The Companies Act, 2013 206अध्याय XIV · Inspection, Inquiry and Investigation
धारा 206 · सूचना मांगने, पुस्तकों का निरीक्षण करने और पूछताछ करने का अधिकार
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) यदि किसी कंपनी द्वारा प्रस्तुत किसी दस्तावेज की जांच करने पर या रजिस्ट्रार को प्राप्त किसी सूचना के आधार पर यह राय हो कि कंपनी से संबंधित कोई अतिरिक्त सूचना, स्पष्टीकरण या दस्तावेज आवश्यक हैं, तो वह लिखित सूचना द्वारा कंपनी से निम्नलिखित की मांग कर सकता है:
(क) ऐसी सूचना या स्पष्टीकरण लिखित रूप में प्रस्तुत करना; या
(ख) ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए,
नोटिस में निर्दिष्ट उचित समय सीमा के भीतर।
(2) उपधारा (1) के तहत नोटिस प्राप्त होने पर, कंपनी और उसके संबंधित अधिकारियों का यह कर्तव्य होगा कि वे अपनी सर्वोत्तम जानकारी और क्षमता के अनुसार ऐसी जानकारी या स्पष्टीकरण प्रदान करें और रजिस्ट्रार द्वारा निर्दिष्ट या विस्तारित समय के भीतर रजिस्ट्रार को दस्तावेज प्रस्तुत करें।
बशर्ते कि यदि ऐसी जानकारी या स्पष्टीकरण किसी बीते हुए समय से संबंधित हो, तो उस अवधि के दौरान कंपनी के रोजगार में रहे अधिकारी, यदि रजिस्ट्रार द्वारा उन्हें लिखित रूप में नोटिस भेजकर ऐसा करने के लिए कहा जाए, तो वे भी अपनी सर्वोत्तम जानकारी के अनुसार ऐसी जानकारी या स्पष्टीकरण प्रदान करेंगे।
(3) यदि उपधारा (1) के अधीन निर्दिष्ट समय के भीतर रजिस्ट्रार को कोई सूचना या स्पष्टीकरण नहीं दिया जाता है, या यदि रजिस्ट्रार प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच करने पर इस राय का हो कि दी गई सूचना या स्पष्टीकरण अपर्याप्त है, या यदि रजिस्ट्रार प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच करने पर संतुष्ट हो कि कंपनी में असंतोषजनक स्थिति है और अपेक्षित जानकारी का पूर्ण और निष्पक्ष विवरण प्रकट नहीं होता है, तो वह एक अन्य लिखित नोटिस द्वारा कंपनी को ऐसे अतिरिक्त लेखा-पुस्तकों, पुस्तकों, कागजात और स्पष्टीकरणों को अपने निरीक्षण के लिए ऐसे स्थान और समय पर प्रस्तुत करने के लिए कह सकता है, जैसा वह नोटिस में निर्दिष्ट करे:
बशर्ते कि इस उपधारा के तहत कोई भी नोटिस जारी करने से पहले, रजिस्ट्रार को ऐसा नोटिस जारी करने के अपने कारणों को लिखित रूप में दर्ज करना होगा।
(4) यदि रजिस्ट्रार को उपलब्ध जानकारी के आधार पर या किसी व्यक्ति द्वारा उसे दिए गए अभ्यावेदन के आधार पर यह संतुष्टि हो जाती है कि किसी कंपनी का व्यवसाय कपटपूर्ण या गैरकानूनी उद्देश्य से चलाया जा रहा है या इस अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन नहीं कर रहा है या निवेशकों की शिकायतों का समाधान नहीं किया जा रहा है, तो रजिस्ट्रार कंपनी को उसके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की सूचना लिखित आदेश द्वारा देने के बाद, कंपनी को आदेश में निर्दिष्ट मामलों पर लिखित रूप में कोई जानकारी या स्पष्टीकरण देने के लिए कह सकता है, ऐसे समय के भीतर जैसा वह उसमें निर्दिष्ट करे, और कंपनी को सुनवाई का उचित अवसर प्रदान करने के बाद ऐसी जांच कर सकता है जैसा वह उचित समझे।
बशर्ते कि केंद्र सरकार, यदि वह संतुष्ट हो कि परिस्थितियाँ ऐसा करने की अनुमति देती हैं, तो रजिस्ट्रार या उसके द्वारा इस उद्देश्य के लिए नियुक्त निरीक्षक को इस उपधारा के अंतर्गत जाँच करने का निर्देश दे सकती है:
इसके अलावा, यदि किसी कंपनी का व्यवसाय धोखाधड़ी या गैरकानूनी उद्देश्य से चलाया गया है या चलाया जा रहा है, तो कंपनी का प्रत्येक अधिकारी जो दोषी है, धारा 447 में दिए गए तरीके से धोखाधड़ी के लिए दंडनीय होगा।
(5) इस धारा के पूर्वगामी प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, केंद्र सरकार, यदि वह संतुष्ट हो कि परिस्थितियाँ ऐसा करने की अनुमति देती हैं, तो इस उद्देश्य के लिए उसके द्वारा नियुक्त निरीक्षक द्वारा किसी कंपनी की पुस्तकों और कागजातों के निरीक्षण का निर्देश दे सकती है।
(6) केंद्र सरकार, परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, सामान्य या विशेष आदेश द्वारा, किसी वैधानिक प्राधिकरण को किसी कंपनी या कंपनियों के वर्ग के खातों की पुस्तकों का निरीक्षण करने के लिए अधिकृत कर सकती है।
(7) यदि कोई कंपनी इस धारा के तहत अपेक्षित कोई सूचना या स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने या कोई दस्तावेज पेश करने में विफल रहती है, तो कंपनी और कंपनी का प्रत्येक अधिकारी, जो दोषी है, एक लाख रुपये तक के जुर्माने से दंडित किया जाएगा और निरंतर विफलता के मामले में, पहली विफलता के बाद प्रत्येक दिन के लिए पांच सौ रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा, जिस दौरान विफलता जारी रहती है।
(क) ऐसी सूचना या स्पष्टीकरण लिखित रूप में प्रस्तुत करना; या
(ख) ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए,
नोटिस में निर्दिष्ट उचित समय सीमा के भीतर।
(2) उपधारा (1) के तहत नोटिस प्राप्त होने पर, कंपनी और उसके संबंधित अधिकारियों का यह कर्तव्य होगा कि वे अपनी सर्वोत्तम जानकारी और क्षमता के अनुसार ऐसी जानकारी या स्पष्टीकरण प्रदान करें और रजिस्ट्रार द्वारा निर्दिष्ट या विस्तारित समय के भीतर रजिस्ट्रार को दस्तावेज प्रस्तुत करें।
बशर्ते कि यदि ऐसी जानकारी या स्पष्टीकरण किसी बीते हुए समय से संबंधित हो, तो उस अवधि के दौरान कंपनी के रोजगार में रहे अधिकारी, यदि रजिस्ट्रार द्वारा उन्हें लिखित रूप में नोटिस भेजकर ऐसा करने के लिए कहा जाए, तो वे भी अपनी सर्वोत्तम जानकारी के अनुसार ऐसी जानकारी या स्पष्टीकरण प्रदान करेंगे।
(3) यदि उपधारा (1) के अधीन निर्दिष्ट समय के भीतर रजिस्ट्रार को कोई सूचना या स्पष्टीकरण नहीं दिया जाता है, या यदि रजिस्ट्रार प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच करने पर इस राय का हो कि दी गई सूचना या स्पष्टीकरण अपर्याप्त है, या यदि रजिस्ट्रार प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच करने पर संतुष्ट हो कि कंपनी में असंतोषजनक स्थिति है और अपेक्षित जानकारी का पूर्ण और निष्पक्ष विवरण प्रकट नहीं होता है, तो वह एक अन्य लिखित नोटिस द्वारा कंपनी को ऐसे अतिरिक्त लेखा-पुस्तकों, पुस्तकों, कागजात और स्पष्टीकरणों को अपने निरीक्षण के लिए ऐसे स्थान और समय पर प्रस्तुत करने के लिए कह सकता है, जैसा वह नोटिस में निर्दिष्ट करे:
बशर्ते कि इस उपधारा के तहत कोई भी नोटिस जारी करने से पहले, रजिस्ट्रार को ऐसा नोटिस जारी करने के अपने कारणों को लिखित रूप में दर्ज करना होगा।
(4) यदि रजिस्ट्रार को उपलब्ध जानकारी के आधार पर या किसी व्यक्ति द्वारा उसे दिए गए अभ्यावेदन के आधार पर यह संतुष्टि हो जाती है कि किसी कंपनी का व्यवसाय कपटपूर्ण या गैरकानूनी उद्देश्य से चलाया जा रहा है या इस अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन नहीं कर रहा है या निवेशकों की शिकायतों का समाधान नहीं किया जा रहा है, तो रजिस्ट्रार कंपनी को उसके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की सूचना लिखित आदेश द्वारा देने के बाद, कंपनी को आदेश में निर्दिष्ट मामलों पर लिखित रूप में कोई जानकारी या स्पष्टीकरण देने के लिए कह सकता है, ऐसे समय के भीतर जैसा वह उसमें निर्दिष्ट करे, और कंपनी को सुनवाई का उचित अवसर प्रदान करने के बाद ऐसी जांच कर सकता है जैसा वह उचित समझे।
बशर्ते कि केंद्र सरकार, यदि वह संतुष्ट हो कि परिस्थितियाँ ऐसा करने की अनुमति देती हैं, तो रजिस्ट्रार या उसके द्वारा इस उद्देश्य के लिए नियुक्त निरीक्षक को इस उपधारा के अंतर्गत जाँच करने का निर्देश दे सकती है:
इसके अलावा, यदि किसी कंपनी का व्यवसाय धोखाधड़ी या गैरकानूनी उद्देश्य से चलाया गया है या चलाया जा रहा है, तो कंपनी का प्रत्येक अधिकारी जो दोषी है, धारा 447 में दिए गए तरीके से धोखाधड़ी के लिए दंडनीय होगा।
(5) इस धारा के पूर्वगामी प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, केंद्र सरकार, यदि वह संतुष्ट हो कि परिस्थितियाँ ऐसा करने की अनुमति देती हैं, तो इस उद्देश्य के लिए उसके द्वारा नियुक्त निरीक्षक द्वारा किसी कंपनी की पुस्तकों और कागजातों के निरीक्षण का निर्देश दे सकती है।
(6) केंद्र सरकार, परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, सामान्य या विशेष आदेश द्वारा, किसी वैधानिक प्राधिकरण को किसी कंपनी या कंपनियों के वर्ग के खातों की पुस्तकों का निरीक्षण करने के लिए अधिकृत कर सकती है।
(7) यदि कोई कंपनी इस धारा के तहत अपेक्षित कोई सूचना या स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने या कोई दस्तावेज पेश करने में विफल रहती है, तो कंपनी और कंपनी का प्रत्येक अधिकारी, जो दोषी है, एक लाख रुपये तक के जुर्माने से दंडित किया जाएगा और निरंतर विफलता के मामले में, पहली विफलता के बाद प्रत्येक दिन के लिए पांच सौ रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा, जिस दौरान विफलता जारी रहती है।
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