The Companies Act, 2013 424अध्याय XXVII · National Company Law Tribunal and Appellate Tribunal
धारा 424 · न्यायाधिकरण और अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष प्रक्रिया।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) न्यायाधिकरण और अपीलीय न्यायाधिकरण, अपने समक्ष किसी कार्यवाही या, जैसा भी मामला हो, अपने समक्ष अपील का निपटारा करते समय, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (5 ऑफ 1908) में निर्धारित प्रक्रिया से बाध्य नहीं होंगे, बल्कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होंगे, और इस अधिनियम 1 [या दिवालियापन और दिवालिया संहिता, 2016 (31 ऑफ 2016)] और इसके अंतर्गत बनाए गए किसी भी नियम के अन्य प्रावधानों के अधीन रहते हुए, न्यायाधिकरण और अपीलीय न्यायाधिकरण को अपनी प्रक्रिया को विनियमित करने का अधिकार होगा।
(2) इस अधिनियम 1 [या दिवालियापन एवं दिवालिया संहिता, 2016 (31 ऑफ 2016)] के तहत अपने कार्यों का निर्वहन करने के प्रयोजन से, न्यायाधिकरण और अपीलीय न्यायाधिकरण को वही शक्तियां प्राप्त होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (5 ऑफ 1908) के तहत किसी सिविल न्यायालय को निम्नलिखित मामलों के संबंध में किसी मुकदमे की सुनवाई करते समय प्राप्त होती हैं, अर्थात्:--
(क) किसी व्यक्ति को बुलाना और उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा शपथ पर उससे पूछताछ करना;
(ख) दस्तावेजों की खोज और प्रस्तुति की आवश्यकता;
(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना;
(घ) भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1 ऑफ 1872) की धारा 123 और 124 के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, किसी कार्यालय से किसी सार्वजनिक अभिलेख या दस्तावेज या ऐसे अभिलेख या दस्तावेज की प्रति की मांग करना;
(ई) गवाहों या दस्तावेजों की जांच के लिए आयोग जारी करना;
(f) चूक के कारण किसी अभ्यावेदन को खारिज करना या उस पर एकतरफा निर्णय लेना;
(जी) चूक के कारण किसी अभ्यावेदन को खारिज करने के किसी आदेश या उसके द्वारा एकतरफा पारित किसी आदेश को रद्द करना; और
(h) कोई अन्य मामला जो निर्धारित किया जा सके।
(3) न्यायाधिकरण या अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा दिया गया कोई भी आदेश उस न्यायाधिकरण द्वारा उसी प्रकार लागू किया जा सकता है जैसे कि वह किसी न्यायालय द्वारा उसमें लंबित मुकदमे में दिया गया निर्णय हो, और न्यायाधिकरण या अपीलीय न्यायाधिकरण के लिए यह वैध होगा कि वह अपने आदेशों के निष्पादन के लिए उस न्यायालय को भेजे जिसके अधिकार क्षेत्र की स्थानीय सीमा के भीतर,--
(क) किसी कंपनी के विरुद्ध आदेश के मामले में, कंपनी का पंजीकृत कार्यालय स्थित है; या
(ख) किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध आदेश के मामले में, संबंधित व्यक्ति स्वेच्छा से निवास करता है या व्यवसाय करता है या व्यक्तिगत रूप से लाभ के लिए काम करता है।
(4) न्यायाधिकरण या अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष सभी कार्यवाही धारा 193 और 228 के अर्थ में तथा भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 196 के प्रयोजनों के लिए न्यायिक कार्यवाही मानी जाएगी, और न्यायाधिकरण और अपीलीय न्यायाधिकरण को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 195 और अध्याय XXVI के प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय माना जाएगा।
(2) इस अधिनियम 1 [या दिवालियापन एवं दिवालिया संहिता, 2016 (31 ऑफ 2016)] के तहत अपने कार्यों का निर्वहन करने के प्रयोजन से, न्यायाधिकरण और अपीलीय न्यायाधिकरण को वही शक्तियां प्राप्त होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (5 ऑफ 1908) के तहत किसी सिविल न्यायालय को निम्नलिखित मामलों के संबंध में किसी मुकदमे की सुनवाई करते समय प्राप्त होती हैं, अर्थात्:--
(क) किसी व्यक्ति को बुलाना और उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा शपथ पर उससे पूछताछ करना;
(ख) दस्तावेजों की खोज और प्रस्तुति की आवश्यकता;
(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना;
(घ) भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1 ऑफ 1872) की धारा 123 और 124 के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, किसी कार्यालय से किसी सार्वजनिक अभिलेख या दस्तावेज या ऐसे अभिलेख या दस्तावेज की प्रति की मांग करना;
(ई) गवाहों या दस्तावेजों की जांच के लिए आयोग जारी करना;
(f) चूक के कारण किसी अभ्यावेदन को खारिज करना या उस पर एकतरफा निर्णय लेना;
(जी) चूक के कारण किसी अभ्यावेदन को खारिज करने के किसी आदेश या उसके द्वारा एकतरफा पारित किसी आदेश को रद्द करना; और
(h) कोई अन्य मामला जो निर्धारित किया जा सके।
(3) न्यायाधिकरण या अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा दिया गया कोई भी आदेश उस न्यायाधिकरण द्वारा उसी प्रकार लागू किया जा सकता है जैसे कि वह किसी न्यायालय द्वारा उसमें लंबित मुकदमे में दिया गया निर्णय हो, और न्यायाधिकरण या अपीलीय न्यायाधिकरण के लिए यह वैध होगा कि वह अपने आदेशों के निष्पादन के लिए उस न्यायालय को भेजे जिसके अधिकार क्षेत्र की स्थानीय सीमा के भीतर,--
(क) किसी कंपनी के विरुद्ध आदेश के मामले में, कंपनी का पंजीकृत कार्यालय स्थित है; या
(ख) किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध आदेश के मामले में, संबंधित व्यक्ति स्वेच्छा से निवास करता है या व्यवसाय करता है या व्यक्तिगत रूप से लाभ के लिए काम करता है।
(4) न्यायाधिकरण या अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष सभी कार्यवाही धारा 193 और 228 के अर्थ में तथा भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 196 के प्रयोजनों के लिए न्यायिक कार्यवाही मानी जाएगी, और न्यायाधिकरण और अपीलीय न्यायाधिकरण को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 195 और अध्याय XXVI के प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय माना जाएगा।
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