The Companies Act, 2013 186अध्याय XII · Meetings of Board and Its Powers
धारा 186 · कंपनी द्वारा ऋण और निवेश
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम में निहित प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, कोई कंपनी, जब तक अन्यथा निर्धारित न हो, निवेश कंपनियों के दो से अधिक स्तरों के माध्यम से निवेश नहीं करेगी:
बशर्ते कि इस उपधारा के प्रावधान निम्नलिखित को प्रभावित नहीं करेंगे,--
(i) किसी कंपनी को भारत के बाहर किसी देश में निगमित किसी अन्य कंपनी का अधिग्रहण करने से रोकना, यदि ऐसी अन्य कंपनी के पास उस देश के कानूनों के अनुसार दो स्तरों से अधिक निवेश सहायक कंपनियां हों;
(ii) किसी सहायक कंपनी को किसी कानून के तहत या किसी कानून के तहत बनाए गए किसी नियम या विनियम के तहत आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से कोई निवेश सहायक कंपनी रखने से रोकना।
(2) कोई भी कंपनी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से.--
(क) किसी व्यक्ति या अन्य निगमित निकाय को कोई ऋण देना;
(ख) किसी अन्य निगमित निकाय या व्यक्ति को ऋण के संबंध में कोई गारंटी देना या सुरक्षा प्रदान करना; और
(ग) सदस्यता, खरीद या किसी अन्य माध्यम से किसी अन्य निगमित निकाय की प्रतिभूतियों का अधिग्रहण करना,
इसकी चुकता शेयर पूंजी, मुक्त भंडार और प्रतिभूति प्रीमियम खाते के साठ प्रतिशत से अधिक या इसके मुक्त भंडार और प्रतिभूति प्रीमियम खाते के सौ प्रतिशत से अधिक, जो भी अधिक हो।
1 [ स्पष्टीकरण.- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, 'व्यक्ति' शब्द में कोई भी ऐसा व्यक्ति शामिल नहीं है जो कंपनी के रोजगार में है।]
2 [(3) जहां अब तक दिए गए ऋणों और निवेशों का कुल योग, अब तक निगमित निकायों को दी गई गारंटी या सुरक्षा की राशि, तथा बोर्ड द्वारा प्रस्तावित निवेश, ऋण, गारंटी या सुरक्षा, उप-धारा (2) के तहत निर्दिष्ट सीमाओं से अधिक हो, तो कोई निवेश या ऋण नहीं दिया जाएगा, न ही गारंटी दी जाएगी और न ही सुरक्षा प्रदान की जाएगी, जब तक कि आम बैठक में पारित विशेष प्रस्ताव द्वारा पूर्व में अधिकृत न किया गया हो:
(बशर्ते कि जहां कोई कंपनी अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी या संयुक्त उद्यम कंपनी को ऋण या गारंटी देती है या कोई प्रतिभूति प्रदान करती है, या किसी होल्डिंग कंपनी द्वारा सदस्यता, खरीद या किसी अन्य माध्यम से अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी की प्रतिभूतियों का अधिग्रहण किया जाता है, तो इस उपधारा की आवश्यकता लागू नहीं होगी:)
इसके अलावा, कंपनी उपधारा (4) के तहत दिए गए प्रावधान के अनुसार वित्तीय विवरण में ऐसे ऋणों, गारंटी, सुरक्षा या अधिग्रहण का विवरण प्रकट करेगी।
(4) कंपनी वित्तीय विवरण में सदस्यों को दिए गए ऋणों, किए गए निवेश, दी गई गारंटी या प्रदान की गई सुरक्षा का पूरा विवरण और वह उद्देश्य जिसके लिए ऋण, गारंटी या सुरक्षा प्राप्तकर्ता द्वारा उपयोग किए जाने का प्रस्ताव है, प्रकट करेगी।
(5) कंपनी द्वारा कोई भी निवेश नहीं किया जाएगा, न ही कोई ऋण, गारंटी या सुरक्षा दी जाएगी, जब तक कि बोर्ड की बैठक में उपस्थित सभी निदेशकों की सहमति से और संबंधित सार्वजनिक वित्तीय संस्था, जहां कोई सावधि ऋण विद्यमान है, की पूर्व स्वीकृति प्राप्त करके इसे स्वीकृत करने वाला प्रस्ताव पारित न हो जाए।
बशर्ते कि किसी सार्वजनिक वित्तीय संस्था की पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी, जहां अब तक दिए गए ऋणों और निवेशों का कुल योग, अब तक निगमित निकायों को दी गई गारंटी या सुरक्षा की राशि, साथ ही प्रस्तावित निवेश, ऋण, गारंटी या सुरक्षा, उप-धारा (2) में निर्दिष्ट सीमा से अधिक नहीं है, और सार्वजनिक वित्तीय संस्था को दिए गए ऐसे ऋण की शर्तों के अनुसार ऋण किस्तों के पुनर्भुगतान या उस पर ब्याज के भुगतान में कोई चूक नहीं है।
(6) कोई भी कंपनी, जो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (15 ऑफ 1992) की धारा 12 के तहत पंजीकृत है और कंपनियों के ऐसे वर्ग या वर्गों के अंतर्गत आती है जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है, निर्धारित सीमा से अधिक अंतर-निगम ऋण या जमा नहीं लेगी और ऐसी कंपनी अपने वित्तीय विवरण में ऋण या जमा का विवरण प्रस्तुत करेगी।
(7) इस धारा के अंतर्गत कोई ऋण उस ब्याज दर से कम दर पर नहीं दिया जाएगा जो ऋण की अवधि के निकटतम एक वर्ष, तीन वर्ष, पांच वर्ष या दस वर्ष की सरकारी प्रतिभूति की प्रचलित उपज से कम हो।
(8) कोई भी कंपनी जो इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले या बाद में स्वीकार की गई किसी भी जमा राशि के पुनर्भुगतान या उस पर ब्याज के भुगतान में चूक करती है, ऐसी चूक के बने रहने तक कोई ऋण नहीं देगी, न ही कोई गारंटी देगी, न ही कोई सुरक्षा प्रदान करेगी, न ही कोई अधिग्रहण करेगी।
(9) इस धारा के अंतर्गत ऋण देने, गारंटी देने, सुरक्षा प्रदान करने या अधिग्रहण करने वाली प्रत्येक कंपनी एक रजिस्टर रखेगी जिसमें ऐसे विवरण होंगे और उसे इस प्रकार से रखा जाएगा जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(10) उपधारा (9) में निर्दिष्ट रजिस्टर कंपनी के पंजीकृत कार्यालय में रखा जाएगा और--
(क) ऐसे कार्यालय में निरीक्षण के लिए उपलब्ध रहेगा; और
(ख) कोई भी सदस्य उससे अंश निकाल सकता है, और कंपनी के किसी भी सदस्य को निर्धारित शुल्क के भुगतान पर उसकी प्रतियां उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
3 [(11) इस धारा में उपधारा (1) के सिवा कोई बात लागू नहीं होगी--
(क) किसी बैंकिंग कंपनी, या बीमा कंपनी, या आवास वित्त कंपनी द्वारा अपने सामान्य व्यवसाय के दौरान दिए गए किसी ऋण, दी गई किसी गारंटी, प्रदान की गई किसी सुरक्षा या किए गए किसी निवेश पर, या औद्योगिक उद्यमों के वित्तपोषण के उद्देश्य से स्थापित और इस व्यवसाय में लगी हुई किसी कंपनी द्वारा, या अवसंरचनात्मक सुविधाएं प्रदान करने के व्यवसाय में;
(ख) किसी भी निवेश के लिए--
(i) किसी निवेश कंपनी द्वारा निर्मित;
(ii) धारा 62 की उपधारा (1) के खंड (क) के अनुसरण में आवंटित शेयरों में या किसी निगमित निकाय द्वारा किए गए अधिकार निर्गमन के अनुसरण में आवंटित शेयरों में किया गया;
(iii) निवेश या ऋण गतिविधियों के संबंध में, भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (2 ऑफ 1934) के अध्याय III-B के तहत पंजीकृत एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी द्वारा किया गया हो, जिसका मुख्य व्यवसाय प्रतिभूतियों का अधिग्रहण हो।]
(12) केंद्र सरकार इस धारा के प्रयोजनों के लिए नियम बना सकती है।
(13) यदि कोई कंपनी इस धारा के प्रावधानों का उल्लंघन करती है, तो कंपनी पर कम से कम पच्चीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जो पाँच लाख रुपये तक हो सकता है, और कंपनी का प्रत्येक अधिकारी जो दोषी पाया जाता है, उसे दो वर्ष तक के कारावास और कम से कम पच्चीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जो एक लाख रुपये तक हो सकता है।
स्पष्टीकरण। -- इस अनुभाग के प्रयोजनों के लिए,
(क) "निवेश कंपनी" अभिव्यक्ति से तात्पर्य ऐसी कंपनी से है जिसका मुख्य व्यवसाय शेयरों, डिबेंचरों या अन्य प्रतिभूतियों का अधिग्रहण करना है];
(ख) "अवसंरचना सुविधाएं" अभिव्यक्ति से तात्पर्य अनुसूची VI में निर्दिष्ट सुविधाओं से है।
बशर्ते कि इस उपधारा के प्रावधान निम्नलिखित को प्रभावित नहीं करेंगे,--
(i) किसी कंपनी को भारत के बाहर किसी देश में निगमित किसी अन्य कंपनी का अधिग्रहण करने से रोकना, यदि ऐसी अन्य कंपनी के पास उस देश के कानूनों के अनुसार दो स्तरों से अधिक निवेश सहायक कंपनियां हों;
(ii) किसी सहायक कंपनी को किसी कानून के तहत या किसी कानून के तहत बनाए गए किसी नियम या विनियम के तहत आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से कोई निवेश सहायक कंपनी रखने से रोकना।
(2) कोई भी कंपनी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से.--
(क) किसी व्यक्ति या अन्य निगमित निकाय को कोई ऋण देना;
(ख) किसी अन्य निगमित निकाय या व्यक्ति को ऋण के संबंध में कोई गारंटी देना या सुरक्षा प्रदान करना; और
(ग) सदस्यता, खरीद या किसी अन्य माध्यम से किसी अन्य निगमित निकाय की प्रतिभूतियों का अधिग्रहण करना,
इसकी चुकता शेयर पूंजी, मुक्त भंडार और प्रतिभूति प्रीमियम खाते के साठ प्रतिशत से अधिक या इसके मुक्त भंडार और प्रतिभूति प्रीमियम खाते के सौ प्रतिशत से अधिक, जो भी अधिक हो।
1 [ स्पष्टीकरण.- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, 'व्यक्ति' शब्द में कोई भी ऐसा व्यक्ति शामिल नहीं है जो कंपनी के रोजगार में है।]
2 [(3) जहां अब तक दिए गए ऋणों और निवेशों का कुल योग, अब तक निगमित निकायों को दी गई गारंटी या सुरक्षा की राशि, तथा बोर्ड द्वारा प्रस्तावित निवेश, ऋण, गारंटी या सुरक्षा, उप-धारा (2) के तहत निर्दिष्ट सीमाओं से अधिक हो, तो कोई निवेश या ऋण नहीं दिया जाएगा, न ही गारंटी दी जाएगी और न ही सुरक्षा प्रदान की जाएगी, जब तक कि आम बैठक में पारित विशेष प्रस्ताव द्वारा पूर्व में अधिकृत न किया गया हो:
(बशर्ते कि जहां कोई कंपनी अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी या संयुक्त उद्यम कंपनी को ऋण या गारंटी देती है या कोई प्रतिभूति प्रदान करती है, या किसी होल्डिंग कंपनी द्वारा सदस्यता, खरीद या किसी अन्य माध्यम से अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी की प्रतिभूतियों का अधिग्रहण किया जाता है, तो इस उपधारा की आवश्यकता लागू नहीं होगी:)
इसके अलावा, कंपनी उपधारा (4) के तहत दिए गए प्रावधान के अनुसार वित्तीय विवरण में ऐसे ऋणों, गारंटी, सुरक्षा या अधिग्रहण का विवरण प्रकट करेगी।
(4) कंपनी वित्तीय विवरण में सदस्यों को दिए गए ऋणों, किए गए निवेश, दी गई गारंटी या प्रदान की गई सुरक्षा का पूरा विवरण और वह उद्देश्य जिसके लिए ऋण, गारंटी या सुरक्षा प्राप्तकर्ता द्वारा उपयोग किए जाने का प्रस्ताव है, प्रकट करेगी।
(5) कंपनी द्वारा कोई भी निवेश नहीं किया जाएगा, न ही कोई ऋण, गारंटी या सुरक्षा दी जाएगी, जब तक कि बोर्ड की बैठक में उपस्थित सभी निदेशकों की सहमति से और संबंधित सार्वजनिक वित्तीय संस्था, जहां कोई सावधि ऋण विद्यमान है, की पूर्व स्वीकृति प्राप्त करके इसे स्वीकृत करने वाला प्रस्ताव पारित न हो जाए।
बशर्ते कि किसी सार्वजनिक वित्तीय संस्था की पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी, जहां अब तक दिए गए ऋणों और निवेशों का कुल योग, अब तक निगमित निकायों को दी गई गारंटी या सुरक्षा की राशि, साथ ही प्रस्तावित निवेश, ऋण, गारंटी या सुरक्षा, उप-धारा (2) में निर्दिष्ट सीमा से अधिक नहीं है, और सार्वजनिक वित्तीय संस्था को दिए गए ऐसे ऋण की शर्तों के अनुसार ऋण किस्तों के पुनर्भुगतान या उस पर ब्याज के भुगतान में कोई चूक नहीं है।
(6) कोई भी कंपनी, जो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (15 ऑफ 1992) की धारा 12 के तहत पंजीकृत है और कंपनियों के ऐसे वर्ग या वर्गों के अंतर्गत आती है जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है, निर्धारित सीमा से अधिक अंतर-निगम ऋण या जमा नहीं लेगी और ऐसी कंपनी अपने वित्तीय विवरण में ऋण या जमा का विवरण प्रस्तुत करेगी।
(7) इस धारा के अंतर्गत कोई ऋण उस ब्याज दर से कम दर पर नहीं दिया जाएगा जो ऋण की अवधि के निकटतम एक वर्ष, तीन वर्ष, पांच वर्ष या दस वर्ष की सरकारी प्रतिभूति की प्रचलित उपज से कम हो।
(8) कोई भी कंपनी जो इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले या बाद में स्वीकार की गई किसी भी जमा राशि के पुनर्भुगतान या उस पर ब्याज के भुगतान में चूक करती है, ऐसी चूक के बने रहने तक कोई ऋण नहीं देगी, न ही कोई गारंटी देगी, न ही कोई सुरक्षा प्रदान करेगी, न ही कोई अधिग्रहण करेगी।
(9) इस धारा के अंतर्गत ऋण देने, गारंटी देने, सुरक्षा प्रदान करने या अधिग्रहण करने वाली प्रत्येक कंपनी एक रजिस्टर रखेगी जिसमें ऐसे विवरण होंगे और उसे इस प्रकार से रखा जाएगा जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(10) उपधारा (9) में निर्दिष्ट रजिस्टर कंपनी के पंजीकृत कार्यालय में रखा जाएगा और--
(क) ऐसे कार्यालय में निरीक्षण के लिए उपलब्ध रहेगा; और
(ख) कोई भी सदस्य उससे अंश निकाल सकता है, और कंपनी के किसी भी सदस्य को निर्धारित शुल्क के भुगतान पर उसकी प्रतियां उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
3 [(11) इस धारा में उपधारा (1) के सिवा कोई बात लागू नहीं होगी--
(क) किसी बैंकिंग कंपनी, या बीमा कंपनी, या आवास वित्त कंपनी द्वारा अपने सामान्य व्यवसाय के दौरान दिए गए किसी ऋण, दी गई किसी गारंटी, प्रदान की गई किसी सुरक्षा या किए गए किसी निवेश पर, या औद्योगिक उद्यमों के वित्तपोषण के उद्देश्य से स्थापित और इस व्यवसाय में लगी हुई किसी कंपनी द्वारा, या अवसंरचनात्मक सुविधाएं प्रदान करने के व्यवसाय में;
(ख) किसी भी निवेश के लिए--
(i) किसी निवेश कंपनी द्वारा निर्मित;
(ii) धारा 62 की उपधारा (1) के खंड (क) के अनुसरण में आवंटित शेयरों में या किसी निगमित निकाय द्वारा किए गए अधिकार निर्गमन के अनुसरण में आवंटित शेयरों में किया गया;
(iii) निवेश या ऋण गतिविधियों के संबंध में, भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (2 ऑफ 1934) के अध्याय III-B के तहत पंजीकृत एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी द्वारा किया गया हो, जिसका मुख्य व्यवसाय प्रतिभूतियों का अधिग्रहण हो।]
(12) केंद्र सरकार इस धारा के प्रयोजनों के लिए नियम बना सकती है।
(13) यदि कोई कंपनी इस धारा के प्रावधानों का उल्लंघन करती है, तो कंपनी पर कम से कम पच्चीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जो पाँच लाख रुपये तक हो सकता है, और कंपनी का प्रत्येक अधिकारी जो दोषी पाया जाता है, उसे दो वर्ष तक के कारावास और कम से कम पच्चीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जो एक लाख रुपये तक हो सकता है।
स्पष्टीकरण। -- इस अनुभाग के प्रयोजनों के लिए,
(क) "निवेश कंपनी" अभिव्यक्ति से तात्पर्य ऐसी कंपनी से है जिसका मुख्य व्यवसाय शेयरों, डिबेंचरों या अन्य प्रतिभूतियों का अधिग्रहण करना है];
(ख) "अवसंरचना सुविधाएं" अभिव्यक्ति से तात्पर्य अनुसूची VI में निर्दिष्ट सुविधाओं से है।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 2 वर्ष
- जुर्माना
- ₹5,00,000
- संज्ञेय
- असंज्ञेय
- जमानतीय
- जमानतीय
- विचारण न्यायालय
- कोई भी मजिस्ट्रेट
- असंज्ञेय — पुलिस बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के जाँच नहीं कर सकती
- जमानतीय — जमानत आपका अधिकार है — थाने से भी मिल सकती है
इस धारा की अलग-अलग उपधाराओं में अलग दंड हैं; यहाँ अधिकतम दिखाया गया है।
इसी अधिनियम के अपने उपबंध के अनुसार
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
