चूक को ठीक कर दिया है और चूक को ठीक करने की तारीख से पांच वर्ष की अवधि बीत चुकी है;]
(f) जमा राशि या उस पर ब्याज की उचित वापसी के लिए, यदि कोई हो, सुरक्षा प्रदान करना, जिसमें कंपनी की संपत्ति या परिसंपत्तियों पर ऐसा प्रभार बनाना शामिल है:
बशर्ते कि यदि कोई कंपनी जमा राशि की गारंटी नहीं देती है या ऐसी जमा राशि की आंशिक गारंटी देती है, तो ऐसी जमा राशि को असुरक्षित जमा राशि कहा जाएगा और जमा राशि के आमंत्रण या स्वीकृति से संबंधित प्रत्येक परिपत्र, प्रपत्र, विज्ञापन या किसी भी दस्तावेज में इसका उल्लेख इसी प्रकार किया जाएगा।
(3) उपधारा (2) के अधीन किसी कंपनी द्वारा स्वीकार की गई प्रत्येक जमा राशि उस उपधारा में निर्दिष्ट समझौते की शर्तों और नियमों के अनुसार ब्याज सहित वापस की जाएगी।
(4) यदि कोई कंपनी उपधारा (3) के अधीन जमा राशि या उसके किसी भाग या उस पर किसी ब्याज का भुगतान करने में विफल रहती है, तो संबंधित जमाकर्ता कंपनी को देय राशि का भुगतान करने या ऐसे भुगतान न करने के परिणामस्वरूप उसे हुई किसी हानि या क्षति के लिए तथा न्यायाधिकरण द्वारा उचित समझे जाने वाले अन्य आदेशों के लिए न्यायाधिकरण में आवेदन कर सकता है।
(5) उपधारा (2) के खंड (सी) में निर्दिष्ट जमा वापसी आरक्षित खाते का उपयोग कंपनी द्वारा जमा की वापसी के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा।
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